Monthly Archives: January 2016

Bangla Choti Fuck My 2nd Girl Friend Annie Pussy

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Bangla choti fuck Hi বন্ধুরা কেমন আছো ? আজ যে ঘটনা টি আপনাদের সাথে share করতে চলেছি সেটি Girl Friend Annie Pussy আমার দিতীয় gf Annie কে নিয়ে. ইতিমধ্যে HSC পাস  করে গেছি Collage  এ  ভর্তি  হয়েছি, Engineering collage তাও 1st yr দাদা  দের  শাসন  আর  পরাসনার চাপ  দুটি  খুব  বেসি.প্রথম  gf  এর  সাথে  breakup  হয়েগেছে  বেস
কিছুদিন  হলো মনে  টাও ভালো  থাকেনা,বাড়ির  বইরে  একা একা থাকতে  হচ্য়ে.সময়  কিছুতেই  কাটতে  চায়  না.এরে মধ্যে দেখতে দেখতে 1st  সেমিস্টার exam ও হয়েগেল.কিছুদিনের জন্য ছুটিতে বাড়ি ঘুরে গেলাম আসলাম।

মেস  এ ফিরে ভাবলাম অনেক হয়েছে এবার একটা gf জোটাতেই হবে নাহলে সময় কাটানো খুব মুস্কিল হয়েজাচ্যে ঠিক এই সময় এক senior এর সুত্রে তার বান্ধবীর বান্ধবীর সাথে আলাপ জমে উঠলো.ক্রমে
ফোনে এ কথা থেকে proposal  সবে হলো.মাগীটা মেডিকেল এর স্টুডেন্ট
ছিল.খাসা মাল একবারে.যেমন  ফিগার তমন দেখতে.উঁচু উঁচু পাছা,রাস্তা
দিয়ে হেঁটে গেলে যে কারোর ধন ঠাটিয়ে যেতে বাধ্য.আর ছিল খাই খাই
ভাব..যখনি কাছে থাকত মনেহত অর সাথে কিছু একটা করলে ও যেন
শান্তি পায়.
দেখতে দেখতে ৬মাশ কেটেও গেল.তখন হোলির সময়.মেস এ  প্রায়
কেউএ নেই.সুধু আমি র আমার বেস্ট ফ্রেন্ড.অর সাথে যুক্তি করলাম,gf কে
মেস এ নিয়ে এসব,সুযোগ পেলে চুদবো আর ও পাহারা দেবে যাতে কেউ
হটাথ এসে দেখে না ফেলে.

Bangla choti fuck প্লান  মত  আমার  gf এসে  হাজির  হলো 

ঠিক  সকাল  10.30 টা.একটা  tight  jeans আর
top পরে .jeans টা  গুদের  কাছে  এমন  ভাবে  চেপে  বসেছিল  যে  গুদটা  ফুলে  আছে  মনে
হছিল .মেস এ আমার  single room ছিল ,সিড়ির  ঘর .যখানে  এমনেই  সচরাচর  কেউ
যেত  না খুব  একটা .নিয়ে  গেলাম  আমার  ঘরে .ও  আমার  ঘরে  ঢুকতেই  দরজা  টা  বন্ধ
করে  দিয়ে  অর  পাসে  গিয়ে  বসলাম ,একথা  অকথা  বলার  ফাকে  ফাকে  অর  উরু  তে
হাথ  বলাছিলাম  আর  ও  আমার  কাঁধে  মাথা  দিয়ে  বসে  ছিল.আসতে  আসতে  ওর  মুখ
টা  তুলে  কিস  করলম .ও  রেসপন্সে  করলো .আমক  জড়িয়ে  ধরে  kiss করতে  সুরু
করলো  আর  আমি  ওর  36 sizer দাব্কা  মাই  গুলো  খেলতে  লাগলাম .দেখলাম  কিছু
বলল  না .আমার  সাহস  বেড়ে  গেল .ওর  টপ  এর  বোতাম  গুলো  খুলে  দিয়ে  ওর  ঘরে
কিস  করতে  লাগলাম ,

বুঝলাম  ও  বাপার  টা  বেস  উপভোগ  করছে .জড়িয়ে  ধরে  ওকে
বিছানায়  সুইয়ে  দিয়ে  top টা  খুলতেই  ওর  দাব্কা  মাই  গুলো  চোখের  সামনে  বেরিয়ে
এলো .ভিতরে   সুন্দর  designer বরা  পরেছিল  একখানা  কালো  রঙের ,nipple টা  বাদ
দিয়ে  প্রায়  পুরো  মাই  তাই  বেরিয়ে  ছিল .Kiss করতে  করতে  মাই  গুলো  পালা  করে
চটকাতে  লাগলাম .তারপর  ওর  ঘরে  গলায়  কিস  করতে  করতে  নিচে  নামতে
থাকলাম .

Bangla choti fuck ওর  গায়ের  গন্ধটা  odvut রকম  মিষ্টি  ছিল .পাগল  করা ..ওর  মাইয়ের
চারধারে  kiss করতে  লাগলাম  আর  একটা  মাই  আলতো  করে  টিপতে  লাগলাম
,তারপর  পালা  করে  মাই  গুলো  চুষতে  সুরু  করলাম  আর  ও  মুখ  দিয়ে  আআহ ..উঅঃ
..আআঃ…সব্দ   করতে  লাগলো  খুব  আসতে  আসতে .বুঝলাম  মাগী  line এ  এসেছে ..যা
করার  এখনি  করতে  হবে  তারউপর  মেসে হটাথ  কেউ  চলে  এলেও  বিপদ ..
এমন  সময়  ছন্দপতন .. Table এর উপর  রাখা  আমার  ফোন  টা  হটাথ  বেজে  ওঠে  খুব  বিরক্ত  লাগলো .phone টা  তুলে  দেখি  মেসের  মালিক .বলল  আর  কিছুক্ষণের  মধ্যেই  মেসে  আসছে  কি  একটা  দরকারে ..আমার  চোদার   সপ্ন  মাথায়  উঠলো .তারাতারি
করে  উঠে  দুজনে  ঠিকঠাক  হলাম  আর  মেস  থেকে  ওকে  নিয়ে  বেরিয়ে  গেলাম ..
পরে  একদিন  দেখা  করতে  গিয়ে  plan করলাম  বোলপুর  যাব  বেড়াতে .একরাত  থেকে  পরের  দিন  যে  যার  বাড়ি
ফিরেজাব .সেই  মত  এক  রবিবার  আমরা  বোলপুর  এর  উদ্দেস্সে  রওনা হলাম .station এ  নেমে  এক  রিক্সব  বলার
কাছে  ভালো  হোটেলের  খোঁজ  করতেই  সে  নিয়ে  গেল  একটা  3star হোটেল  এ .double  bed এর  একটা  room
ভাড়া  করলম.হোটেল  এ  স্বামী  স্ত্রীর  পরিচয়  দিয়ে .কোনো  অসুবিধা  হলনা .রুমে ঢুকে  বেস  পছন্দও  হয়েগেল  রুম  টা  দুজনেরে দরজা  বন্ধ  করে  সবে  বিছানায়  সুয়ে  একটু  rest নিছি  চোখ  টা  বুজে .চোখ  খুলে  একবার  আয়নার  দিকে  তাকাতেই দেখি  আমার  sexy   ডাবকা  মাগীটা  salwar  Bangla choti fuck  এর  উপর  টা  খুলে  বরা  পরে  দাড়িয়ে  আছে  আর  পান্ট  টা  খুলছে ..সুয়ে সুয়ে  সেই  দৃসস  দেখতে  লাগলাম .একসময়  সুধু  কালো  রঙের  একটা  bra আর  কালো  panty পরে  সে  বাগ গোছাতে  সুরু  করলো .দেখতে  দেখতে  এর  মধ্যেই  ধন  খাড়া  হয়ে  পান্টের  মধ্যে  ফুঁসছে ..উঠে  গিয়ে  পিছন  থেকে
জড়িয়ে  ধরে  মাই  গুলো  চটকাতে  লাগলাম  আর  ঘারে  kiss করতে  লাগলাম ..জীবনে  এত  নরম  কোনো  জিনিস  হাথের  মুঠোয়  এসেছে  বলে  মনেপর্লনা ..ইচ্ছা  করছিল  তখনে  একবার  চুদে  নেই  কিন্তু  মাগী  ঘুরে  আমাক  জড়িয়ে ধরে  কিছুক্ষন  kiss করার  পর  বলল ..”এখন  না  plz.সারাদিন  তো  পরেই  আছে .এখন  একটু  ফ্রেশ  হয়েনেই ??

 

ভাবলাম  যুক্তি  টা  ভুল  না ..সারাদিনে  পরে  আছে ..এখন  থেকে  energy নষ্ট  করে  লাভ  নেই .ও  bathroom এ  গেল   fresh হতে ,আমিও  চাঙ্গে  করে  নিলাম .bathroom থেকে  যখন  বেরোলো  সেও  এক  দৃসস …একটা  পাতলা  nighty পরে ,ভিতর  এ  আর  কিছুই  নেই ..দুধ ,গুদ ,পাছা  সবে  দেখাজাচ্য়ে ..মনেমনে  ভাবলাম  মাগী  আজ  তর  কপালে  কষ্ট আছে .এত  সরির  দেখানো  তর  বের্কর্চি ..এই  ভাবতে  ভাবতে  দুধ  দুটো  ধরে  একবার  চটকে  দিয়ে  bathroom গিয়ে  fresh হয়ে  এলাম .অনেকটা  বেলাও  হয়ে  গিয়েছিল .খাবারের  order  Bangla choti fuck  দিলাম ,room service, room এ  এসে  খাবার দিয়ে  গেল .খেয়ে  উঠে  দুজনে  সুয়ে  সুয়ে  গল্প  করতে  থাকলাম ..হটাথ  দেখি  মাগী  আমার  barmudar উপর  দিয়ে আমার  ধন  টা  হাথাতে  সুরু  করেছে ..ঠিক  আরাম  পাচিল্লাম  না ..তাই  ওর  হাথ  টা  নিয়ে  barmudar ভিতর  ঢুকিয়ে দিলাম ..নরম  হাথের  ছোয়া  পেয়ে  আমার  বার  ততক্ষনে  খাড়া  হতে  সুরু  করে  দিয়েছে ..হটাথ  মনেহলো  মাগির  সেক্ষ্য ঠোঁট  গুলো  দিয়ে  একবার  বাড়া  টা  চুসিয়ে  নিলে  মন্দ  হয়না ..বললাম  “এই  একটু  চুসে  দাও  না  গো ..”কিছুতেই রাজি  হবেনা ..আর  আমিও  ছাড়বনা ..

bangla fucking golpo in bangla language

সেসবধি  অনেক  কষ্টে  রাজি  করলাম ..আমার  burmuda টা  খুলে  ওর  মুখের  কাছে  আমার  বাড়া  টা  এগিয়ে  দিলাম ..আসতে  আসতে  চুষতে  সুরু  কল ..আআআঃ ..সে  কি   আরাম  বলে  বোঝানো
যাবেনা ..মুখের  ভিতর  টা  গরম   আর  জিভের  চাটন  খেয়ে  বাড়া  টা  রীতিমত  ফুসতে  সুরু  করেছে  তখন ..ওর
nightyr ভিতর   এ  এমনেই  কিছু  ছিল  না ..হাথ  ঢুকিয়ে  গুদ  টা  স্পর্স  করতেই  দেখি  পুরো  ভিজে  জব  জব  করছে
…আর  একদম  পরিস্কার  করে  কমানো  গুদ .অত  সুন্দর  জিনিসটা  দেখার  লোভ  সামলাতে  পারলাম  না .nighty   টা
কমর  অবধি  তুলে  দিয়ে  ওকে  আমার  উপরে  নিয়ে  নিলাম   আর  গুদে  নাক  টা দিয়ে  সুন্কতে  লাগলাম ..উঅঃ… কি
অপূর্ব  গন্ধ ,জিভ  দিয়ে  লিক  করতে  সুরু  করলাম .মাগী  দেখলাম  পুরো  horney হয়েগেছে ..মুখে  আমার  বাড়া  টা
নিয়ে  ঊঊউহ্হ …আআআঃ ..হমমম ..ওই  খান  টা ..এসব  বলতে  সুরু  করলো  আর  আরো
জোরে  জোরে  আমার  বাড়া  টা  suck করতে  লাগলো ..গুদ  টা  হাথে  করে  ফাক  করে  ওর
যোনি  তে  জিভ  টা  সরু  করে  ঢুকিয়ে  দিলাম ..আর  ও  আআআআঅহ্হ ..করে  উঠলো   আর
গুদ  টা  আমার  মুখের  উপর  আরো  চেপে  ধরল ..এদিকে  আমিও  অনেক  দিন  পর  কোনো
মাগিক  দিয়ে  বাড়া  চসাছি  তাই  বেশিক্ষণ  মাল  ধরে  রাখতে  পারবনা  বুঝলাম ..minute
2-৩এক  গুদ  টা  চেতে  postion change করে  নিলাম .. ওকে  নিচে  সুইয়ে  একটা  মাই  মুখে
ভরে  nipple  টা  চুষতে  লাগলাম  আর   একটা  চটকাতে  লাগলাম  পালা  করে ..আর  ও  আমার
থাটানো  বাড়া  টা   নিয়ে  ওর  গুদ  এ  ঘসতে  লাগলো ..কিছুক্ষণ  পরে  নিজেই  বলল  “এবার  কর  plz..আমি  আর  পারছিনা ..

 

”আমি  উঠে  বসে  অর  কোমরের  নিচে একটা  বলিস  দিয়ে  গুদ  তাক  একটু  উঁচু  করে  দিলাম  আর  পা  দুটো  আমার  কাঁধে  নিয়ে   গুদ  এর  মুখে  বাড়া  তা  রেখে ঘসতে  লাগলাম  কিন্তু  ঢোকালাম না ..এতে  ও   আরো  horney   হয়েগেল ..দেখলাম  অর  গুদ  দিয়ে  রস  গড়িয়ে  পরছে  আর   ও  আমাক  বলতে  লাগলো  “plz ঢোকাও ..আর  পারছিনা ..plz”..বুঝলাম  আর  কষ্ট  দেওয়া  ঠিক  হবেনা ..গুদের  মুখে  বাড়া
তা  সেট  করে  আসতে  করে  একটা  ঠাপ  মারতেই  পিছিল  গুদ  এ  বাড়ার  মাথাটা  ঢুকে  গেল  আর  ও  আআআআআঅহ্হ
..আসতে  করো ..বলে  সিতকার  করে  উঠলো .দেখলাম  এ  তো  মহা  বিপদ  এই  ভাবে  চিত্কার  করলে  তো  হোটেলের
সবাই  সুনতে  পাবে ..!! তাই  ঝুঁকে  পরে  অর  ঠোঁটে  ঠোঁট  ডুবিয়ে  দিলাম  আর  আসতে  আসতে  ঠাপ  মারতে  লাগলাম
..পুরো  বাড়া  তা  ওর  গুদে  চালান  করে  দিলাম ..গুদের  ভিতর  টা  যেমন  গরম  সেরকম  tight..মনেহলো  বাড়া  টা  পুরেই যাবে ..

বেস  আরাম  পাচিল্ল্ম  এরকম  একটা  tight গুদ  এ  বাড়া  ঢুকিয়ে ..গুদ  এ  বাড়া  ঢুকিয়ে  রেখেই  ওর  উপর  সুয়ে
ওকে   kiss করতে  লাগলাম ..দেখলাম  মাগির  তর  সইছেনা ..নিচের  থেকে  তল  ঠাপ  দিতে  সুরু  করেছে ..আমিও  সুরু
করলম  ঠাপ  মারা ..মাগী গুদের দেয়াল দিয়ে আমার বাড়া টা চেপে চেপে ধরছিল.ঠোঁট  থেকে  ঠোঁট  তুলতেই  ও   মমমমমমম
…আআআআহঃ ..ঊঊঊওহ্হ্হ ..রেকটু  জোরে ..এরকম   না  না  কথা  বলতে  সুরু  করলো .আমার  তখন   মাথায়  মাল  উঠে
গেছে ..minute 5 টানা  ঠাপানোর  পর  গুদ  থক  বারতা  বার  করে  নিয়ে  ওকে   বললাম  doggy pose এ  করব ..সঙ্গে  সঙ্গে
রাজি ..উপর  হয়ে  সুয়ে  গাঁড়  টা  উঁচিয়ে  দিল  আমার  সামনে ..এরমধ্যে  দেখলাম   একবার  জল ও  খসিয়েছে ..কারণ
বালিশ  চাদর  ভিজে  গেছে ..যাইহোক  আর  দেরী  না  এক  ঠাপ  মেরে  গোটা  বাড়া  টা  ওর  গুদে  ভরে  দিতেই ..ঊঊঊওক
করে  উঠলো ..

বুঝলাম  একটু  বেসেই  জোরে  হয়েগেছে ..মাগির  কমর  টা  ধরে  ঠাপ  মারতে  থাকলাম ..দেখলাম  মাগির
জল  খসানোর  time   হয়েগেছে  আবার ..বিছানার  চাদর  খামচে ধরে ..ঊঊঊউহ্হ্হ্হ ..আআআআহঃ …মমমমম …মাআগ
..করে  চিত্কার  করে  জল  খসিয়ে  দিল ..আরো  5-7ta  Bangla choti fuck   ঠাপের  পর  আমিও  ওর  গুদের  মধ্যেই  মাল  ছেড়ে  দিলাম ..চোখে
সরসে  ফুল  দেখার  মত  অবস্থা  হলো ..বারতা  গুদে  রেখেই  ওর  উপর  ক্লান্ত  হয়ে  সুয়ে  পরলাম ..কতক্ষন   সুয়েচিলাম
জানিনা ..যখন  ঘুম  ভাঙ্গলো  তখন  বিকাল  হয়েগ্ছে ..দুজন  একসাথেই  বাথরুম  গিয়ে  ফ্রেশ  হয়ে  নিলাম ..তারপর  চা
খেয়ে  বেরিয়ে  পরলাম  ঘুরতে .. সেদিন  মাগীকে  আরো  দুবার  চুদেচিলাম  রাত  এ ..সেই  গল্প  আবার  পরে  একদিন   বলব ..

Bangla choti কেমন  লাগলো  জানাবেন ..আপনাদের   মতামতের  অপেক্ষায়  রইলাম ..

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How to improve penis size

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The ways of sex? penis size and from that day to the day when people have learned to walk upright in his mind that asking, big penis – how my penis is getting bigger? Yet it is difficult to find a man whose mind has been this question. We constantly find this kind of question in our FAQ section to answer. Most of the time we have this kind of pressure, a lot of the same questions I do not question. We apologize for. And the answer to this question for a long time to write a text written guarantee without having to write. This will amplify the strike lonely you this question.

How to take the penis size and a normal penis size ?:

For small to big is your cock before taking the size is very important. Cock of the head of the Orthodox grown up in the belly of the covenant that the size of pennies, it’s the size of your cock. Now if this is how normal you say is the size of pennies? The physical structure of the male is not like us in the West. So the Internet is very likely to be upset when their information. According to the physical structure of our will be grown about five or six.

If the car is in need pennies?

This is very few people may need. Inch grown less than three pennies size disorder can be called a micro-pennies. However, only six of every 1,000 men, this could be a problem. The other person is not required for the general pennies.
Method rose pennies really work?

How to take the penis size and a normal penis sizeWhen we went to the back of the pennies emblematic scientific method is no evidence or explanation, we could not find any source that is generated by any scientific method Tested safe method. Most web sites are the most talk about their products, unconfirmed data, a false letter of appreciation, praise and even false medical. If there was really no way, then we would know it as we know about Viagra helps the penis rise.
Now, let’s see, what the market rose and the method of pennies. Normal use of the pill, cream, gel.

 

Generally, these are all products that are in demand in a variety of natural, vitamin, mineral, hormone, etc., the size of the cock. Most producers do not want to say that this is really the key elements on their products. Our belief is that to which we are being told the truth because of the size of pennies and would like to say that I believe so. A study by the University of Maryland in the United States, these products is harmful lead, pesticides, animal feces were found.
Various equipment such as vacuum pumps, cock stretcher, ring, etc., and we have seen on the internet, hear. Vacuum pump blood out of pennies, hold and drag to the size of pennies is claimed. There is no research to support this claim, but argued. It’s more than a lot of people using the blood vessels of the penis completely torn from the start and could not be grown. And the same could happen in the case of pennies stretcher.

 

Some, such as milk fathom out the sex of the stars and tried to relax. This method has been described in many Internet sites. However, there is no evidence that any of this kind comes to fathom.
However, the only micro-pennies (3 inch grown under conditions of) the problem, or there are no accidents due to the incompatibility of Aid in any form or by surgery may be a little difference, but it can be increased in size and that it is not sex. This is again due to the surgery may disrupt normal sexual life.

 

So, do not worry so much about the size of pennies in the normal way to be satisfied with what is good. And keep in mind, joyful sex life does not depend on penis size large.

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অজাচার গ্রুপ সেক্স স্টোরি – পারিবারিক চোদনমেলা – ১

Paribarik Chodacudir Bangla choti golpo 1st part

মার্চ ২০১৫ তে আবার আমি ছুটিতে গেলাম। তবে এবার ছুটিতে যাওয়ার আরো একটা কারন তা হলো “বিয়ে” হ্যা, মা বাবা খুব জোড় করে ধরল বিয়ে করতে হবে। উপায় না দেখে দেশে গেলাম তবে আমি মনে মনে ঠিক করেছিলাম যে কয়েকদিন মেয়ে দেখার ভান করে কাটিয়ে মা বোনদের ভালো করে চুদে আবার চলে আসবো। কারন মনের মধ্যে ভয় ছিল যদি বিয়ে করি তাহলে হয়তো মা আর চুদতে দিবে না।

যাই হোক যেদিন বাড়িতে গিয়ে পৌছলাম সেদিন রাতে যথারিতি মাকে আমার সাথে ঘুমাতে বলি। মাও এক কথায় রাজি হয়ে গেল। গল্পগুজব শেষ করে রাত ১০টার দিকে সবাই মিলে একসাথে খাওয়া দাওয়া শেষ করলাম। তারপর যে যার রুমে ঘুমাতে চলে গেল আর আমিও মাকে নিয়ে আমার রুমে চলে গেলাম। রুমে ঢুকেই মাকে জড়িয়ে ধরে তার ঠোটে কিস করলাম তারপর অনেকক্ষন চুষলাম আর মায়ের কপালে, ঘাড়ে, গালে, কানে চুমুতে লাগলাম আর হাত দিয়ে মার দুধগুলো টিপতে লাগলাম। মাও অনেকদিন পর আমাকে কাছে পেয়ে নিজেকে আবার আগের মতো আমার কাছে সপে দিল। আর নিজেও আমাকে পাগলের মতো চুমু দিতে লাগলো। এভাবে ১০/১৫ মিনিট চলার পর আমি মাকে নিয়ে গিয়ে বিছানায় বসালাম। তারপর মাকে বললাম আমি বিয়ে করবো না। আমি শুধু তোমার জন্য দেশে এসছি আর বিয়ে করলে আমি আর তোমাদের কাউকে চুদতে পারবো না। অন্যদের না চুদে থাকতে পারবো কিন্তু তোমাকে না চুদে থাকতে পারবো না।

মা – কে বললো বিয়ে করলে আমাকে চুদতে পারবি না আমি তো তোরই আছি তোর যখন মন চাইবে তখনই আমাকে চুদতে পারবি।
আমি – তবুও এখনকার মতো তো আর পারবো না।
মা – হুমমম তা একটু সমস্যা তো হবেই তাই বলে কি তুই বিয়ে করবি না?
আমি – তোমরা আগে সেজ ভাইকে বিয়ে করাও তারপর দেখা যাবে।
মা – তুই অযথা চিন্তা করছিস দেখবি কিছুই হবে না আর তা ছাড়া বিয়ে করলে নতুন একটা শরীর পাবি তাকে ইচ্ছেমতো চুদতে পারবি।
আমি – তা পারবো কিন্তু তোমাকে তো আর এখনকার মতো চুদতে পারবো না?
মা – তুই যাতে আমায় দিনে অন্তত একবার চুদতে পারিস সে ব্যবস্থা আমি করে দিব।
আমি – কিভাবে?
মা বললো- যেভাবেই হোক আমি ব্যবস্থা করে দেব।

যাই হোক মার কথা শুনে কিছুটা স্বস্তি ফিরে পেলাম। আমি মাকে বললাম এক কাজ করলে কেমন হয় আমি বিয়ের পর তাকে আর তোমাকে যদি একসাথে চুদি তাহলে কেমন হবে?
মা – সে কি সেটা মেনে নিতে পারবে?
আমি – সেটা আমি ব্যবস্থা করবো, আর আমার বিশ্বাস আমি তাকে রাজি করাতে পারবো।
মা- ঠিক আছে সেটা হলে তো ভালোই হয় তোর আমার মিলনে আর কোন বাধা থাকবে না।
আমি – আচ্ছা মা আমাদের ব্যাপারটা যে বাবাকে জানাতে বললাম সেটা তুমি জানিয়েছো?
মা- হ্যাঁ
আমি – বাবা কি বলল?

মা – প্রথমে ব্যাপারটা মেনে নিতে রাজি হয়নি যখন আমি তাকে তার ব্যাপারটা (এখানে বলে রাখি আমার বাবার সাথে একজন মহিলার অবৈধ সম্পর্ক ছিল সেটা আমরা সবাই জানতাম) সবাইকে জানিয়ে দিব বলি তখন কিছুটা নরম সুরে কথা বলে।
আমি – তারপর?
মা – জিজ্ঞেস করে আমরা কবে থেকে এসব করছি? আমি সব বলে দিয়েছি তাকে।
আমি – ওয়াও দারুন তো, তার মানে বাবা জানে এখন আমরা এই রুমে কি করবো?
মা – হ্যাঁ
আমি – আচ্ছা মা আমি যে এতদিন ছিলাম না তোমাকে কে কি আমার বন্ধুরা আর বাবার বন্ধুরা সব সময় এসে চুদতো?
মা – হুমমম তারা মাঝে মাঝে আসতো, তবে তাদের চোদায় মজা পাই না।
আমি – তাই নাকি, আমি চুদলে বুঝি মজা পাও?

মা – হুমমমম, অনেক বলে মা আমাকে জড়িয়ে ধরে চুমু দিল।
আমি – আচ্ছা মা বাবা আর আমি যদি এক সাথে তোমাকে চুদতে চাই বাবা কি রাজি হবে আর তোমার কি কোন প্রকার আপত্তি আছে?
মা – আমার আপত্তি থাকবে কেন, কিন্তু তোর বাবা রাজি হবে কি না সন্দেহ আছে, তবুও আমি চেষ্টা করবো। আচ্ছা এখন কি শুধুই কথা বলবি অনেকদিন তোর ধনটা দেখি নি গুদে নেই নি আগে একবার চুদে দে তারপর সারা রাত আমরা মা ছেলে গল্প করবো বলে মা আমার ধনটা মুঠো করে ধরে বলল এটাতো এখনই শক্ত হয়ে আছে।
আমি – এখন না যখন তোমাকে নিয়ে রুমে ঢুকলাম তখনই ওঠা খাড়া হয়ে গিয়েছিল বলে আমিও মার ব্লাউজটা খুলে দিয়ে মার দুধগুলো একটা একটা করে টিপতে আর চুষতে শুরু করলাম আর মা আমার ধনটা উপর নিচ করে খেঁচতে লাগলো।

মা – কতদিন পর তুই আবার আমাকে আদর করছিস, আমার যে কি ভালো লাগছে, ভালো করে ওগুলো টিপে আর চুষে দে। দেখ তোর মুখের ছোয়া পেয়ে বোটাগুলো কেমন শক্ত হয়ে গেছে।
আমি – আমিও এতদিন অনেক কষ্ট করেছি প্রতিটি মুহুর্ত তোমাকে কল্পনা করেছি আর খেচে মাল বের করেছি আর মাঝে মাঝে বিভিন্ন দেশের মেয়েদের চুদছি কিন্তু তোমাকে যে চোদার স্বাদ সেটা কাউকে চুদে পাইনি।
মা – তাই নাকি? কত জনকে চুদলি ওখানে আর ওখানে তো চুদতে মনে হয় অনেক টাকা লাগে তাই না?
আমি – হুমমম তোমাকে তো আমি সবই বলছি কখন কবে কাকে চুদছি।
মা – হুমম, বলে মা মুখটা নামিয়ে আমার ধনটাতে আলতো করে জিহ্ব দিয়ে চেটে দিল আমি শিউরে উঠলাম।
মা – কি রে অমন লাফ দিয়ে উঠলি কেন?
আমি – অনেকদিন পর আবার তুমি আমার ধোনটায় জিহ্ব লাগাতে এক অসাধারন শিহরন অনুভব করলাম। একটু ভালো করে চুষে দাও।
মা – শুধু কি আমি চুষবো তুই চুষবি না?
আমি – চুষবো বলে আমরা ৬৯ পজিশন নিয়ে মার মুখে আমার ধনটা ঢুকিয়ে দিয়ে আমি মার গুদটা চাটতে লাগলাম।
মাও শিউরে উঠে বলল কতদিন পর আমার গুদে তোর মুখ লাগলো তোর বন্ধুরাতো ভালো করে চুষতেও পারে না। এখন থেকে তাদেরকে দিয়ে আর চোদাবো না।
আমি – তাই নাকি?

দাড়াও কালই ওদের মজা দেখাবো বলে আমি ভালো করে জিহ্বটা মার গুদের চেড়ায় ঢুকিয়ে চুষতে লাগলাম। আমার চোষায় মার গুদটা কিছুটা পিচ্ছিল হতেই আমি দুইটা আঙ্গুল গুদের ভিতর ঢুকিয়ে দিয়ে আঙ্গুল চোদা দিয়ে গুদের ক্লিটোরিসটা চাটতে আর চুষতে লাগলাম। এভাবে প্রায় ২০ মিনিট আমি মার গুদ আর মা আমার ধন চুষলো তারপর আমি মাকে ডগি স্টাইলে বসিয়ে পিছন থেকে মায়ের চুলের মুঠি ধরে আস্তে আস্তে আমার ধনটা ঢুকিয়ে দিয়ে ঠাপাতে লাগলাম। দেখলাম রসে আর থুথুতে মার গুদটা একদম পিচ্ছিল হয়ে গেল আমার ধনটা অনায়াসে ঢুকছে আর বের হচ্ছে। মাকে জিজ্ঞেস করলাম …
আমি: আচ্ছা মা তোমাকে তো আমার সব কথা বললাম আমি কাকে কাকে চুদছি আর কাকে চুদতে চাই। আমি যে এমন তোমার কি আমার উপর রাগ হয়?
মা: তা একটু হয়?
আমি: কেন?

মা: তুই যেদিন আমাকে প্রথম চোদার কথা বলেছিস তখন তো আমার অনেক রাগ হয়েছিল তখন যদি তোকে পেতাম হয়তো মেরেই ফেলতাম। কিন্তু যখন তুই তোর সমস্যার কথা বললি তখন খুব মায়া লাগলো তোর উপর। এই বয়সে সত্যি সত্যি যদি তোর খারাপ কিছু হয় তাহলেতো সমস্যা। তাই তুই যখন তোর রোগের কথা বলে আমাকে চোদার কথা বললি তখন না করতে পারিনি। মা হয়ে যদি আমি তোর উপকারে না আসি তাহলে আর কে আসবে তাই তো তোকে নিষেধ করিনি। তবে এখন আমাকে ছাড়া অন্য কাউকে চোদার কথা বললে আমার খুব রাগ হয়।
আমি: তুমি যে কত ভালো মা সেটা একমাত্র আমিই জানি। কথা বলার সাথে আমি সজোরে ঠাপিয়ে যাচ্ছি। মা তোমার কেমন লাগছে আমার চোদা?

চলবে …..

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সোসাইটির দারওয়ানের সাথে

আমার নাম রোহিণী, বয়স ৩২ বছর আর শরীরের গঠন ৩২-৩৭-৩২। আমি আমার শরীরের প্রতি খুব সচেতন। আমাদের সোসাইটির সব পুরুষেরা আমার প্রতি আকৃষ্ট। আমার বিয়ে হয়েছে ৭ বছর হয়ে গেছে। আমার একটি ৩ বছরের মেয়ে আছে। আমি ধনি পরিবারের বউ।

বিয়ের আগে কলেজে পড়াকালীন বহু ফষ্টিনষ্টি করে বেরিয়েছি কিন্তু বিয়ের পর নিজেকে সুধ্রে নিয়েছি। কিন্তু পরিস্থিতি আমায় আবার আমার পুরানো জীবনে ফিরিয়ে নিয়ে যায়। আমাদের সোসাইটির দারওয়ান ও আরও অনেকের সাথে যৌন সম্পরকে জড়িয়ে পড়ি।
আমার স্বামী কাজ পাগল তাই আমার সাথে সে রকম সময় দিতে পারেনা। যেহেতু আমরা পরিবার খুবই আধুনিকা তাই আমরা লেট নাইট পার্টীতে যেতাম।
সাধারনত বাড়িতে হাতকাটা টপ ও শর্টস পরতাম।
যায় হোক এবার আসল ঘটনাতে আসি।

কিছুদিন আগে আমাদের সোসাইটির পুরানো দারওয়ানকে কাজ থেকে বহিস্কার করে এক নতুন দারওয়ান নিয়োগ করে যার নাম কিসান। সুথাম, সবল শ্যামবর্ণ পুরুষালি কিষানকে প্রথমবার দেখেই আমার গোপন অভিসারের ইচ্ছা জেগে উঠল। মনে মনে তার প্রতি আকৃষ্ট হয়ে গেলাম। হথাত কেন এমন হল জানিনা।

হয়ত অনেকদিন বাঁড়ার স্বাদ পাইনি বলে হয়ত। যতদিন যেতে থাকে তার প্রতি আমার টান বাড়তে থাকে।
একদিন তাকে পাখা ঠিক করার উছিলায় তাকে আমাদের ফ্ল্যাটে ডেকে পাঠায়।
তখন আমার পরনে একটি ক্রপ টপ আর লেগিন্স। ক্রপ টপ তলায় আমার নাভিকুণ্ডল আর লেগিন্স পড়া আমার সেক্সি থায় গুলো তার নজর এড়াই না। তার খুদার্থ চোখ দেখে বুঝতে পারলাম সেও আমার মত খুদার্থ।

আমাকে চেয়ার ধরতে বলে সে ওপরের পাখা ঠিক করতে লাগল। হঠাৎ আমি পিঠে টান লাগার ভান করে মাটিতে লুটিয়ে পড়ি। আমাকে ঐ ভাবে পড়ে যেতে দেখে আমাকে তার দুহাতে জড়িয়ে কোলে তুলে নিয়ে বেডরুমের দিকে নিয়ে যেতে থাকে। অনেকদিন পর শরীরে পুরুষের হাতের স্পর্শ পেয়ে আমার কাম দেবী জেগে ওঠে।
বিছানায় শুইয়ে দিয়ে আমার পিঠের ব্যাথা লাঘব করার জন্য হাত বোলাতে থাকে।
আমি তাকে বলি আরও একটু জোরে টিপে টিপে মাসাজ করে দিতে।
ও বলল – দিদিমণি আপনার জামার জন্য অসুবিধা হচ্ছে, একটু ওপরে তুলে দিতে পারি?

জীবনের সবচেয়ে টাইট চোদাচুদির Bangla choti golpo

আমি মাথা নারিয়ে তাকে সম্মতি জানালাম।
জামাটা গুটিয়ে ব্রায়ের কাছে তুলে দিল। শক্ত পোক্ত হাতের মাসাজ খেতে বেস ভাল লাগছিল। আস্তে আস্তে আমার শরীর ছেড়ে দিতে লাগল। টিপতে টিপতে হাতটা ব্রায়ের কাছে চলে যাচ্ছে আস্তে আস্তে।
কিছু না বলে আমার পাছার উপর বসে আমার পিঠে মাসাজ করতে লাগল। পাছার উপর পুরুষের চাপে আমার গুদে জল এসে গেল।
মাসাজ করতে করতে বলল – দিদিমণি আমার গায়ের চামড়াটা কি নরম আর মসৃণ। জানেন দিদিমণি ছোটবেলায় যখন আমার এ রকম ব্যাথা হত আমার মা তখন ব্যাথার জায়গায় চুমু খেত আর সত্যি সত্যি আমার ব্যাথা চলে যেত। আমি কি আমার মায়ের মতন আপনার ব্যাথার জায়গায় সেই রকম করতে পারি?

আমি জানতাম ধীরে ধীরে গাড়ি এবার এগবে। আমি বললাম ঠিক আছে ব্যাথা যদি তাতে যায় তাহলে তাই করুক।
বলতে না বলতেই আমার পিঠখানা চাটতে চাটতে চুমুতে ভরিয়ে দিল।আমার সাড়া পিঠ তার মুখের লালায় লতপত করছে। আর সেই লালাগুলো আমার শিরদাঁড়া বেয়ে আমার পাছার খাঁজ বেয়ে পোঁদের ফুটো পার করে আমার গুদে এসে পড়ল। গুদে তার লালার পরশে আমার শরীর কেঁপে উঠল। সে এক অদ্ভুত অনুভুতি।

১৫ মিনিট ধরে চাটাচাটি আর চুমাচুমির পর আমার ভারী ভারী পাছা দুটো নিয়ে শুরু হল তার খেলা। পাছা দুটো টেঁপা টিপি করে পাছায় থাপ্পর মারতে থাকল।
আমি কপট রাগ দেখাতে সে আমার কাছে ক্ষমা চাইল।
তার করুণ মুখ দেখে আমি বলে ফেললাম যে ভয় নেই আমার ভাল লাগে এই সময় কেও এসব করলে।
ওর সাহস আরও বেড়ে গেল আর ও খিস্তি মেরে কথা বলা শুরু করল – মাগীর কি সুন্দর পাছা, পাক্কা খাঙ্কি মাগী তুমি দিদিমণি। তোমার মত মাগী না চুদলে জীবনটায় বৃথা।”
আমি তাকে আমার নাম ধরে ডাকার অধিকার দিলাম।

এখন দারওয়ান আমার মাই টিপতে টিপতে একটা হাত আমার ব্রায়ের ভেতর ঢুকিয়ে দিয়েছে। সে এখন আমার মাইয়ের বোঁটা টিপছে। আমি বুঝতে পারছি দারওয়ান টপের জন্য ভাল করে কাজ করতে পারছে না।
তার পর টপটা এক টানে ছিঁড়ে আমার টপটা খুলে দিয়ে বলছে “মাগী তোকে খুব আরাম দেব আজ চুদে” আমি কিছু বললাম না। আমি তার সাহসে খুবই অবাক হচ্ছি এবং আনন্দও পাচ্ছি। দারওয়ান এখন আমার টপটা ও লেগিন্সটা সম্পূর্ণ খুলে নিয়েছে এবং আমার প্যান্টিটা টেনে ছিঁড়ে ফেলল। একটা আঙ্গুল আমার গুদে ঢুকিয়ে দিয়ে উংলি করতে লাগল।

আমার হাতটা আপনা থেকেই দারওয়ানের বাড়ার উপর চলে গেল। আহ এটা কত বড় আমার মনে হচ্ছে এটা আট ইঞ্চির কম হবে না। আমার স্বামীর বাড়াটা পাঁচ ইঞ্চির মত হবে। আমি বললাম ” এটা অনেক বড়” । দারওয়ান বলল ” এটা একমাত্র তোমার জন্য ডালিং”।
আমি তার জামা প্যান্ট খুলে দিলাম , আহ দারওয়ান নিচে কিছু পড়ে নাই। আমি তার বাড়াটাকে রাগাতে চেষ্টা করছি, এটা বড় হচ্ছে। আমি এবার নিচে গিয়ে তার বাড়াটা আমার মুখে পুরে নিলাম, অনেক সময় নিয়ে দারওয়ানের বাড়াটা চুষতে থাকি। দারওয়ান একসময় আমার মুখ থেকে বাঁড়াটা বার করে মুখ থেকে এক দলা থুতু আমার হাঁ হয়ে থাকা মুখে ফেলল এবং আমি তা অনায়াসে গিলে নিলাম। আবার বাঁড়াটা মুখে ঢুকিয়ে মুখচোদা শুরু করল। অনেক সময় নিয়ে দারওয়ানকে ব্লোজব দিলাম। আমি আগে স্বামীকে ব্লোজব দিতাম আজ আমার স্বামীর স্থানে দারওয়ানকে দিলাম।

দারওয়ান বলছে ” ওঃ .. আহ দারুন লাগছে মাগী তোর মুখ চুদতে, পাক্কা রেন্দি মাগী আহ আহ আ….. চালিয়ে যাও” এমন ভাবে আট দশ মিনিট পড়ে দারওয়ান আমার মুখে বীর্যপাত করল আমি সব কিছু খেয়ে নিলাম তার পর দারওয়ান আমার গুদে মুখ দিল। আমি যেহেতু আগে থেকেই তেঁতে ছিলাম তাই দারওয়ানের বেশি সময় লাগল না আমার জল খসাতে। আমার মধুর জল সব দারওয়ান খেয়ে নিল।

দারওয়ানের বাড়াটা আবার দাঁড়িয়ে গেছে এবং সে আমার গুদে তার বাড়াটা ঢুকাতে চাইছে কিন্তু ঢুকাতে সমস্যা হচ্ছে। হুম… আমার স্বামীর সাথে দীর্যদিন যাবত যৌন সম্পর্ক না থাকায় আমার গুদের ফুটোটা চুপসে গেছে তাই বাঁড়াটা ঢোকাতে অসুবিধা হচ্ছে। দারওয়ান তাই গায়ের জোরে একটু একটু করে গুদের ভেতরে ঢোকাতে থাকে আর আমি যন্ত্রনায় চিৎকার করতে থাকি। আমি বলতে থাকি “ মাদার চোদ এটা এত বড় নয়, তুমি কি আমাকে মেরে ফেলবি, দয়া করে বন্ধ কর” । আমার ধারনা আমার মুখে এসব কথা শুনে সে কিছুটা আশ্চার্য হলো সে তার বাড়াটা বেড় করে নিল এবং ঠিক একই সময় আরো জোড়ে ধাক্কা দিয়ে গুদে ঢুকিয়ে দিল আমি এবারও ব্যথায় চিৎকার করে উঠলাম।

এক সময় দারওয়ান তার মুখটি আমার ঠোটে রাখল, আমরা চুমু খেতে থাকি। খুব কষ্টকর কিন্তু একই সাথে আমি কষ্টের মধ্যেও আনন্দ পাচ্ছি। এখন দারওয়ান তার বাড়া সম্পূর্ন গুদে ঢুকিয়ে দিয়েছে। ধীরে ধীরে ঠাপ দিচ্ছে। আমি আনন্দে সিৎকার করছি” আহ আহ আহ …… .আ আ আ ……….. আ আ ওহ ……….” দারওয়ান আমার প্রতি কোন দয়া না দেখিয়েই চুদতে থাকে। এভাবে আধা ঘন্টা চোদার পর আমি গুদের জল ছেড়ে দিই এবং দারওয়ানও একটু পরেই বীর্যপাত করে। দারওয়ান বলে” মাগী তোর গুদটা খুব টাইট, এটা আমার জীবনের সবচেয়ে টাইট চোদাচুদি”। আমি একটা হাসি দিয়ে বলি ” আমার স্বামী অনেক দিন এটা ব্যবহার করে না, তাই টাইট থাকার জন্য আমার স্বামিকে ধন্যবাদ দিতে পার”। দারওয়ান আমার গুদের ঠোটে চুমু দিত দিতে বলতে থাকে “ ঠিক বলেছিস মাগী, এরজন্য তোর স্বামিকে ধন্যবাদ”।

আমি দারওয়ানের সাথে স্নান করতে গেলাম এবং আমি দারওয়ানের সামনে সম্পূর্ন নেংটা হয়ে আছি কিন্তু এতে আমার কোন লজ্জা লাগছে না। আমি কোন দিন চিন্তাও করতে পারি নাই যে আমাদের এমন একটি দিন আসবে।
যেহেতু আমার স্বামী দিনের বেশির ভাগ সময় বাইরেই থাকে তাই ভাবছি এখন থেকে আমার স্বামীর অনুপস্থিতিতে আমাদের দারওয়ানকেই বিছানায় নেব। তার পরের দিনও আবার তাকে ডেকে পাঠালাম।

আসার পড়ে আমার কাছে ক্ষমা চাইতে লাগল আগের দিনের তার উগ্র ব্যবহারের জন্য। আমি তাকে বললাম যে আমার ভাল লেগেছে তার উগ্র ব্যবহার কারন সেক্সের সময় একটু উগ্রতা গরম মশলার মত কাজ করে, সেক্সের স্বাদটা বাড়িয়ে দেই।
সেদিন কিছু না করেই তাকে বিদায় জানালাম.

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বাবার মতই চোদনবাজ – ২

Bhai boner chodachudir Bangla choti golpo 2nd part

কিছুক্ষণ জড়াজড়ি করে থাকার শ্যামলী বলে, উফ, কী সুখ দিলিরে।শ্যামল বলে, ‘তোকে চুদে আমিও আরাম পেয়েছি। ইচ্ছে করছে সারা রাত তোর এই টাইট গুদে বাড়াটা ভারে রাখি’। শ্যামলী বলে, ‘আমারও তা-ই ইচ্ছে করছে। এই দাদা, আবার কর, ভীষণ ইচ্ছে করছে’। শ্যামল বলে ঠিক আছে, এবার তাহলে অন্য আসনে তোকে চুদবো।

কুকুরচোদা চুদবো এবার তোকে। তুই চার হাত পায়ে ভর দিয়ে উপর হয়ে থাক, আমি পেছন থেকে তোকে চুদবো’। দাদার কথা মত পায়ে ভর দিয়ে উপুড় হয়ে পাছাটা উচু করে তুলে বলল, ‘নে ঢোকা’।
শ্যামল পাছার কাছে দাড়িয়েঁ বাড়াটা গুদের মুখে সেট করে ঠেলা দিলে পুরো বাড়াটা পক পক করে গুদে ঢুকে গেল। তারপর দু বগলে নীচ দিয়ে দু’হাত দিয়ে দুধ দুটো ধরে শুরু করল ঠাপের পর ঠাপ।শ্যালের প্রতিটা ঠাপে শ্যামলীর শরীর কেঁপে কেঁপে উঠতে থাকে।

‘আঃ আঃ দাদা, দে দে, পুরো বাড়াটা ঠেলে দিয়ে দিয়ে চোদ। উঃ আঃ আঃ কী সুখ দিচ্ছিস রে। মার, আরো জোরে জোরে মার’বরে শ্যামলী চিৎকার করতে থাকে। যুবতী বোনকে চুদতে চুদতে শ্যামল বোনের জাং দুটো দু’হাতে ধরে বাড়া গুদে ঠেসে ধরে গরম বীর্য ঢেলে দেয়।

তারপর দু’জনে একসাথে উলঙ্গ হয়েই বাথরুমে ঢোকে। এক অপরের গুদ বাড়া ধুইয়ে গায়ে সাবান ঘষে স্নান করায়।
শ্যামলী দাদার দিকে তাকিয়ে বলে, এই দাদা, তোর বউ একন কোন পোশাকটা পরবে বল?
শ্যামল এক হাতে বোনের কোমর জড়িয়ে দুধের উপর হাত রেখে বলল, ‘বাড়িতে তুই আর আমি ছাড়া যখন কেউ নেই, তখন পোশাক পরে আর কী করবি? আবার তো খুলতেই হবে।’বলে বোনের দুধ টিপতে টিপতে ঘরে গেল। শ্যামলী দাদাকে খেতে দিয়ে নিজেও খেল। খাবার পর শ্যামল আবার এক হাতে বোনের কোমর জড়িয়ে ধরে দুধ টিপতে টিপতে ঘরে নিয়ে যেতে বলে, ‘শ্যামলী, তোর দুধ দুটো এত সুন্দর যে টিপেও মন ভরছে না’। শ্যামলী দাদার হাত দুধের উপর চেপে ধরে বলে, বেশ তো যত খুশি টেপ না, আমি তো দিয়েই রেখেছি। এই দাদা, আমার কি কেবল মাই দুটোই সুন্দর, আর গুদটা?’শ্যামল বলে, ‘তোর গুদের তুলনা নেই। এমন উত্তাল টাইট গুদ যে সারাক্ষন বাড়া ঢুকিয়ে রাখতে মন চায়’। শ্যামলী গাল ফুলিয়ে কপট রাগতস্বরে বলল,‘মিথ্যা বলিস না দাদা। তা-ই যদি হবে, তবে এতক্ষণ আমার গুদ খালি থাকত না। আমাকে তোর বাড়ায় গেঁথেই ঘরে নিয়ে যেতিস।’শ্যামল হেসে বলে ওঠে, ‘ও এই কথা, ঠিক আছে তবে,’এই বলে শ্যামল একটা চেয়ারে বসে বোনকে কাছে টেনে বাড়াটা গুদের মুখে সেট  করে কোলে বসিয়ে নিতে বাড়াটা চড়চড় করে গুদে ঢুকে গেল। তারপর দুধদুটো টিপতে টিপতে এক এক করে চুষতে লাগলে।

ভাই বোনের ফুলসজ্জার Bangla choti golpo

অকেনক্ষণ ধরে দুধদুটো টিপে লাল করে দেয় শ্যামল। গুদ ভর্তি বাড়া নিয়ে মাই টেপা ও চোষাতে শ্যামলী চোদন খাওয়ার জন্য ছটপট করতে থাকে। গুদ থেকে কামরস বেরিয়ে শ্যমলের বিচি, বাল সব মেখে যেথে থাকে।
এক সপ্তাহ পর ওদের মা ফিরে এল। এই ক’দিন শ্যামল বোন শ্যামলীর সাথে দিন-রাত মনের আনন্দে চুদাচুদি করে কাটাল। তারপরেও প্রতিরাতে শ্যামল শ্যামলীর ঘরে গিয়ে যুবতী বোনকে উলঙ্গ করে মাই, গুদ টিপে ও চুষে বোন কে চুদতে থাকে।

এই ভাবে কয়েক মাস কেটে যাওয়ার পর একদিন মেয়েকে বমি করতে দেখে মা বলেন,‘চিন্তার কোন কারণ নেই, এই সময়ে ওরকম হবেই।’ মা মেয়ের মাথায় হাত বুলিয়ে ওকে আশ্বস্ত করে বলেন, ‘শ্যমল যে রোজ রাতে তোর গুদ মারে তা আমি জানিরে। শ্যামল তোকে চুদে পোয়াতি করেছে,তু্ই মা হবি এতে লজ্জার কি আছে? আমি আজই তোদের দুই ভাই-বোনের বিয়ের ব্যবস্থা করছি। একদিন না একদিন তো কারো না কারো বাড়ায় তোকে গাঁথতেই হবে।

সেখানেই তোর দাদা নিজই যখন তোকে বাঁড়ায় গেঁথে নিয়েছে তখন আর বলার কী আছে? আর তাছাড়া এই যেন আমাদের বংশের নিয়ম।’
শ্যামল ও শ্যামলী দু’জনেই একসাথে বলে ওঠে, ‘সেটা কী রকম?’ ওদের মা বলল, ‘তোরা যাকে বাবা বলে জানিস, সে আসলে তোদের মামা মানে আমার দাদা। ছোট্ট বেলা থেকেই আমি দাদা একই ঘরে একই বিছানায় ঘুমোতাম। দাদা আমার থেকে তিন বছরের বড় ছিল আমরা ধীরে ধীরে বড় হতে থাকলাম। চোদ্দ বছর বয়সেই আমার শরীরে যৌবন্ উপচে পড়ে। বেশ বড় বড় টুসটুসে আমর মত দুটো মাই, বেশ চাওড়া পাছা, দেখে মনে হবে পূর্ণ যুবতী। গুদের চারপাশে অল্প অল্প বাল গজাতে শুরু করেছে। সেই সময় দাদা আঠেরো বছরের যুবক।  বেশ শক্ত সামর্থ চেহারা।

‘এক দিন রাতে আমি আর দাদা ঘুমিয়ে আছি। শরীরের উপর চাপ অনুভব করলে আমার ঘুম ভেঙ্গে গেল। ঘরের জিরো পাওয়ারের আবছা আলোয় লক্ষ করলাম, আমার সারা শরীরের একটুকরাও কাপড় নেই। আমার কচি নরম স্তন দুটো দাদা দু’হাত দিয়ে সমানে টিপছে। কখনো স্তনের বোঁটা মুখে নিয়ে চুষছে।আমার ভীষণ সুখ হচ্ছিল।আমি দাদাকে কোন রকম বাধা না দিয়ে চুপ করে চোখ বুজে পড়ে থাকলাম। মুহূর্তে টের পেলাম, একটা মোটা শক্ত মত কি যেন আমার গুদটা ফালা ফালা করে ফেঁড়ে গুদে ঢুকছে। উঃ কী ব্যাথা! ককিয়েঁ উঠৈ বললাম,‘উরি উরি উঃ, এই দাদা ওটা কি ঢোকাচ্ছিস? ব্যথ্যা লাগছে ছাড়, বের করে নে’।

‘দাদা বলল, ‘প্রথম ঢুকছে তো, তাই একটু ব্যাথা লাগবে পরে দেখবি কত সুখ, তখন আর ছাড়তে চাইবি না, বলে দাদা জোরে একটা ঠাপ দিয়ে ও পুরো বাড়াটা আমার গুদে ঢুকিয়ে দিল। দাদার বিশাল বড় মোটা লম্বা বাড়াটা আমার গুদে ঢুকে একেবারে টাইট হয়ে এটেঁ বসল। তারপর দাদা যখন আমাকে চুদতে আরম্ভ করল, তখন আমি সুখে দাদাকে জড়িয়ে ধরলাম।

দাদা আমাকে দুদে ঘন গরম বীর্যে আমার গুদ ভরে দিয়ে জিজ্ঞেস করল, ‘কিরে সোনা, কেমন লাগল?’ আমি দাদাকে জড়িয়ে ধরে বললাম, খু-উ-ব সখ পেলাম রে। এখন থেকে রোজ রাতে করবি বল?সেই শুরু। রোজ রাতে দাদা আর আমি চোদাচুদি করতে লাগলাম। সুযোগ পেলে দিনের বেলাতেও করত। ছয় মাসের মধ্যে দাদা আমার স্তনদুটো আম থেকে তাল বানিয়ে দিল। আর আমাকে চুদে পোয়াতি করল। লোক নিন্দার ভয়ে দাদা আমাকে বিয়ে করে এখনে চলে আসে। তার কয়েক মাস পরই শ্যামল হলো। তার তিন বছর পর হলি তুই। আর এখন শ্যামল আমার তোকে পোয়াতি করেছে। যা, তোরা দুজনে স্নান করে আয়। সন্ধে হয়ে এল। আমি তোদরে বিয়ের আয়োজন করি।’

শ্যামলী বলে, জানো মা, দাদার বাড়াটা যেমন মোটা তমনি বড়। যখন আমার গুদে ঢোকায় তখন মনে হয় যেন গুদে বাঁশ ঢুকাচ্ছে। গুদে বাঁড়াটা টাইট হয়ে এটেঁ গুদ একে বারে ভরে যায়’ মা বলে, ছেলে কার দেখতে হবে তো! ও ওর বাবার মতই চোদনবাজ হয়েছে। যা এবার স্নান করে আয়।’শ্যামল ও শ্যামলী দুই ভাই-বোন একসঙ্গে উলঙ্গ হয়ে স্নান করে উলঙ্গ হয়েই মায়ের সামনে এসে দাঁড়ালো মা সোমা ঘরের ঠাকুরের সামনে দুজনেকে মালা বদল করিয়ে শ্যামলের বাড়ায় সিঁদুর মাখিয়ে দিলে শ্যমল প্রথমে বোন শ্যামলীর কপালে আর সিথিঁতে সিঁদুর মাখানো বাড়া তিনটে ফোঁটা দিয়ে দুজনে মাকে প্রণাম করল।

মা সোমা নুতন বর-বধূকে আশীবার্দ করে বললেন, যা, এবার তোদের ঘরে যা’। শ্যামল তার নতুন বউ অর্থ্যৎ বোন শ্যামলীর এক হাতে কোমর এক হাতে জড়িয়ে অন্য হাতে দুধ টিপতে টিপতে ঘরে দিয়ে দেখে, তাদের ফুলশয্যার জন্য মা তাদের বিছানা ফুল দিয়ে সুন্দর করে সাজিয়ে রেখেছে। শ্যামল আর দেরি না করে ফুল দিয়ে সাজানো বিছানায় যুবতী বোনকে ফেলে সিঁদুর মাখানো বাড়া এক ঠাপে শ্যামলীর গুদে ভরে দিয়ে বোনকে চুদতে লাগল.

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বাবার মতই চোদনবাজ – ১

Bhai boner chodachudir Bangla choti golpo 1st part

শ্যামলী একটা আম হাতে নিয়ে দাদা শ্যামলের কাছে গিয়ে জিজ্ঞেস করল ‘এই দাদা, আম খাবি?’ শ্যামল মাথা নিচু করে কি লিখছিল। তেমনি মাথা নিচু করেই জবাব দিল, না।’
শ্যামলী বলল – দেখ না, বেশ বড় টুসটুসে আম শ্যামল এবার মুখ তুলে বোনের দিকে তাকিয়ে বলল, দেখেছি তবে একটা খাব না। যদি তিনটেই খেতে দিস, খেতে পারি।’
শ্যামলী বলল, ‘বারে, আমি তো এই একটা আম নিয়ে এলাম। তোকে তিনটে দেব কী করে?’

শ্যামল বোনের বুকের দিকে তাকিয়ে ইঙ্গিত করে বলল, ‘আমি জানি তোর কাছে আরো দুটো আম আছে এখন তুই যদি দিতে না চাস তো দিবি না।’
দাদার ইঙ্গিত বুঝতে পেরে শ্যামলী লজ্জা মাখা মুখে বলল, ‘দাদা, তুই কিন্তু দিন দিন ভারি শয়তান হচ্ছিস।’

শ্যামল বলল ‘বারে, আমি আবার কী শয়তানি করলাম? আমি তো তোর কাছ থেকে জোর করে কেড়ে নিচ্ছি, তা তো নয়। তুই নিজেই আমাকে একটা আম খেতে বললি, আর আমি বললাম, যদি তিনটে দিস তো খাব।’
শ্যামলী বলে, ‘কিন্তু দাদা, তুই যে দুটো আমের কথা বলছিস, ও দুটোতো কামড়ে খাওয়া যাবে না, চুষে চুষে খেতে হবে। আর তাছাড়া ও দুটো তোকে খেতে দিতে হলে তো আমাকে আবার জামা খুলতে হবে।’ শ্যামল বলে, আমি কামড়ে খাব না চুষে খাব সেটা আমার ব্যপার, আর তুই জামা খুলে দেনা কিভাবে দিবি সেটা তুই বুঝবি।’
শ্যামলী বলে, ‘জামা না খুললে তুই খাবি কী করে? কিন্তু জামা খুলতে লজ্জ্বা করছে, যদি কেউ এসে পড়ে?’

সদর দরজা তো বন্ধ, কে আসবে? তাছাড়া বাড়িতে মাও নাই, জেঠুর বাড়ি গেছে, এক সপ্তাহ পরে আসবে। বাড়িতে তো আমি আর তুই ছাড়া আর কেউ নেই। তবে তুই যদি তোর কোন লাভারকে আসতে বলিস তো সে কথা আলাদা।
শ্যামলী বলে, বাজে বকিস না দাদা। তুই ভাল করেই জানিস যে আমার কোন লাভার নেই।

পাড়ার কিছু ছেলে যে আমার পেছনে ঘোরে না তা তো নয়। আমি তাদের পরিষ্কার বলে দিয়েছি আমি এনগেজ্ড্। না হলে ওরা কবেই আমাকে পোয়াতি করে দিত। যাক ওসব কথা, তুই ঘরের দড়জাটা বন্ধ কর, আমি ততক্ষণে জামা খুলছি।’ এই বলে শ্যামলী জামা খুললে ওর ধবধবে সাদা খাড়া খাড়া মাই দুটো লাফিয়ে বেড়িয়ে পড়ল।
শ্যামল তার অষ্টাদশী যুবতী বোনের নিটোল মাই দুটো দ’হাতে ধরে টিপে বলল, মিথ্যুক। এত সুন্দর টুসটুসে আম দুটো লুকিয়ে রেখে কিনা বলছিস নেই’।

শ্যামলী বলে, আমি এসব তো তোর জন্যই যত্ন করে রেখেছি। আমি অনেকদিন থেকেই মনে মনে তোকে আমার স্বামী বলে মেনে নিয়েছি। ঠিক করেছি বিয়ে যদি করতেই হয় তো তোকেই করবো। আমার রুপ যৌবন সব তোর হাতে সপেঁ দেব।কিন্তু লজ্জ্বায় তোকে বলতে পারিনি। আমি তো মেয়ে, কাজেই এইটুকু তো ভাবতে দিবি যে, আমি নিজে থেকে সবকিছু তোকে খুলে
দেয়নি। তুই চেয়েছিস, তাই দিয়েছি। আজ তুই আমাকে নিয়ে যা খুশি তা-ই করতে পারিস,মানা করব না। আজ আমার জীবনের সব থেকে খুশির দিন।’

শ্যামল বোনের টুসটুসে আমর মত দুধ দুটো টিপতে টিপতে বলল, ‘শ্যামলী, তোর মাই দুটো কিন্তু দারুণ হয়েছে বেশ টাইট মাই টেপাতে তোর ভালো লাগছে তো?
শ্যামলী বলল, মাই টেপাতে কোন মেয়ের ভাল লাগে না বল? তাই আরো জোরে জোরে টেপ, তাহলে আরো ভাল লাগবে’।

শ্যামল বোনের মাইদুটো টিপতে টিপতে বোনে মুখে, ঘাড়ে, গালায় মুখ ঘষে আদরে আদরে ভরিয়ে দেয়। শ্যামল যুবতী বোনের বগলের চুলে মুখ ঘষে বলে, তোর বগলে তো বেশ চুল হয়েছে। তোর ওখানেও মানে গুদেও এরকম চুল পাব তো? শ্যামলী হেসে বলে, ‘দাদা, আমি কিন্তু আর সেই ছোট্ট শ্যামলী নেই। আমি এখন যবতী, কাজেই আমার বগলে যেমন চুল দেখছিস, আমার ওখানেও এমনই ঘন কালো কুচকুচে বাল পাবি। বিশ্বাস না হয় খুলেই দেখ না’। এই বলে শ্যামলী দাদার জন্য অপেক্ষা না করেই নিজেই প্যান্টি খুলে যুবক দাদার সামনে উলঙ্গ হয়ে গেল।

যুবতী বোনের রসাল গুদে বাঁড়া ঢোকানোর Bangla choti golpo

শ্যামল কিছুক্ষণ বোনের গুদের দিতে তাকিয়ে অবাক হয়ে দেখে। শ্যামলী মিথ্যা বলেনি। গুদে এত ঘন বাল যে গুদ দেখাই যায় না। আর গুদের কামরসে মেখে গিয়ে চিকচিক করছে।
শ্যামল একটা দুধ মুখে নিয়ে চুষতে চুষতে অন্য মাইটা এক হাতে টিপতে লাগলে আর এক হাত নিয়ে গুদের বালে আঙ্গুল বোলাতে শ্যামলী কামে অস্থির হয়ে বলে, ‘আঃ দাদারে, আর থাকতে পারছি না। এবার তোর ওটা আমার ওখানে ঢোকা।’ বোনের মুখ থেকে শ্যামল গুদ, বাড়া শব্গুলো শোনার জন্য বলে, ‘আমার কোন জিনিসটা তোর কোন জায়গায় ঢোকাবো একটু খুলে বল। কি যে বলছিস তুই আমি বুঝতে ঠিক পারছি না’।

শ্যামলী দাদার বাড়া গুদে নিয়ে চোদন খাওয়ার জন্য ছটপট করতে করতে সব লজ্জ্জা ভুলে বলে ‘আহা ন্যাকা, কিছুই জানে না যেন। আর সহ্য করতে পারছি নারে। তোর বাড়াটা আমার গুদে ঢুকিয়ে দে’। শ্যমল বলে, কেন, আবার বাঁড়া গুদে ঢুকিয়ে দেব কেন, বলবি তো?’ শ্যামলী বলে, ‘কি আবার করবি, আমাকে চুদবি। নে, তাড়াতাড়ি ঢোকা’। এই বলে শ্যামলী নিজেই বিছানায় ঠ্যাং দুটো ফাঁক করে চিৎ করে হয়ে শুয়ে পড়ল। শ্যামলও উলঙ্গ হয়ে শ্যামলীর ঠ্যাং দুটোর মাঝে হাঁটু গেড়ে বসে যুবতী বোনের রসাল গুদের মুখে বাঁড়াটা চেপে ধরল এক অজানা সুখে শ্যামলীর শরীর কেঁপে উঠল। শ্যামলী তার বহু আকাঙ্খিত দাদার বাঁড়া গুদে নেওয়ার জন্য চোখ বুজে দাতেঁ ঠোঁট কামড়ে চরম মুহূর্তের জন্য অপেক্ষা করতে লাগল এবং অল্প সময়েই বুঝতে পারল, একটা গরম ও শক্ত ডান্ডা তার গুদটাকে ফালা ফালা করে ফেঁড়ে ভেতরে ঢুকছে।

শ্যামল বোন যাতে ব্যাথা না পায়, সেভাবে আস্তে আস্তে চাপ দিয়ে পুরো বাঁড়াটা গুদে ঢুকিয়ে দিলে শ্যামলী দু-হাতে দাদাকে জাড়িয়ে ধরে বলল, ‘বাবঃ কী মোটা আর বড়! গুদ আমার ভরে গেছে। হ্যারেঁ দাদা, সবটাই ঢুকেছে নাকি আরো বাকি আছে? যুবতী বোনের গুদে বাঁড়া গেঁথে দু’হাতে দুধ দুটো টিপতে টিপতে শ্যামল বলে, ‘নারে , তোর গুদ আমার সম্পূর্ণ বাঁড়াটাকে গিলে ফেলেছে। এবার তোকে চুদি কি বলিস?’শ্যামলী বরে, আজ তুই আমার গুদের ফিতে কাটলি। মনে হচ্ছে তোর বাঁড়াটা আমার গুদের মাপেই ভগবান তৈরি করেছেন।

একেবারে গুদের খাপে খাপে বাঁড়াটা এঁটে আছে। এবার শুরু কর। আজ থেকে তুই আমার ভাতার, আমি তোর মাগ। তুই এবার চুদে চুদে তোর মাগের গুদ ফটিয়ে দে’শ্যামল তার যুবতী বোনকে চুদতে চুদতে বলল, যা একটা গুদ বানিয়েছিস, ফাটাতে না পারলেও এটুকু বলতে পারি যে তোকে পোয়াতি অবশ্যই করতে পারবো’।

শ্যামল বোন শ্যামলীর দুধদুটো টিপছে আর সমান তালে চুদছে। যুবতী শ্যামলীর উত্তাল আচোদা টাইট গুদে শ্যামলের বাঁড়া পচাৎ পচাৎ পচ শব্দ করে সমানে ঢুকছে, বেরুচ্ছে, আবার ঢুকছে। ঠাপের তালে তালে শ্যামলীর শরীর কেঁপে কেঁপে উঠতে থাকে। শ্যামলী চিৎকার দিয়ে বলে, আঃ আঃ আঃ দাদারে, তাই তা-ই কর। চুদে আমাকে পোয়াতি করে তোর বাচ্চার মা কর। উঃ উঃ মাগো, দাদা, কী সুখ দিচ্ছিস রে! চোদাতে এত সুখ আগে জানলে আমি আরো আগে তোর সামনে সব খুলে আমার গুদ মেলে ধরতাম। এখন থেকে তুই যখনই বলবি আমার প্যান্টি খুলে দেব’। শ্যামলী চোদন সুখে দাদার গলা জাড়িয়ে ধরে চিৎকার দিতে দিতে গুদের কামরস খসিয়ে নিস্তেজ হয়ে পড়ে। শ্যামলও বোনকে জড়িয়ে ধরে বাড়াটা গুদে ঠেসে ধরে এতদিনের সঞ্চিত বীর্য গুদে ঢেলে দিল। গরম বীর্য গুতে পড়তে শ্যামলী চরম সুখে চার হাত পা দিয়ে দাদাকে জড়িয়ে ধরে।

কুকুরচোদা চোদার গল্পটা Bangla choti গল্পের পরের পর্বে বলব …..

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আয়েশ করে ওকে চুদলাম তিন বার

আমি কলেজে এইচ এস সি পড়ার সময় এই ঘটনাটা ঘটেছিল। আমি কলেজ হোস্টেলে থাকতাম। হোস্টেলটা ছিল একতলা বিল্ডিং। আমি সেকেন্ড ইয়ারে উঠার পর হঠাৎ করেই কলেজ কর্তৃপক্ষ ঘোষণা দিল যে, হোস্টেল ভেঙে বহুতল করা হবে। আমাদেরকে ২ মাসের সময় দেওয়া হলো, এর মধ্যেই যে যার মতো থাকার জায়গা ঠিক করে নেবে। আশেপাশে আমার কোন আত্মীয় স্বজন ছিল না। মেসের জন্য কয়েকদিন ঘুড়লাম কিন্তু পছন্দ মতো পেলাম না। আমার তো ভয় হলো যে, শেষ পর্যন্ত হয়তো আমি থাকার জায়গা খুঁজে পাবো না, সেক্ষেত্রে আমার পড়াশুনার কি হবে সেটা ভেবেই অস্থির হয়ে পড়লাম। চেষ্টা করে করে যখন হতাশ তখনই আমার এক বন্ধু খবর দিল যে এক ভদ্রলোক পেয়িং গেস্ট রাখবে।

আমি কাল বিলম্ব না করে সেখানে ছুটলাম। কলেজ থেকে মাইলখানেক দুরে গ্রাম্য পরিবেশে পাকা বাড়ি।

বাড়িওয়ালা ভদ্রলোক খুবই অমায়িক, উনি একজন অবসরপ্রাপ্ত সহকারী জজ। বুড়ো বুড়ি ছাড়া বাড়িতে আর কেউ থাকে না। ভদ্রলোকের বয়স হয়ে গেছে বলে বাসায় একজন লোক দরকার যে বিপদে সাহায্য করতে পারবে, টুকটাক বাজার করতে পারবে আর বুড়োকে একটু সঙ্গ দিতে পারবে। আমি শুনেছিলাম পেয়িং গেস্ট রাখবে কিন্তু আমার ভাগ্য আরো ভালো, উনি আমার থাকা-খাওয়ার জন্য কোন টাকা-পয়সা নেবেন না বলে জানালেন। ভদ্রলোকও আমাকে পছন্দ করলেন। আমি আর দেরি না করে পরদিনই ব্যাগপত্র নিয়ে হাজির হলাম।

বাড়ির কাছেই একটা বিশাল খেলার মাঠ ছিল। বিকেলবেলা এলাকার প্রচুর ছেলেমেয়ে সেই মাঠে খেলাধুলা করতো। আর সকালবেলা যুবক থেকে বুড়োরা আসতো জগিং বা ব্যায়াম করতে। আমার অভ্যাস ছিল প্রতিদিন ভোরে উঠে দৌড়ানো। যারা আসতো প্রায় সবাই সবাইর পরিচিত হয়ে উঠেছিলাম। হঠাৎ একদিন একজন নতুন অতিথিকে দৌড়াতে দেখলাম। ভদ্রলোক সহজেই আমার দৃষ্টি আকর্ষন করলো। কারন উনি দারুন হ্যান্ডসাম, পেটানো শরীর, বেশ লম্বা আর দেখেই বোঝা যায় শরীরে তাকদ আছে।

আমি একবার উনাকে ক্রস করার সময় হাত তুলে সালাম দিলাম, উনিও জবাব দিলেন এবং হাসলেন। সবচেয়ে উল্লেখযোগ্য হলো, উনি বারবার পিছন ফিরে আমাকে দেখছিলেন। ভদ্রলোক শ্যামলা, কালোই বলা চলে, গোঁফ আছে, তবে দেখেই বোঝা যায় লোকটা খুব মিশুক প্রকৃতির। সেদিনই বিকেলবেলা আমি মাঠের একপাশে বসে খেলা দেখছিলাম। এমন সময় সেই ভদ্রলোককে দেখলাম, তবে একা নয়, সাথে ৮/৯ বছরের একটা বাচ্চা মেয়ে বেলুন হাতে তার সাথে হাঁটছে। হঠাৎ করেই বাতাসে বেলুনটা ছুটে মাঠের মধ্যে উড়ে গেল।

আমি দৌড়ে গিয়ে বেলুনটা ধরে এনে মেয়েটার হাতে দিলাম। ভদ্রলোক খুব খুশি হয়ে বললেন, “থ্যাঙ্কস ব্রাদার, মেনি মেনি থ্যাঙ্কস, আমি আপনাকে সকালে মাঠে দেখেছি, রাইট?”

আমি মুখে জবাব না দিয়ে মাথা ঝাঁকালাম।

উনি হাত বাড়িয়ে দিয়ে হ্যান্ডসেক করে বললেন, “আমি মেজর সুবির, আর্মিতে আছি, আর এ আমার মেয়ে মল্লিকা। আসুন না আমার বাসায়, জমিয়ে আড্ডা দেয়া যাবে। বেশি দুরে নয়, এই তো কাছেই।”

আমি কথা দিলাম যে, অবশ্যই যাবো।

উনি বাসার লোকেশন বলে দিলেন, “এখান থেকে উত্তর দিকে ৭/৮ টা বাড়ি পরেই একটা মুদি দোকান আছে, রহমান স্টোর্স, সেটার পিছনেই, আমার নেমপ্লেট দেয়া আছে।”

আমি চিনলাম বাসাটা, একটা একতলা বাড়ি। যাবো ভেবেছিলাম, কিন্তু পরে ভুলে গেলাম।

২দিন পর ভোরে সুবির সাহেবের সাথে আবার দেখা, তখন আর উনি আমাকে ছাড়লেন না, একেবারে সাথে করে নিয়ে গেলেন। বাড়িটা উনার নয়, ওটা উনার শ্বশুরবাড়ি। উনার বৌয়ের সাথে পরিচয় করিয়ে দিলেন। আমি সুবির সাহেবের বৌকে দেখে খুব অবাক হলাম। উনার সাথে মানায় না, শুধু বয়সে নয় রূপেও রাত আর দিন পার্থক্য। উনার বয়স ৫০ এর কাছাকাছি কিন্তু উনার বৌয়ের বয়স ৩০ এর উপরে হবে না। মহিলার নাম রেনু, আমি তাকে রেনু আপা বলে ডাকতাম, কারণ ভাই-বোন সম্পর্কের মধ্যে কেউ খারাপ অনৈতিক কিছু খোঁজে না। রেনু আপার সুঠাম শরীর, মেদহীন তবে হৃষ্টপুষ্ট, যে কোন পুরুষের হার্টবিট বাড়িয়ে দেওয়ার মত যথেষ্ট উপাদান আছে সেখানে।

রেনু আপা বেশি লম্বা নয়, ৫ ফুট মত হবে। বুক ৩৪ হতে পারে, তবে খুবই খাড়া, পেটানো, দেখে মনেই হয় না এই মহিলার কোন বাচ্চা হয়েছে। কারণ বাচ্চা হলে মাইতে দুধ আসবেই আর মাই ঝুলবেই, যতই ব্রা পড়ে টানটান করে বাঁধুক না কেন আনকোড়া সেই সেপ (shape) আর আসে না। কিন্তু রেনু ভাবীর মাইগুলো টানটান, খাড়া। মালা ওদের একমাত্র মেয়ে, ক্লাস টু-তে পড়ছে। নাদুস নুদুস নরম তুলতুলে শরীর ওর তবে গায়ের রং ওর বাবার মতোই কালো আর উচ্চতায় মায়ের মতো খাটো। তবে ঝকঝকে সাদা দাঁতের হাসিটা দারুন, সেইসাথে ওর চেহারাটাও বেশ মিষ্টি। সুবির সাহেব এতোদিন মিশনে ছিলেন বলে রেনু আপা মালাকে নিয়ে বাপের বাড়িতেই আছেন।

ওদের আন্তরিকতা আমাকে মুগ্ধ করলো, একদিনের পরিচয়েই এই অনাত্মীয় শহরে মনে হলো এরা আমার কতকালের চেনা, আত্মীয়। আমি বেশ খানিকক্ষন গল্প করলাম, নাস্তা না করিয়ে ছাড়লো না। আমার ক্লাস ছিল জন্য তাড়াতাড়ি চলে আসতে হলো। তবে সুবির সাহেব আমাকে দিয়ে প্রতিজ্ঞা করিয়ে নিলেন যে সম্ভব হলে প্রতিদিন একবার যেন উনাদের সাথে দেখা করি। আমারও লোভ লেগে গেলো, বিশেষ করে নারীসঙ্গ আমার সবসময়ই ভাল লাগে। রেনু আপার মত সুন্দরী আর মিশুক হলে তো কথাই নেই। সেদিনের পর থেকে রেনু আপার বাসায় যাওয়া আমার প্রতিদিনের ডিউটি হয়ে গেল। বিশেষ করে টিভি সিরিয়াল দেখার জন্য। তাছাড়া ভিসিআর আছে, মাঝে মাঝে হিন্দি ছবিও দেখা হয়।

ছুটি শেষে সুবির সাহেব তার কর্মস্থলে ফিরে গেলেন। তবে আমার যাতায়াত বন্ধ হলো না। সাধারনত আমি রাত ৯টার দিকে যেতাম টিভিতে নাটক দেখার জন্য। মালা ইতিমধ্যেই আমার সাংঘাতিক ভক্ত হয়ে গেছে। আমি গেলে আমাকে ছেড়ে নড়তেই চায় না। আর সাংঘাতিক গা ঘেঁষা স্বভাব মেয়েটার। যতক্ষণ থাকবো আমার কোলে বসে থাকবে নাহলে পিঠে চাপবে। প্রতি রাতে আমাকে পাওয়ার জন্য সম্ভবত মেয়েটা উন্মুখ হয়ে থাকে। কারন, আমি বেল বাজাতেই ছুটে এসে মালাই দরজা খুলে দেয়। আমি ঘরে ঢুকে সোফায় বসার সাথে সাথে আমার কোলের মধ্যে বসে গলা জড়িয়ে ধরে। আমিও ওর নরম শরীর জড়িয়ে ধরে চাপ দিয়ে আদর করি, মালা শুধু খিলখিল করে হাসে। আমি ওকে চুমু দিয়ে আদর করি। বিনিময়ে মালাও আমার গলা জড়িয়ে ধরে আমাকে চুমু দেয়।

রেনু আপা মাঝে মাঝে আমাকে বিরক্ত না করার জন্য বকা দেয় কিন্তু আমি আপাকে ওকে বকতে মানা করি। এভাবেই আমাদের দিনগুলি কাটতে থাকে। আমি দিনে দিনে রেনু আপার পরিবারের একজন সদস্য হয়ে উঠি। মা-মেয়ে দুজনের সাথেই আমার ঘনিষ্ঠতা গাঢ় হয়ে ওঠে। তবে আমি একজন মেয়েমানুষখেকো হলেও মালার সাথে আমার সম্পর্ক ছিল একেবারেই নির্ভেজাল, স্বাভাবিক। আমার মনে ঐ বাচ্চা মেয়েটা সম্পর্কে কোন খারাপ উদ্দেশ্য ছিল না। এমনকি রেনু আপা একটা সেক্স বোম হলেও আমি তাকে খুবই সম্মানের চোখে দেখতাম। এক কথায় ঐ পরিবারের সাথে আমি একেবারেই সুস্থ-স্বাভাবিক একটা সম্পর্ক গড়ে তুলতে চেয়েছিলাম। কিন্তু আমার দূর্ভাগ্য আমাকে সেটা হতে দিল না। জানি না কেন, আমি যেখানেই যাই, সেখানেই কোন মেয়েমানুষের সাথেই আমার সম্পর্ক সঠিক পথে থাকে না। এখানেও থাকলো না।

৪/৫ মাস পরের কথা।
তখন শীতকাল এসে গেছে। আমি সচরাচর বাসায় লুঙ্গি পরি এবং রেনু আপার বাসায়ও লুঙ্গি পরেই যাই। শীতের জন্য কয়েকদিন হলো গায়ে একটা চাদর জড়াচ্ছি। মালা যথারিতি আমার কোলে বসে এবং আমার চাদরের ভিতরে ঢুকে পড়ে। মাঝে মধ্যে মালার নড়াচড়া এতোটাই অস্বাভাবিক হয়ে পড়ে যে ওর পাছার নিচে আমার ধোন গরম হয়ে ওঠে কিন্তু আমি এই পরিবারের সাথে সম্পর্কটা নষ্ট করতে চাই না বলে খুব সাবধান থাকি যাতে আমার দিক থেকে কোনরকম দূর্বলতা প্রকাশ হয়ে না পড়ে। কিন্তু সবসময় মনে হয় আমরা যা চাই বিধাতা তা চান না। প্রকৃতপক্ষে সবই তো তার দখলে।

একদিন আমি যথারিতি রেনু আপার বাসায় গিয়ে ড্রইংরুমে টিভি ছেড়ে বসলাম। আপা রান্নাঘরে ব্যস্ত ছিল বলে আমাকে বসতে বলে চলে গেল। মালা পড়াশুনা করছিল। আধ ঘন্টা পরে মালা পড়া শেষ করে ড্রইংরুমে এলো। আমাকে দেখেই ছুটে এসে আমার দুই পাশে পা দিয়ে কোলে বসে চাদর সরিয়ে নিজেকে আমার সাথে জড়িয়ে নিল। মালা যখন আমার কোলে বসে তখন আমার দুই পায়ের দুই দিকে পা দিয়ে উরুর উপরে বসে, ফলে ওর পাছা থাকে আমার পেটের সাথে, আমি দুই পা চাপিয়ে বসি, ফলে কখনো আমার ধোন শক্ত হলেও আমার রানের নিচে চাপা পড়ে থাকে। মালা কখনো আমার কোলে বসে স্থির থাকে না, সেদিনও বেশিক্ষণ স্থির থাকলো না।

মিনিট পাঁচেকের মধ্যেই ওর নড়াচড়া শুরু হয়ে গেলো। তবে সেদিনের নড়াচড়ার পরিমানটা ছিল বেশি।

আমি বললাম, “কিরে অমন করছিস কেন?”

মালা বললো, “আমার উরুতে চুলকাচ্ছে।”

আমি বললাম, “ঠিক আছে, তাহলে নিচে নেমে বস।”

আমার কথা শুনে মালা উঠে দাঁড়ালো আর আমি আমার পা দুটি ফাঁক করলে মালা আমার দুই উরুর ফাঁকে সোফার উপরে বসলো। কিন্তু ও বসার সময় আমার পেট ঘেঁষে নেমে যাওয়াতে আমার ধোনটা ওর পাছার নিচে চাপা পড়লো, যদিও ওটা তখন নরম ছিল। কিন্তু মালা সম্ভবত ঠিকই বুঝতে পেরেছিল যে ওর পাছা আর সোফার মাঝখানে মোটা দড়ির মতো কিছু একটা আছে।

মালা ওভাবে বসেও ওর পাছা ঘষাতে লাগলো, মালার নরম পাছার ঘষায় আমার ধোন শক্ত হয়ে উঠতে শুরু করলো। আমি ওটাকে থামানোর যথাসাধ্য চেষ্টা করলাম কিন্তু পারলাম না, মালার পাছার নিচে লোহার রডের মত শক্ত হয়ে গেল ওটা। আমি টিভিতে মনোযোগ দিলাম, যাতে ধোনটা আস্তে আস্তে নিস্তেজ হয়। হঠাৎ মনে হল আমার ধোনের মাথায় কিসের ঘষা লাগলো। প্রথমে ভাবলাম মনের ভুল, কিন্তু দ্বিতীয়বর যখন আরেকটু জোরে চাপ লাগলো, তখন বুঝতে পারলাম যে মালা ওর দুই উরুর ফাঁক দিয়ে হাত ঢুকিয়ে ঠিক ওর গুদের নিচে অবস্থিত আমার ধোনের মাথায় উদ্দেশ্যমূলকভাবে ইচ্ছে করেই আঙুল দিয়ে খোঁচাচ্ছে। আমি না বোঝার ভান করে বসে রইলাম। কিন্তু পরেরবার মালা আবারও আঙুল দিয়ে জোরে ঘষা দিল এবং আঙুলটা না সরিয়ে ধোনের মাথায় লাগিয়ে রাখলো।

আমার সাড়ে ৭ ইঞ্চি লম্বা ধোনটা ইতিমধ্যে শক্ত লোহা হয়ে উঠেছে আর মালা সেটা পাছার নিচে ঠিকই বুঝতে পারছে। আমি এই ৮ বছরের পুঁচকে মেয়েটার যৌনলিপ্সা দেখে অবাক হয়ে গেলাম। আমি যখন এসব ভাবছি মালা ততক্ষণে আমার সাড়া না পেয়ে বেপরোয়া হয়ে উঠলো এবং পুরোপুরি আরো সাহসী হয়ে উঠলো এবং আমার ধোনের মুন্ডিটা ওর ছোট্ট হাতে চেপে ধরলো। আমি এবারে আর চুপ করে থাকতে পারলাম না।

ওর কানের কাছে ফিসফিস করে ধমকে উঠলাম, “এই মালা, কি হচ্ছে এসব, ছাড় বলছি।”

মালা তখন আরো ভাল করে ধোনের মাথাটা চেপে ধরে বলল, “ছাড়বো না, তুমি শক্ত বানালে কেন? ছাড়বো না, কি করবে?”

আমি এবারে অন্য পথ চেষ্টা করলাম, বললাম, “আপা দেখলে কিন্তু জবাই করে ফেলবে।”

মালা হেসে বলল, “মামনি রান্নাঘরে তোমার জন্য পোলাও মাংস রাঁধছে, এদিকে আসবে না।”

আমি বললাম, “তবুও, এসব ভাল না, লক্ষী মামনি ছাড়।”

মালা আরো জোরে চেপে ধরে বললো, “না ছাড়বো না, আমার ধরে থাকতে ভালো লাগতেছে।”

এ কথা বলার পর মালা এক হাতের পরিবর্তে দুই হাতে আমার শক্ত ধোনটা চেপে ধরে টিপতে লাগলো। আমার ধৈর্য্যের বাঁধ ভেঙে গেল, মাথার মধ্যে গোলমাল হয়ে গেল, আমার হিতাহিত জ্ঞান লোপ পেয়ে গেল, আমি স্থান-কাল-পাত্র সব ভুলে গেলাম। আমি ভুলে গেলাম যে, বাচ্চা একটা মেয়ের সাথে আমার একটা অনৈতিক সম্পর্ক ঘটতে চলেছে।

আমি ফিসফিস করে বললাম, “দ্যাখ, তুই যদি আমারটা না ছাড়িস আমি কিন্তু তোরটা ধরে চটকাবো।”

এক সেকেন্ডও দেরি না করে মালা আমার চোখে চোখ রেখে হাসতে হাসতে চটপট বলে দিলো, “ধরো না, ধরো, আমি কি মানা করেছি নাকি? আমার তোমারটা ধরতে মন চাইছিল, ধরেছি; তোমার যদি আমারটা ধরতে মন চায় তো ধরো না, ধরো।”

এ কথা বলে মালা ওর দুই পা বেশ খানিকটা ফাঁক করে দিল যাতে আমি ওর গুদটা ধরতে পারি। একেবারেই বাচ্চা একটা মেয়ে, যার কিনা বয়ঃসিন্ধক্ষণে পৌঁছানো এখনো অনেক বাকি, তার এরকম সেক্সুয়াল অভিজ্ঞতা দেখে আমার টাসকি লেগে গেল। আমি ওকে উঁচু করে তুলে আমার উরুর উপরে বসালাম আর আমার দুই পা ফাঁক করে রাখলাম যাতে মালা সহজেই ওর হাত আমার দুই উরুর ফাঁক দিয়ে ঢুকিয়ে আমার ধোন নাড়তে পারে।
মালা আমার কোমড়ের দুই পাশে দুই পা দিয়ে বসে একটু সামনে নুয়ে দুই হাত দিয়ে আমার ধোনটা শক্ত করে ধরে নাড়তে লাগলো। উপর দিকে ফাঁকা পেয়ে আমার ধোনটা খাড়া হয়ে উঠেছিল, ফলে মালা পুরো ধোনটা আগা গোড়া নাড়তে পারছিল। মালা ওর ধোনটা চেপে ধরে উপর নিচে খেঁচে দিচ্ছিল। আমি আমাদের দুজনের বয়সের ব্যবধান ভুলে গেলাম। নিজেকে কন্ট্রোল করতে না পেরে ডান হতি দিয়ে ওর নরম গুদটা প্যান্টের উপর দিয়েই চেপে ধরলাম। বাম হাত ওর ফ্রকের নিচ দিয়ে ঢুকিয়ে প্রথমে ওর নরম পেট টিপলাম, নাভিতে আঙুল ঢোকাতেই খিলখিল করে হেসে হড়িয়ে পড়লো। আপা ওর হাসি শুনতে পেয়ে যাবে ভেবে আমি আর ওর পেটে হাত দিলাম না। হাতটা উপর দিকে তুলে ওর বুকের উপরে রাখলাম।

মালার স্বাস্থ্য বেশ নাদুসনাদুস, যদিও ওর মাই ওঠার বয়স তখনো হয়নি কিন্তু স্বাস্থ্যবতী হওয়াতে দুই মাইয়ের ওখানে বেশ থলথলে মাংস। চাপ দিয়ে ধরে দেখলাম, প্রায় মাইয়ের মতই নরম তুলতুলে। খুব মজা লাগছিল আমার, আমি নখ দিয়ে ওর মাইয়ের বোঁটা আঁচড়ে দিচ্ছিলাম, মালা চুপ করে আমার ধোন খেঁচতে লাগলো। মালার পরনে যে হাফ প্যান্টটা ছিল সেটার কোমড়ে আর দুই উরুতে ইলাস্টিক দেওয়া। আমি এক উরুর ইলাস্টিকের ঘেড়ের নিচে আঙুল ঢুকিয়ে টান দিয়ে দেখি পায়ের ঘেড়ে অনেক কাপড়। ইলাস্টিকের ব্যান্ডের নিচ দিয়ে আমার হাত ঢুকে গেল। আমি ওর নরম তুলতুলে আলগা গুদ চেপে ধরে টিপতে লাগলাম। মাখনের মত নরম তুলতুলে গুদের ফাটার মধ্যে আঙুল ঢুকিয়ে রগড়াতে লাগলাম। আঙুলে ওর ছোট্ট ক্লিটোরিসটা ম্যাসাজ করে দিতে লাগলাম।

একটু পর রেনু আপা এলো, আমি ভয় পেয়ে হাত সরিয়ে নিলেও মালা আমার ধোন ছাড়লো না। যেহেতু আমাদের দুজনের পুরো শরীর চাদরে ঢাকা ছিল, আপা কিছুই বুঝতে পারলো না। আপা আমার জন্য গরম গরম খাবার তৈরি করে এনেছিল, আমার সামনে টি টেবিলে সেগুলি রাখতে লাগলো। নিচু টে টেবিলে খাবার রাখার জন্য আপাকে আমার সামনে অনেকখানি নুয়ে পড়তে হচ্ছিল। আপার বুকের আঁচল ঝুলে পড়লো, আর ওর ভি-কাট গলার ব্লাউজের সামনেটা অনেকখানি আলগা হয়ে ভিতরে লাল ব্রা দেখা গেল। কিন্তু ব্রা-তে আপার বড় বড় নিটোল মাই দুটোর মাত্র অর্ধেকটা য়াকা পড়েছে। আমি পরিষ্কারভাবে আপার ফর্সা নিটোল দুধের ফুলে উঠা অর্ধেকটা আর দুই দুধের মাঝের খাঁজ দেখতে পেলাম।

ওই দৃশ্য চোখে পড়ার সাথে সাথে আমার ধোন আরো শক্ত হয়ে টনটন করতে লাগলো। মালা ইতিমধ্যে আমার ধোন ছেড়ে দিয়েছে। আমি আপার মাই থেকে আমার চোখ সরাতে চেষ্টা করলাম কিন্তু আমার অবাধ্য চোখ বারবার ঘুরেফিরে চুম্বকের মত ওদিকেই আটকে যাচ্ছিল। ভয় হচ্ছিল, বাই চান্স আপা যদি বুঝতে পারে যে আমি লম্পটের মতো এর মাই দেখছি তাহলে হয়তো ভিষন রাগ করবে আর আমি অনেক কিছু থেকে বঞ্ছিত হবো। কিন্তু সৌভাগ্যক্রমে সেসব কিছু হলো না। আমি মালাকে কোল থেকে নামিয়ে পাশে বসিয়ে খেতে শুরু করলাম।
পরের দিন আমি মালাদের বাসায় যাওয়ার পর যথারিতি মালা এসে আমার কোলে বসে চাদর দিয়ে নিজেকে জড়িয়ে নিয়ে আমার কোলে বসেই আমার ধোন ধরে নাড়াচাড়া করতে লাগলো। আমিও ওর গুদ নিয়ে খেলা করতে লাগলাম। রেনু আপা ঘরেই ছিল, কিন্তু সে মালার জন্য একটা সোয়েটার বোনায় এতই মনোযোগী ছিল যে আমাদের দিকে খেয়ালই করলো না। তবুও আমি মালাকে চিমটি কেটে ইঙ্গিতে ওর মায়ের উপস্থিতি জানালেও মালা ওসব পাত্তাই দিল না। কিছুক্ষণ পর আমি আমার হাত ওর প্যান্টের ভিতরে ঢোকানোর চেষ্টা করলাম।

হঠাৎ মালা লাফ দিয়ে উঠে বললো, “বাথরুম পেয়েছে।”

আমি একটু অবাক হলাম, তবে কি মালা আমাকে ওর গুদে হাত দিতে দিবে না? কিন্তু কেন?

মিনিট পাঁচেক পর মালা ফিরে এলো। আমার দিকে পিছন ঘুড়িয়ে আগে চাদর দিয়ে নিজেকে জড়িয়ে নিলো, পরে আমার পায়ের উপর বসতে গিয়েও বসলো না। আমার দুই উরুর উপরে দুই হাত রেখে আমার লুঙ্গি টেনে উপরে তুলতে লাগল। আমি বাধা দিতে চেষ্টা করেও পারলাম না, মালা পুরো লুঙ্গি তুলে আমার আলগা রানের উপরে বসলো। রেনু আপা সোয়াটর বুননে এতই মনোবিষ্ট ছিল যে সে এদিকে তাকালোও না। মালা আমার উরুতে বসেই দুই হাত নিচে নামিয়ে আমার আলগা ধোনটা চেপে ধরে টিপতে লাগলো। আমিও মালার ফ্রক ওর বুকের উপরে উঠিয়ে দিলাম। কিছুক্ষণ ওর মাইএর মাংস টেপার পর নিচের দিকে হাতটা নামিয়ে ওর প্যান্টের ভিতর ঢুকাতে চাইলাম। কিন্তু কই! মালার পরনে কোন প্যান্ট নেই, মালা ওর প্যান্ট বাথরুমে খুলে রেখে ন্যাংটো হয়ে এসেছে। আমি খুশি মনে ওর নরম গুদ চেপে ধরে টিপতে লাগলাম আর গুদের চেরার মধ্যে আঙুল ঢুকিয়ে ঘষাতে লাগলাম।

আমি আমার আঙুল ঘষাতে ঘষাতে আমার কড়ে আঙুল ওর গুদের ফুটোর মধ্যে ঢুকানোর চেষ্টা করলাম, কিন্তু জায়গাটা শুকনো, ঢুকলো না। মালা সেটা বুঝতে পেরে আমার ধুন টিপে ধোনের মাথা দিয়ে বেরনো রস আঙুলে লাগিয়ে ওর গুদের ফুটোর মুখে লাগিয়ে দিল। আমি আবার চেষ্টা করলাম, আমার কড়ে আঙুলের মাঝের গিট পর্যন্ত ঢুকলো, তারপর আটকে গেলো। আমি ওটুকুই আগুপিছু করতে লাগলাম। এরপর মালা আমার ধোন টেনে এনে ধোনের মুন্ডিটা ওর গুদের সাথে লাগালো, আমি আমার হাত সরিয়ে নিলে মালা আমার ধোনের মুন্ডি ওর গুদের চেরার সাথে ঘষাতে লাগলো। একটু পর রেনু আপা কাজ রেখে বাইরে চলে গেল।

মালা আমার কানের কাছে মুখ নিয়ে ফিসফিস করে বললো, “তোমার বাবুটারে বমি করায়ে দেই?”

আমি ওর কথা শুনে যার পর নাই অবাক হয়ে গেলাম। মালা এতো কিছু শিখলো কিভাবে? মনে মনে ভাবলাম, জানতে হবে আমাকে।

যাই হোক আমার অবস্থা অত্যন্ত শোচনীয় ছিল, আগের দিন মালাদের বাসা থেকে বাইরে বেড়িয়ে রাস্তার পাশে দাঁড়িয়ে হস্তমৈথুন করতে হয়েছে। তাই আমি ওর প্রস্তাবে রাজি হলাম। মালা ওর মুখ থেকে একগাদা থুথু নিয়ে আমার ধোনের গায়ে আর ওর গুদের চেরায় মাখিয়ে নিল। তারপর পিছলা গুদের চেরার সাথে আমার ধোনের মুন্ডি ঘষাতে ঘষাতে হাত দিয়ে ধোন শক্ত করে চেপে ধরে উপর নিচ খেঁচতে লাগলো। একটু পর চিরিক চিরিক করে আমার ধোন থেকে পিচকারীর মত মাল বেড়িয়ে ওর গুদ ভাসিয়ে দিল। মালা আমার মুখের দিকে তাকিয়ে হাসলো আর লুঙ্গি দিয়ে নিজের গুদ আর আমার ধোন মুছে দিল। আমি আর দেরি না করে দ্রুত মালাদের বাসা থেকে চলে এলাম।
আমি খেয়াল করলাম, রেনু আপা দিনের পর দিন আমাকে নিজের শরীর দেখানোর জন্য চেষ্টা করে যাচ্ছে। প্রায় সময়েই আপার বুকে কাপড় থাকে না, খাড়া খাড়া মাই দুটো ব্লাউজের মধ্যে ফাটফাট করে আর সুযোগ পেলেই আমার সামনে এমনভাবে হামা দেয় যাতে আমি ওর মাইগুলো সহজেই দেখতে পারি।

শুক্রবার আমাদের কলেজ বন্ধ থাকে। প্রতি শুক্রবারেই সকালে আমি রেনু আপার বাসায় যাই, টিভিতে প্রোগ্রাম দেখার জন্য। সেদিনও ছিল শুক্রবার, আপা আমার জন্য চা করে নিয়ে এলো, আমি সোফায় বসা, আপা হামা দিয়ে টেবিলে চা রাখলো। সেদিন আপা সালোয়ার কামিজ পড়েছিল। যখন আপা চায়ের কাপ রাখলো, কামিজের বুকের কাছে অনেকখানি ঝুলে গেল। যা দেখলাম আমার দুটো হার্টবিট মিস হয়ে গেল।

কামিজের ভিতরে কিচ্ছু নেই, না ব্রা, না নিমা। আপার নিটোল মাইদুটো ঝুলছে, আমি আপার কালো বোঁটা পর্যন্ত দেখতে পারলাম।

আমি চা খেয়ে টিভি দেখতে লাগলাম, একটা সুন্দর ছবি হচ্ছিল। প্রায় ১১টার দিকে আপা নিজের কাপড় চোপড় নিয়ে ঘর থেকে বেড়িয়ে গেল, সম্ভবত গোসল করার জন্য। আমার গায়ে চাদর ছিল না জন্য মালা এতক্ষণ বিশেষ সুবিধা করতে পারছিল না। কেবল আমার কোলে বসে পাছা দিয়ে আমার ধোন চটকাচ্ছিল। এই সুযোগে মালা আমার কোল থেকে পিছলে নেমে গেল। আমার পায়ের কাছে বসে আমার লুঙ্গি উঁচু করে মাথা ঢুকিয়ে দিয়ে দুই হাতে আমার খাড়ানো ধোন চেপে ধরলো। এরপর আমাকে অবাক করে দিয়ে আমার ধোনটা টেনে নিচের দিকে নামিয়ে ওর মুখে পুরে নিয়ে চুষতে লাগলো।

আমার মোটা ধোন ওর মুখের পুরোটা জুড়ে গেলো। তবুও ও ওভাবেই সুন্দর করে চুষতে লাগলো আর হাত দিয়ে খেঁচতে লাগলো। ১৫ মিনিটের মধ্যেই আমার মাল আউটের সময় হয়ে এলো, আমি ওকে সিগন্যাল দিলেও মালা আমার ধোন ওর মুখ থেকে বের করলো না, ওর মুখ ভর্তি করে মাল আউট করে দিলাম। আমার অবাক হওয়ার তখনো কিছু বাকি ছিল, মালাকে টেনে বের করে দেখি ও আমার মাল সবটুকু চেটেপুটে গিলে খেয়েছে, কেবল ওর ঠোঁটের আশেপাশে এক-আধটু লেগে আছে, সেটুকু আমার লুঙ্গি দিয়ে মুছে দিলাম।

আমি ওকে টেনে তুলে আমার কোলে বসিয়ে দুই হাতে জড়িয়ে ধরে চুমুতে চুমুতে ভরিয়ে দিলাম আর আদর করে দিলাম। তারপর আমার কৌতুহল চেপে রাখতে না পেরে আমি জানতে চাইলাম, ও এসব কোথা থেকে শিখেছে?

মালা প্রথমে আমাকে কসম খাইয়ে নিল যে আমি কাউকে এটা বলবো না।

পরে বললো, “টিভিতে ছবি দেখে।”

আমি বললাম, “মানে?”

মালা বললো, “বাবা ছুটতে আসার সময় ফিতা (ভিডিও ক্যাসেট) নিয়ে আসে। পরে অনেক রাতে ওরা যখন মনে করে আমি ঘুমায়ে গেছি তখন সেই ফিতা চালায় (প্লে করে), কিন্তু আসলে তো আমি ঘুমাই না। চুরি করে দেখি কেমন করে ছেলেরা মেয়েদের দুদুন চোষে, জুজুনি চোষে। আর মেয়েরা ছেলেদের বাবু (মালা মাই-কে দুদুন, গুদকে জুজুনি আর ধোনকে বাবু বলে ডাকতো) চুষে বমি করায়ে দেয়। ছবি দেখে দেখে মামনি আর বাবা ল্যাংটা হয়া দুইজন দুইজনকে জড়ায়ে ধরে চুমা খায় আর মামনি বাবার বাবু চুষে দেয়।”

মালা বলতে থাকে “বাবাও মামনির জুজুনি চুষে দেয়, মামনি কেমন যেন কাতড়ায়। কিন্তু আমি টিভিতে দেখছি, সবশেষে ছেলেরা তাদের বাবুটা মেয়েদের জুজুনির ফুটোর মধ্যে ঢোকায়, যেদিক দিয়ে তুমি আমার জুজুনিতে আঙুল ঢুকাও, কিন্তু বাবা সেটা করলো না। আসলে বাবার বাবুটা না বেশি শক্ত হয় না, ক্যামন যেস ত্যানা ত্যানা। মামনি রাগারাগি করে। পরে বাবা মামনির জুজুনির মধ্যে আঙুল দিয়ে আগুপিছু করে। এইগুলি দেখে দেখে আমি শিখছি। একদিন রাতে বাবা মা দুজনেই ঘুমিয়ে ছিল, আমার পেশাব লাগছিল, পেশাব করে এসে দেখি বাবার লুঙ্গি কোমড় থেকে খুলে গেছে। আমার খুব শখ লাগলো জানো? আমি চুপি চুপি লুঙ্গি সরায়ে দেখি বাবার বাবুটা এই এ্যাত্তোটুকুন, ধরে দেখি নরম তুলতুলে।”

আমি ওর মুখে হাত দিয়ে চেপে ধরে বলি, “চুপ এসব বলতে নেই, বাবার সাথে কেউ এসব করে?”

মালা ও প্রসঙ্গে আর কিছু না বলে অন্য প্রসঙ্গ আনলো, “আচ্ছা মামা, মামনির জুজুনিতে অনেক চুল, তোমার বাবুর গোড়াতেও চুল আছে, আমার নাই কেন?”

আমি বললাম, “বড় হলে চুল হয়, তোরও হবে?”

এবারে মালা একটা শক্ত প্রশ্ন করে বসে, “মনি মামা, আমি তোমার বাবুটা আমার জুজুনিতে নিতে পারবো না?”

আমি বললাম, “না সোনা, এখন নিতে পারবে না, তবে ৪/৫ বছর পরে নিতে পারবে। দেখলে না আমার এই চিকন কড়ে আঙুলটাই ঠিকমত ঢুকলো না, আর আমার বাবুটা কত মোটা, তোমার জুজুনি ফেটে যাবে, রক্ত বেরুবে। তুমি বড় হও, তারপরে নিতে পারবে।“

রেনু আপা চলে আসাতে আমরা চুপ মেরে গেলাম।
মালা উঠে বাইরে চলে গেল, আমি টিভিতে মনোযোগ দিলাম। আমি যেখানে বসেছিলাম সেখান থেকে রেনু আপার ড্রেসিং টেবিল আড়ালে হলেও ড্রেসিং টেবিলের সামনে কেউ দাঁড়ালে সরাসরি তাকে দেখা না গেলেও আয়নার মধ্যে তাকে পরিষ্কার দেখা যায়। আমিও রেনু আপার গলা থেকে কোমড় পর্যন্ত দেখতে পাচ্ছিলাম। চাইছিলাম ওদিকে তাকাবো না কিন্তু অবাধ্য চোখ বারবার ঘুরে ঘুরে ওদিকে চলে যাচ্ছিল। আপা টেবিলের উপরে পা তুলে দিয়ে লোশন লাগালো। রেনু আপার শরীর একটা বড় তোয়ালে দিয়ে জড়ানো ছিল, আপা হঠাৎ তোয়ালেটা খুলে দিল। আমার বুকটা এমনভাবে ধরফর করতে লাগলো যে মনে হল হৃৎপিন্ডটা না বাইরে বের হয়ে যায়। আয়নার মধ্যে রেনু আপার বড় বড় নিটোল খাড়া খাড়া মাই দুটো পরিষ্কার দেখা যাচ্ছিল।

আপার নড়াচড়ার সাথে সেগুলি যেভাবে তিরতির করে কাঁপছিল তাতেই বোঝা যাচ্ছিল ওগুলি কতটা নরম হতে পারে! আপা হাতে লোশন নিয়ে সারা বুকে মাখলো, মাইগুলোতে ঘষে ঘষে লোশন লাগালো। মাইগুলোর নিচে উপরে ম্যাসাজ করলো, নিপলগুলো টিপেটিপে ম্যাসাজ করলো। নিপলগুলি বেশ শক্ত আর খাড়া মনে হচ্ছিল, বোঝা যাচ্ছিল ওগুলি উত্তেজিত হয়ে আছে। আপা অনেকটা সময় নিয়ে লোশন লাগালো। আমার মনে হলো, আমি যে আয়নার মধ্যে তাকে দেখছি সেটা সে জানে আর আমাকে নিজের গুপ্তধন দেখানোর জন্যই সে ইচ্ছে করে অনেক সময় নিয়ে কাজটা করছে। হঠাৎ করে আমার মাথার মধ্যে বিজলী খেলে গেল, মালার বলা কথাগুলো মনে পড়ে গেল।

আমি রেনু আপার কার্যকলাপের মধ্যে পরিষ্কারভাবে পরকীয়ার গন্ধ পেলাম, আর তার টার্গেট আর কেউ নয়, আমি। মুখে ভাই ডাকলেও তার আসল উদ্দেশ্য আমাকে দিয়ে নিজের যৌনক্ষুধা মেটানো। মালার কথায় বুঝতে পেরেছি, যে কোন কারনেই হোক সুবির বাবু রেনু আপাকে চুদতে অক্ষম। সেক্ষেত্রে আপার যৌনক্ষুধায় কাতর হওয়াটাই স্বাভাবিক।

কিন্তু মালার সাথে আমি যেভাবে আটকে গেছি তাতে মা-মেয়ে দুজনকেই…না না সেটা সম্ভব নয়…এটা আমি পারবো না। সিদ্ধান্ত নিলাম, হয় মালা না হয় আপা থেকে আমাকে দুরে থাকতে হবে।

সেদিনের মত আমি দ্রুত আপার বাসা থেকে চলে এলাম।
পরের ২/৩ দিন ইচ্ছে করেই আমি আপার বাসায় গেলাম না। পরের দিন বিকেলবেলা যখন আমি গেলাম আপা খুব রাগ করলো। আমি অজুহাত দেখালাম যে সামনে পরীক্ষা সেজন্যে আসিনি আর তাছাড়া আমার বাড়িওয়ালা আর তার বৌ একটা নিমন্ত্রণ খেতে গেছে ৩/৪ দিনের জন্য তাই বাড়ি ছেড়ে আসতে পারিনি। আমি সেদিনও তাড়া দেখালাম যে আমি বাড়িতে একা আছি তাই বেশিক্ষণ থাকা যাবে না, চুরি টুরি হতে পারে, আমাকে তাড়াতাড়ি ফিরতে হবে। আপা সব অকপটে বিশ্বাস করলো। আসলে বাড়িওয়ালা সেদিনের জন্য দাওয়াত খেতে গেছিল। আমি এদিকে মালার সান্নিধ্য মনেপ্রানে চাইছিলাম। আর তাছাড়া এ কয়দিন মালার গুদ হাতিয়েছি কেবল, চোখের দেখা দেখিনি, তাই এটাই সবচেয়ে বড় সুযোগ, বাড়িতে আমি একা। মালাকে সাথে নিয়ে যাওয়ার কথা বলতেই আপা রাজি হয়ে গেল। মালাও বোধ হয় এটাই চাইছিল, সেও খুশি মনে আমার সাথে চলে এলো।

বাড়িওয়ালা দাওয়াত খেতে গেছে, আসবে সেই গভীর রাতে। আমি মালাকে নিয়ে ঘরে ঢুকে দরজা বন্ধ করে দিলাম। আগেই মালার জন্য কিছু চকলেট এনে রেখেছিলাম, সেগুলি ওকে দিয়ে আমি বিছানায় শুয়ে পড়লাম। মালা আমার উরুর উপর মাথা রেখে চকলেট খেতে লাগলো। মালার ছোঁয়ায় আমার ধোন শক্ত হয়ে উপর দিকে খাড়া হয়ে উঠলো।

মালা বললো, “এ চকলেট মিস্টি না, দেখি আমার আসল চকলেট খাই।”

মালা উপুড় হয়ে শুয়ে আমার লুঙ্গি টেনে তুলে ধোন বের করে মুখে নিয়ে চুষতে লাগলো। আমি মালার পা ধরে টানলাম, মালা ওর কোমড় আমার মাথার দিকে এগিয়ে দিল। আমি ওর কোমড় ধরে উঁচু করে তুলে আমার মাথার দুপাশে ওর দুই পা রেখে উল্টাপাল্টা অবস্থায় সেট করলাম।

যখন মালার গুদ আমার মুখের উপরে এলো আমি ওর কোমড় ধরে নিচের দিকে টান দিয়ে নামালাম আর ওর প্যান্টের উপর দিয়েই ওর গুদ কামড়াতে লাগলাম। কিছুক্ষন পর আমি ওর ইলাস্টিক দেওয়া প্যান্টের কাপড় ধরে টেনে নিচের দিকে নামালাম। ওয়াও কি সুন্দর পাছা, গোল, নিটোল। পিছন দিক দিয়ে ওর গুদের চেরাসহ মোটা মোটা ঠোঁটগুলো দেখা যাচ্ছিল। আমি ওর কোমড় ধরে এগিয়ে এনে ওর গুদ জিভ দিয়ে চাটতে লাগলাম। দুই হাত দিয়ে পাছার দাবনা টেনে ফাঁক করে দেখলাম গুদের নিচের দিকে একটা ছোট্ট লাল ফুটো। মাঝের আঙুল ঢুকাতে চেষ্টা করলাম, ঢুকলো না তবে কড়ে আঙুল পুরোটা ঢুকলো, আগে ঢুকতো না।

মালা দুই হাত দিয়ে আমার ধোন চেপে ধরে সমানে চুষছে আর চাটছে। আমি ওকে তুলে দিয়ে উপরে উঠলাম আর ওকে চিৎ করে শুইয়ে ওর প্যান্ট পুরো খুলে ফেললাম। মালার গুদটা বেশ বড় আর মাংসল। অপূর্ব দেখতে। আমি ওর গুদের সাথে আমার ধোন থেকে বেরনো রস মাখিয়ে পিছলা করে নিয়ে অনেকক্ষণ ধরে ধোনের মুন্ডিটা ঘুড়িয়ে চেরার মধ্যে ঘষালাম। শেষের দিকে আবার মালাকে দিলাম ধোনটা চুষতে আর আমি উল্টোদিকে উপর হয়ে ওর গুদ চাটতে লাগলাম আর আঙুল ঢোকাতে লাগলাম। অনেকক্ষণ চেষ্টার পর আমার মাঝের আঙুলের মাঝের গিট পর্যন্ত ঢুকলো তবে ও ব্যাথা পাওয়াতে বাদ দিলাম। ধোন চুষতে চুষতে আমার মাল আউট হওয়ার সময় হলে মালাকে বললাম, মালা ইঙ্গিতে ওর মুখের মধ্যেই ঢালতে বললো। পুরো মালটুকু মালা চেটেপুটে খেয়ে নিল।

পরে আমি মালাকে বাসার গেট পর্যন্ত এগিয়ে দিলাম, যাওয়ার পথে মালাকে বললাম যে আমি পরীক্ষার পড়া নিয়ে কয়েকদিন ব্যস্ত থাকবো তাই ওদের বাসায় যেতে পারবো না। আমার মাথায় আরেক ফন্দি এলো, তাই মালাকে বললাম, যদি পারিস, তুই নিজেই সকালে চলে আসিস।

সত্যি আমি ৩/৪ দিন না যাওয়াতে এক ভোরে মালা এসে হাজির। আমি ওকে নিয়ে বাড়ির পিছনের সব্জি খেতের আইলে গিয়ে পাটি পেড়ে বসলাম। ওখানে সকালের রোদটা লাগে, আর জায়গাটা নির্জন, সচরাচর ওদিকে কেউ যায় না। আমার গায়ে চাদর ছিল, আমি পাটিতে বসার পর মালা আমার চাদরের মধ্যে ঢুকে পড়লো। তারপর উবু হয়ে বসে আমার ধোন নিয়ে চুষতে লাগলো। আমিও মালার গুদ টিপতে লাগলাম। সেদিন অনেক চেষ্টার পর আমার মাঝের আঙুল পুরোটা ঢোকাতে পারলাম। পরে মালা আমার মাল আউট করিয়ে সবটুকু খেয়ে নিল।

আমি মনে মনে এই ভেবে খুশি হলাম যে, খুব বেশি হলে আর মাত্র ২/৩ মাস পরেই আমি মালার গুদে আমার ধোন ঢোকাতে পারবো এবং তখন থেকে এই আনকোড়া কচি মালটা যতদিন খুশি মনের সুখে চুদতে পারবো।

কিন্তু বিধি বাম, ঠিক পরের দিনই মালা দুঃসংবাদটা দিল। সুবির বাবু কোয়ার্টার পেয়েছেন, মালারা খুব শিঘ্রি ঢাকায় চলে যাচ্ছে। মালা খবর দিল যে রেনু আপা আমাকে দেখা করতে বলেছে। আমি দ্রুত রেনু আপার সাথে দেখা করলাম, আপা আমাকে তার স্বামীর লেখা চিঠি পড়তে দিল। সুবির বাবু আসতে পারবেন না তাই আমাকে অনুরোধ করেছেন মালা আর আপাকে ঢাকার গাড়িতে উঠিয়ে দেওয়ার জন্য। রেনু আপার সকল প্রস্তুতি আগে থেকেই নেওয়া ছিল। আমাকে পরের দিনের টিকেট আনতে বললো।

আমি পরের দিনের ট্রেনেই আপা আর মালাকে তুলে দিলাম। আমার কেন যেন মনে হলো, আপা আমার উপর রাগ করেই তাড়াহুড়ো করে চলে গেলো।
অনার্স করার পরে পারিবারিক জটিলতার কারনে আমার আর গতানুগতিক লেখাপড়া করা সম্ভব হচ্ছিল না। তাই বিদেশ যাবার উদ্দেশ্যে কর্মমুখী শিক্ষা নেয়ার জন্য ঢাকার একটা বড় নামকরা শিক্ষায়তনে ভর্তি হলাম। এক বন্ধুর সাথে মেসে থাকতাম।

ঢাকায় আসার পর থেকেই রেনু আপা আর মালার সাথে দেখা করার এক অদম্য আগ্রহ থাকলেও ইনস্টিটিউটের কঠিন নিয়মকানুনের জন্য হয়ে ওঠেনি। কারন সকাল ৭টা থেকে দুপুর ২টা পর্যন্ত ক্লাস করতে হতো, তারপরে মেসে ফিরে পরের দিনের হোমওয়ার্ক করতে হতো, সপ্তাহে শুধু শুক্রবারে ছুটি থাকতো। ২/১ দিন বেশি ছুটি পেলেই বাড়িতে যেতে হতো টাকার জন্য – এসব কারনে আর হয়ে ওঠেনি। সবচেয়ে বড় সমস্যা হলো, রেনু আপাদেরকে তো খুঁজে বের করতে হবে, আমি সুবির বাবুর ঠিকানা জানিনা। আর সে কাজের জন্য যথেষ্ট সময় দরকার, যেটা আমি কোনভাবেই ম্যানেজ করতে পারছিলাম না।

হঠাৎ করেই ইনস্টিটিউট ২ সপ্তাহের জন্য বন্ধ হয়ে গেল। আমি বাড়ি যাওয়া বাদ দিয়ে মালাদের খুঁজে বের করার জন্য মনস্থির করলাম। অনেকদিন মেয়েমানুষ চোদা হয় না, মনটা বড়ই আউলা লাগতেছিল। আমি ছুটির কথা বন্ধুকে বললাম কিন্তু বাড়ি যাবোনা সেটা বললাম না। পরেরদিন বন্ধু কাজে বেড়িয়ে যাওয়ার সময় শুধু জানালাম, আমি হয়তো বাড়ি চলে যেতে পারি। প্রথমেই গেলাম ঢাকা সেনানিবাস অফিসার্স কোয়াটার্স এলাকায়। ঢুকতেই গার্ডদের বসার রুম, সেখানে জিজ্ঞেস করে জানতে পারলাম, সুবির বাবু অনেক আগে কোয়ার্টারে থাকতেন। পরে তিনি মিশনে বিদেশ চলে যান। বিদেশ থেকে ফিরে ঢাকায় বাড়ি কিনেছেন, উনার পরিবার সেই বাড়িতেই থাকে। কিন্তু তারা সেই বাসার ঠিকানা দিতে পারলো না, তবে আমাকে আর্মি হেডকোয়ার্টারে খোঁজ নেবার পরামর্শ দিল।

আমি সোজা আমি হেডকোয়ার্টারে গিয়ে খোঁজ নিলাম। সুবির বাবুর প্রমোশন হয়ে এখন তিনি লেফটেন্যান্ট কর্নেল, বাসার ঠিকানা পাওয়া গেল। আমি কোন দ্বিধা না করে সোজা চলে গেলাম মিরপুরের সেই বাসায়। সহজেই পাওয়া গেল, নম্বর মিলিয়ে ছয়তলা বিল্ডিং এর সামনে যেতেই বসবাসকারীদের নেমপ্লেট চোখে পড়লো, সেখানে সুবির বাবুর নামও আছে। আসলে সুবির বাবু বাড়ি নয়, ফ্ল্যাট কিনেছেন। নামের পাশেই ফ্ল্যাটের নাম্বার দেয়া। ৪ তলায় সুবির বাবুর ফ্ল্যাট।

৪ তলায় গিয়ে সুবির বাবুর নাম লেখা দরজার বেল চাপতেই ভিতর থেকে আওয়াজ পেলাম, “কে?”

জবাব না দিয়ে দাঁড়িয়ে রইলাম। কিছুক্ষণ পর দরজা খুলে গেল, মালাকে চিনতে একটু কষ্টই হলো, রাস্তায় দেখলে চিনতে পারতাম না। চেহারার আদলটা আছে, আর সব কিছু পাল্টে গেছে। বেশ লম্বা আর একটু মোটা হয়েছে মালা।
আমাকে দেখেই চোখ কপালে তুলে একটা চিল চিৎকার দিল, “ও মামনি দ্যাখো কে আসছে!”

রেনু আপা ছুটে এলো, আমাকে দেখেই জড়িয়ে ধরে আর কি। বাসায় ঢোকার পর একটু অভিমান, একটু রাগ, কেন আসিনি, কেন খবর রাখিনি, এইসব চললো অনেকক্ষন ধরে। বিকেলে সুবির বাবু ফিরেও একচোট বকা দিলেন। কিন্তু আদরের সীমা নেই, যেন জামাই আদর। আপা আমাকে কি কি রান্না করে খাওয়াবে সেটা নিয়ে ব্যস্ত হয়ে গেল। বিকেলবেলা আপা আর্মিদের বৌদের নাকি একটা ক্লাব আছে সেখানে চলে গেল। পরে মালা আমাকে বললো, আপা ফিরবে সন্ধ্যার পর। আপা গেলেও সুবির বাবু বাসায় রইলেন। সেদিন আর মালাকে একা পেলামই না। তবে চোখে চোখে আমাদের অনেক কথা হয়ে গেল। এভাবে একটা দিন গেল। এতদিন পরে এলেও মালার মাঝে আমার জন্য ব্যাকুলতা দেখে ভালো লাগলো, যাক শেষ পর্যন্ত এত কষ্ট করে খুঁজে বের করা সার্থক হবে বলে মনে হচ্ছে।

সৌভাগ্য কাকে বলে! পরদিন সকালে অফিসে যাবার ঘণ্টাখানেক পর বাসায় ফিরে সুবির বাবু ঘোষণা দিলেন উনাকে এক্ষুনি বান্দরবান ছুটতে হবে, ওখানে কি যেন একটা ঝামেলা হয়েছে। আধা ঘন্টার মধ্যে নিচে গাড়ি এসে হর্ন দিল, উনি চলে গেলেন। যাবার আগে আমাকে অনুরোধ করে বলে গেলেন আমি যেন উনি না ফেরা পর্যন্ত না যাই। মনে মনে বললাম, আমিও তো সেটাই চাই।

মালা সকালে স্কুলে গেছে, আসবে ২টার দিকে। বাসায় আমি আর রেনু আপা একা, আপা রান্নাঘরে ব্যস্ত রান্না নিয়ে। রান্না শেষে আপা আমাকে গোসল করে নিতে বললো। আমি গোসল থেকে বের হলে আপা গেল গোসল করতে। এ ফ্ল্যাটে গেস্ট রুম আছে, কাজেই আপা বেডরুমে আর আমি গেস্টরুমে।

টেবিলে খাবার দেবার সময় খেয়াল করলাম, আপার লোভী চোখ আমাকে কেবল দেখছে আর দেখছে, যেন গিলে খাবে।

চেয়ারের পিছনে দাঁড়িয়ে আমার প্লেটে খাবার তুলে দেয়ার সময় আমার কাঁধে আপার নরম দুধের চাপ লাগলো, আমি কিছু না বোঝার ভান করে চালিয়ে গেলাম।

খাওয়া শেষ করে আপা আমাকে বললো, “তোর সাথে আমার কিছু কথা আছে।”

আমি ব্যস্ততার ভান করে বললাম, “আপা, আছি তো বেশ কিছুদিন, পরে শুনবো।”

আমি বুঝতে পেরেছিলাম, আপা আমাকে কি বলতে চায়।

আপা দাঁত দিয়ে নিচের ঠোঁট কামড়ালো, পরে বললো, “আচ্ছা ঠিক আছে, তুই রেস্ট নে, আমি একটু বেরুবো, একটু পরেই মালা চলে আসবে।”

আমি গেস্টরুমে ফিরে এলাম, আপা সেজেগুজে যাওয়ার সময় আমার সাথে দেখা করে দরজা লাগাতে বললো, আপাকে কেমন যেন বিষন্ন লাগছিল।
২টার পর পরই কলিং বেল বাজলো, দরজা খুলে দিতেই মালার হাসি মুখ দেখতে পেলাম, খুশিতে চমকাচ্ছে।

ঘরে ঢুকেই বললো, “বাবা আসেনি?”

ওর বাবার বান্দরবান যাওয়ার কথা ওকে জানালাম। শুনে আরো বেশি খুশি হলো, আমাকে জড়িয়ে ধরে নাচতে লাগলো, আর মুখে বিচিত্র শব্দ করতে লাগলো, “ওয়াও, ইয়া হু, ইয়া ইয়া উয়াউ হো…।” মালা বেশ লম্বা হয়েছে, ওর মাইগুলো বেশ বড় বড় হয়েছে, আমার বুকের নিচের দিকে এর মাইগুলো আমার শরীরের সাথে লেপ্টে গেলো, সেদিকে ও একটুও ভ্রুক্ষেপ করলো না। মনে হলো, মাঝের এই ৬টি বছর মালার কাছে ৬টি দিনের মত, মালা সেই আগের মতই আছে, একটুও বদলায়নি।

আমাকে চকাস চকাস করে অনেকগুলি চুমু দিয়ে বললো, “মামা, ওয়েট করো, আমি আসছি।”

মালা দৌড়ে ওর রুমে চলে গেল, স্কুল ড্রেস খুলে স্কার্ট আর টি-সার্ট পড়ে এলো।

এসেই ঘোষনা দিল, “মামা, চলো আজ আমরা একসাথে গোসল করবো।”

আমি অবাক হয়ে বললাম, “বলিস কি?”

মালা বললো, “হ্যাঁ, এটা আমার অনেক দিনের স্বপ্ন। তোমাকে নিয়ে আরো কতো যে স্বপ্ন আমার এই ছোট্ট বুকের মধ্যে গেঁথে রেখেছি সেটা তুমি কিভাবে বুঝবে? এতগুলি বছর পরে তুমি এলে, আর আমি তোমাকে প্রতিটা দিন মিস করেছি।”

মালা কাঁদতে লাগলো, চোখের পানি মুক্তো বিন্দুর মত ঝড়ে পড়ছিল। আমি আদর করে ওকে বুকে টেনে নিলাম। আদর করে দিলাম, চুমু দিলাম।

একটু স্থির হয়ে আবার আমাকে তাড়া দিল, “কই চলো, বললাম না দুজনে একসাথে গোসল করবো।”

আমি বললাম, “কিন্তু আমি তো গোসল করে নিয়েছি।”

মালা বললো, “তাতে কি, আবার করবে।”

আমি বললাম, “তুই সত্যিই একটুও বদলাসনি, কেবল বড়ই হয়েছিস।”

মালা হাসলো, বললো, “বড় তো হয়েছিই তোমার জন্য, তখন যা যা পারোনি, এখন সব উসুল করে নাও, তোমাকে সব উজাড় করে দেবো এটা আমার অনেক দিনের আশা।”
রতি রুমের সাথে বাথরুম থাকলেও গেস্টরুমের সাথে লাগোয়া কমন বাথরুমেই ঢুকলো মালা। এই বাথরুমে দুটি দরজা, একটা গেস্টরুমের ভিতরে, আরেকটা কড়িডোরে।

বাথরুমের দরজা লাগানোর কোন প্রয়োজন ছিল না, লাগালামও না। আমার খালি গা, পরনে কেবল লুঙ্গি। আমি বাথরুমে ঢোকামাত্র মালা এসে আমাকে জড়িয়ে ধরলো। মুখ উঁচু করে চকাস চকাস চুমু খেতে লাগলো। আমিও ওকে চুমু খেলাম আর দুজনেই আমাদের দুজনের জিভ চুষতে লাগলাম। আমার হাত ওর কাঁধ থেকে নিচে নেমে গেলো। এই প্রথমবারের মতো মালার ফুটন্ত গোলাপের মত মাই চেপে ধরলাম। যেন স্বর্গীয় কোন বস্তু, এতো নরম অথচ নিরেট, ডলতে লাগলাম আয়েশ করে।

মালা আগেই ওর টি-শার্ট আর স্কার্ট খুলে ফেলেছিল, গায়ে ছিল পাতলা কাপড়ের একটা শেমিজ (নিমা) আর পরনে একটা ইজের প্যান্ট। আমি টেনে হিঁচড়ে সেটাও খুলে ওর গা উলঙ্গ করে নিলাম। মাই দুটো যে কী সুন্দর তা বলে বোঝানো যাবেনা, পরিপূর্ণ গোল, সুডৌল, নিরেট, খাড়া। মাইয়ের মাথার কালো বৃত্তটা বেশ চওড়া, তবে নিপলগুলো তখনো জেগে ওঠেনি। আমি এক মাই মুখে নিয়ে চুষতে লাগলাম আর আরেকটা টিপতে লাগলাম। মালা গভীরভাবে শ্বাস ফেলছিল আর আআআহ আআআহ করে গোঙরাচ্ছিল।

আমার ধোনটা শক্ত লোহার রডে পরিনত হয়ে মালার পেটে খোঁচাচ্ছিল, মালা সেটা হাত দিয়ে চেপে ধরে টিপতেছিল। লুঙ্গিটা সমস্যা করতেছিল জন্য মালা আমার পেটের কাছ থেকে লুঙ্গির গিট খুলে দিয়ে আমাকে পুরো ন্যাংটো করে নিয়ে আমার ধোন টিপতে লাগলো। আমি নিচে হাঁটু গেড়ে বসে ওর ইলাস্টিক ব্যান্ডের ইজের প্যান্ট টেনে নিচে নামিয়ে দিয়ে ওকে পুরো ন্যাংটো করে নিলাম।

লম্বা লম্বা কোঁকড়ানো কালো কুচকুচে বালে পুরো গুদটা ঢাকা।

আমি বললাম, “কি রে মালা, বাল কামাস না?”

মালা হাসতে হাসতে বললো, “তোমার জন্য পুষে রেখেছি, পণ করেছিলাম, যতদিন তুমি না আসবে ততদিন কামাবো না, এখন তুমি এসেছো, তোমার জিনিস তুমি পরিষ্কার করে নাও।”

আমি উঠে ওকে রুমে নিয়ে গিয়ে বিছানায় চিৎ করে শুইয়ে দিয়ে আমার রেজর, শেভিং ফোম আর ছোট্ট কাঁচি আর চিরুনিটা বের করলাম। আগে ওর পাছার নিচে পুরনো খবরের কাগজ দিয়ে নিলাম, তারপর চিরুনি ধরে তার উপর দিয়ে কাঁচি দিয়ে লম্বা লম্বা বালগুলি ছেঁটে ছোট করে নিলাম, না হলে রেজরে কাটবে না। পরে ফোম লাগিয়ে রেজর দিয়ে সুন্দর করে সেভ করে দিলাম। জীবনে এই প্রথম কোন মেয়েমানুষের গুদ সেভ করলাম। ওখানে যে এতো কিছু আগে বুঝতে পারিনি। পুরো সেভ হয়ে গেলে তোয়ালে দিয়ে মুছে দিলাম।

চকচক করছিল সদ্য সেভ করা গুদটা, আমি হামলে পড়ে ওর গুদ চাটতে লাগলাম, রসে টইটুম্বুর গুদটা চেটে চেটে ব্যাথা করে দিলাম। যখন ক্লিটোরিসের ডগা চাটছিলাম তখন মালা শিউরে শিউরে উঠছিল। মালা আমার চুল খামচে ধরে আরো শক্তভাবে ওর গুদের সাথে আমার মুখ চেপে ধরছিল।

মালা আমাকে ঠেলে উঠে পড়লো, তারপর আমাকে টেনে বিছানায় তুলে শুইয়ে দিয়ে আমার ধোন মুখে নিয়ে চুষতে লাগলো। আমরা উল্টাপাল্টা হয়ে আমি ওর গুদ চাটছিলাম আর ও আমার ধোন চুষছিল। আমি একইসাথে ওর দুটো মাই চটকাচ্ছিলাম। আমাদের দুজনেরই চরম সময় আসতে বেশিক্ষণ লাগলো না। আগে মালার অর্গাজম হয়ে গেল, অর্গাজমের সময় মালা পাগলের মত আচরন করছিল, আসলে ওটাই ওর জীবনের প্রথম অর্গাজম। মৃগী রুগীর মত কোমড় বাঁকা করে উপর দিকে উঠিয়ে দিয়ে ঝাকিঁ মেরে মেরে রস খসালো মালা।
আমারও মাল আউট হওয়ার সময় হয়ে গেল।

মালাকে বলতেই বললো, “দাও তোমার ক্ষীর আমার মুখে দাও, কতদিন ওই মিস্টি ক্ষির খাইনা।”

আমি প্রায় আধ কাপ ঘন থকথকে মাল আউট করে দিলাম মালার মুখের মধ্যে।

মালা পুরোটা চেটে খেয়ে বললো, “তোমার ক্ষীর আরো মিস্টি হয়েছে মামা।”

আমার প্রচন্ড পেশাব চেপেছিল, তার আগেই মালা বললো, “আমার খুব পেশাব পেয়েছে।”

তখুনি আরেকটা দুষ্টামি আমার মাথায় এলো। মালাদের বাথরুমের প্যান মেঝে থেকে অনেক উঁচু। মালা দৌড়ে গিয়ে প্যানে বসে ছড়ছড় করে পেশাব করতে লাগলো। আমি গিয়ে ওর সামনে দাঁড়ালাম, ওর গুদের চেরা দিয়ে গরম পানির স্রোত তীব্র বেগে বেড়িয়ে আসছিল। আমি আমার ধোনটা হাত দিয়ে ধরে সোজা করে প্রচন্ড বেগে পেশাব করতে লাগলাম। আমি এমনভাবে ধোনটা ধরলাম যাতে আমার পেশাব গিয়ে মালার গুদ ধুয়ে দেয়। মালা খুব মজা পেয়ে খিলখিল করে হাসতে লাগলো।
মালা পানি দিয়ে ওর গুদ ধুয়ে নিল। ও যখন প্যান থেকে উঠে এগিয়ে এলো আমি দুই হাত বাড়িয়ে দিতেই মালা আমার বুকে ঝাঁপিয়ে পড়লো। আমি ওকে বুকের সাথে চেপে কোলে নিয়ে রুমে ফিরে এলাম। বিছানায় শুয়ে চটকাচটকি করতে করতে আমার ধোন আবার গরম হয়ে উঠলো, মালার গুদেও দেখলাম রস এসে গেছে।

আমি আঙুল ঢোকাতেই মালা আমার ধোন ঝাঁকিয়ে বললো, “উঁহু, আঙুল নয় এইটা নিবো।”

আমি সম্ভাব্য অনাকাঙ্খিত পরিস্থিতি এড়ানোর জন্য মালাকে বললাম, “সোনা, একটা সত্যি কথা বলবি? তুই কি এখনো কুমারী?”

মালা বড় বড় চোখ করে আমার দিকে তাকিয়ে বললো, “মামা, তুমি তোমার মালাকে চেনো না? তুমি ছাড়া ওই দুনিয়ায় আর কে আছে যে আমার কুমারীত্ব নেবে? আমি তো তোমার জন্যই সব জমিয়ে রেখেছি।”

আমি ওকে শক্ত করে জড়িয়ে ধরে চুমু খেলাম। তারপর উঠে গিয়ে জোর ভলিউমে মিউজিক ছেড়ে দিয়ে এসে মালার দুই পায়ের ফাকেঁ বসলাম।

মালার দুই পা হাঁটু থেকে ভাঁজ করে দুইদিকে ফাঁক করে ধরে আমি পজিশন নিলাম। এমনিতেই মালার গুদ রসে ভরা ছিল, তবুও আমি আরো খানিকটা থুতু দিয়ে বেশি করে পিছলা করে নিলাম। মালার গুদের ফুটো তখনো চাপা, আমার ধোনের মাথা গুদের ফুটোতে লাগিয়ে চাপ দিতেই পিছলে এদিক ওদিক চলে যাচ্ছিল। পরে আমি আমার বুড়ো আঙুল ওর ক্লিটোরিসের উপর শক্ত করে চেপে ধরে ধোনের মাথা আটকে রাখলাম আর সামনে ঝুঁকে কোমড়ে চাপ দিলাম। শক্ত ধোনের চাপে মালার গুদ ভিতরে দিকে খানিক বসে গেল, তারপরেই পকাৎ করে আমার ধোনের অনেকখানি মালার গুদের ফুটোর মধ্যে ঢুকে গেল। একই সাথে মালার গলা দিয়ে একটা চিৎকার বেড়িয়ে এলো, রক মিউজিকের সাথে সেটা মিশে গেল বলে বেশি জোরে শোনা গেল না।

মালার কুমারী পর্দা ছিঁড়ে গেছে। আমি একটুখানি বিরতি দিলাম, মালা কোমড় মোচড়াচ্ছিল।

আমি বললাম, “কি রে লাগলো?”

মালা কাতড়াতে কাতড়াতে বললো, “ভিষন, উঃ জ্বলে যাচ্ছে ভিতরে।”

কিছুক্ষণ অপেক্ষা করার পরে মালা শান্ত হয়ে এলো, জিজ্ঞেস করলাম ধোন চালাবো কিনা, মালা আমার চোখের দিকে তাকিয়ে হেসে দিল, তখনো ওর চোখের কোনায় পানি চিকচিক করছিল। তখন আমি প্রথমে ধীরে ধীরে আমার ধোন মালার গুদের মধ্যে চালাতে লাগলাম। মালার প্রচন্ড টাইট গুদের মধ্যে ধোন চালাতে প্রথম প্রথম একটু কষ্ট হলেও আস্তে আস্তে মজা চলে এলো। মালাও দারুনভাবে উপভোগ করতে লাগলো। আমাকে জড়িয়ে ধরে কোমড় নাচাতে লাগলো। আমি ওর মাই দুটো দুই হাতে চটকাতে লাগলাম আর কামড়াতে লাগলাম।

কিছুক্ষণ পর আমি ওকে আমার উপরে তুলে দিয়ে আমি চিৎ হয়ে শুলাম। মালা আনাড়ি হলেও একটু একটু করে উঠবস করতে লাগলো।

পরে আমি আমার দুই উরু দিয়ে ওর পাছার নিচে চাপ দিয়ে উঁচু করে ধরে পকাপক ধোন চালাতে লাগলাম। এভাবে প্রায় ৫ মিনিট চুদার পর আমি ওকে মেঝের উপরে দাঁড় করিয়ে ওর দুই হাতে খাট ধরিয়ে দিলাম। ওর শরীর সামনে নুয়ে রইলো, গুদের মোটা মোটা ঠোঁট দুটো দুই উরুর ফাঁক দিয়ে পিছন থেকে দারুন লাগছিল। আমি ওর কোমড় শক্ত করে চেপে ধরে পিছন দিক থেকে আমার ধোন ওর গুদের মধ্যে ঠেলে ঢুকিয়ে দিয়ে চুদতে লাগলাম। আমার উরুর সামনের দিক ওর পাছার সাথে লেগে থপাত থপাত শব্দ হচ্ছিল। আমি আরেকটু নুয়ে ওর ঝুলে থাকা মাই দুটো চেপে ধরে প্রচন্ড গতিতে চুদতে লাগলাম। ৩/৪ মিনিট পর ওভাবেই মালাকে শুধু বিছানার উপর ঘুড়িয়ে চিৎ করে দিয়ে ওর দুই পা দুই হাতের উপর ফাঁক করে ধরে দাঁড়িয়ে দাঁড়িয়ে চুদতে লাগলাম। মালা আআহ ওওওওহ মমমমমমমমমমমআআআ করতে করতে কোমড় উপর দিকে তুলে ওর গুদ আরো ফাঁক করে দিয়ে তড়পাতে তড়পাতে রস খসিয়ে দিল।

আমি ওকে আরো ২ মিনিট ধরে চুদলাম, ওর রস খসার পর গুদের ফুটো আরো পিছলা হয়েছিল, পরে আমি খপাখপ চুদতে চুদতে যখন মাল আউট হওয়ার সময় হলো তখন টান দিয়ে আমার ধোনটা মালার গুদ থেকে বের করে আনলাম। মালা লাফ দিয়ে উঠে আমার ধোনটা ওর মুখে নিয়ে নিল আর পুরো মালটুকু চেটে খেয়ে নিল।

পরে আমরা বাথরুমে গেলাম, শাওয়ার ছেড়ে দুজনে জড়াজড়ি করে ভিজলাম, পরে আমি মালার পুরো গায়ে সাবান মেখে দিলাম আর মালাও আমার পুরো শরীরে সাবান মেখে দিল। আমরা খুব মজা করে ন্যাংটো শরীরে দুজন দুজনকে জড়িয়ে ধরে গোসল করলাম।
সন্ধ্যার পর রেনু আপা এলে আমরা বসে বসে অনেক গল্প করলাম। রেনু আপা আমার দিকে কি রকম যেন লোভী চোখে তাকাচ্ছিল।

রাতে আমি শুয়ে পড়ার পরে আগের রাতে সুবীর বাবু আমার মশারী টাঙিয়ে দিয়েছিল। সেদিন রাতে সুবীর বাবু না থাকাতে আপাকে দেখলাম মশারী হাতে আমার বিছানার কাছে আসতে। আমি ঘুমের ভান করে মটকা মেরে পড়ে রইলাম। আপা প্রথমে লাইট অফ করে ডিমলাইট জ্বালালো। তারপর আমার পাশে খাটের উপর বসলো, আমার গালে, কপালে হাত রেখে আদর করলো, আমার ঠোটে চুমুও খেলো। আমার ধোন খাড়া হয়ে যাচ্ছিল, অনেক কষ্টে দুই উরুর নিচে চাপ দিয়ে রাখলাম। পরে আমার পেটের উপরে হাত রেখে কতক্ষণ বসে রইলো। ভয় পাচ্ছিলাম, পাছে আবার আমার ধোন না ধরে বসে। কিন্তু তা না করে কতক্ষণ বসে আপা কি যেন ভাবলো, তারপর উঠে মশারী টাঙিয়ে গুঁজে দিয়ে চলে গেল। যখন আমার গায়ের উপর দিয়ে উল্টোদিকে গুঁজছিল, আপার মাইয়ের চাপ আমার বুকের উপরে লাগছিল।

পরের দিন দুপুরেও মালাকে দুই বার চুদলাম, একসাথে গোসল করলাম। মালা আমাকে বললো, ওর এক বান্ধবী, বাবলী, ওর খুব ঘনিষ্ঠ, সে আমাকে দেখতে চায়, পরেরদিন সাথে করে নিয়ে আসবে। মনে মনে ভাবলাম, আরেকটা আনকোড়া কচি মাল বাগে পাওয়ার সম্ভাবনা, আমি অনুমতি দিলাম।

সেদিন রাতেও আপা আমার পাশে বিছানায় অনেক্ষন বসে রইলো। আমি জানতাম, আপা পরকীয়া করতে চায় আমার সাথে, আমাকে দিয়ে চুদিয়ে নিজের যৌবন জ্বালা মিটাতে চায় কিন্তু ও যে মালার মা। আমি যদি মালাকে বিয়ে করতাম, তাহলে রেনু আপা আমার শ্বাশুড়ি হতো। আমি কিছু বলতেও পারছিলাম না আপা কষ্ট পাবে বলে। আবার মেনে নিতেও কষ্ট হচ্ছিল। এর আগে আমি মা মেয়েকে একসাথে চুদিনি তা নয় কিন্তু আপাকে আমি অন্য চোখে দেখতাম, মনে মনে খুব শ্রদ্ধা করতাম।
পরদিন মালার সাথে তুলতুলে পুতুলের মত একটা মেয়ে এলো। মালা সোফায় বসে আমাকে জড়িয়ে ধরে বসলো। তারপর আমার সাথে মেয়েটার পরিচয় করিয়ে দিল, ও হলো বাবলী, মালার একমাত্র ঘনিষ্ঠ বান্ধবী, এক কথায় বলতে গেলে মালা আর বাবলী দুই দেহ কিন্তু এক প্রাণ।

মালা আমার কাঁধে মাথা রেখে বললো, “আমরা দুজন দুজনের জীবনের সব কথা জানি, একজন আরেকজনের কাছে কোন কথা গোপন করি না।”

আমাকে দেখিয়ে বললো, “বাবলী, এই হলো আমার মনি মামা, যার কথা তোকে সব সময় বলতাম।”

আমার চোখ বড় বড় হয়ে গেল, তার মানে এই মেয়েটা আমার আর মালার গোপন সম্পর্কের কথা সব জানে, সর্বনাশ। আমি মেয়েটাকে ভাল করে দেখলাম, ছোটখাটো গড়নের তুলতুলে একটা পুতুলের মত ফর্সা ফুটফুটে মেয়েটার চোখগুলো বেশ বড় বড় আর টানা টানা। চোখে মনে হয় কম দেখে, পুরু লেন্সের চশমা পড়া। মুখটা গোলগাল, ঠোঁটগুলো কমলার কোয়ার মত রসালো। মাই দুটো মাঝারী সাইজের, বিশেষ করে ওকে দেখলেই মনে হয় যে ওর শরীর মনে হয় মাংস দিয়ে নয় নরম মোম দিয়ে বানানো, একটু চাপ লাগলেই গলে যাবে। মুখে সবসময় একটা মিষ্টি হাসি লেগেই আছে।

অবাক চোখে আমার দিকে তাকিয়ে আছে কেন বুঝতে পারলাম না। মালার কথা শেষ হলে আমি বাবলীর দিকে তাকিয়ে হাসলাম, বাবলীও হাসলো কিন্তু লজ্জায় নুয়ে পড়লো।

সেটা দেখে মালা বললো, “মামা জানো, ও না খুব লাজুক, সেক্সের জন্য ভিতরে ভিতরে আকুলিবিকুলি করবে কিন্ত সেটা কাউকে মুখ ফুটে বলবে না। জীবনে আজ পর্যন্ত একটা ছেলেবন্ধু যোগাড় করতে পারলো না। আমি যখন তোমার আর আমার কথা সব বললাম, বাবলী লজ্জায় লাল হয়ে গেল আর বায়না ধরলো ও আমাদের ব্যাপারটা নিজের চোখে দেখবে, তারপর ভাল লাগলে তোমাকে একটু চেখে দেখবে হি হি হি হি হি। আমি রাজী হয়ে গেলাম, প্রিয় বান্ধবী বলে কথা। কি মামা, ওকে সন্তুষ্ট করতে পারবে না? হি হি হি।”

বাবলী এখনও লাল হয়ে গেছে, ওর মুখ আগুনের মত লাল দেখাচ্ছে, এতো লজ্জা! মাথা নিচু করে রয়েছে বাবলী, আসলে লজ্জায় আমাকে আর মুখ দেখাতে চাইছে না।

বাবলী ঝট করে উঠে বললো, “মালা আমি বাথরুমে যাব”

দৌড়ে বাথরুমে ঢুকে দরজা আটকে দিল। আমি বাকশূণ্য হয়ে বসে আছি, কী বুদ্ধি মেয়ে দুটোর! একটা মেয়ে আরেকটা মেয়েকে সাথে করে নিয়ে এসেছে আমার কাছে যেন আমি দুজনকেই একসাথে চুদি, এরকম মওকা কোথায় পাওয়া যাবে? স্বর্গে?

আমি হেসে বললাম, “তোরা দুটোই পাগল।”

মালা বললো, “মামা, তুমি তোমার ঘরে যাও, আমি ওকে নিয়ে আসছি।”

আমি রোবটের মত উঠে আমার ঘরে এসে অপেক্ষা করতে লাগলাম। এত আমার একটা লাভ হলো, কিছু সময় একা থাকতে পেরে আমি পরিস্থিতিটা নিয়ে ভাবতে পারলাম। তারপর সব দ্বিধা ঝেড়ে চুড়ান্ত সময়ের জন্য অপেক্ষা করতে লাগলাম।
প্রায় ২০/২৫ মিনিট পর বাবলীকে নিয়ে মালা আমার রুমে ঢুকলো।

আমি বিছানায় আধশোয়া হয়ে একটা পত্রিকার পাতা ওলটাচ্ছিলাম। মালা বাবলীকে সোফায় বসিয়ে দিয়ে আমার উপরে ঝাঁপিয়ে পড়লো। কোন লাজ-লজ্জার তোয়াক্কা না করে কাপড় চোপড় খুলে ন্যাংটো হলো। আমিও ঘরে তৃতীয় মানুষের উপস্থিতি ভুলে গিয়ে বরাবরের মত আয়েশ করে অনেকক্ষণ ধরে মালাকে চুদলাম।

চুদা শেষে বিছানায় বসে আমাকে জড়িয়ে ধরে বাবলীকে বিছানায় আসার জন্য ডাকলো। কিন্তু মেয়েটা সত্যিই খুব লাজুক, লজ্জায় লাল হয়ে বিছানায় আসতে অস্বীকৃতি জানালো। একটু পর বাবলী আবারো বাথরুমে যেতে চাইলো, মালাও বাবলীর সাথেই বাথরুমে ঢুকলো। আমরা দুজনেই তখনো পুরো ন্যাংটো।

বাথরুমে ঢোকার একটু পরেই আমি মালার গলার আওয়াজ পেলাম। ও খিলখিল করে হাসছে আর আমাকে ডাকছে, “মামা, জলদি এসো, মজার জিনিস দেখে যাও।”

বাথরুমের দরজা বন্ধ ছিল, আমি ঢুকতে পারলাম না, তখুনি দরজা খুলে মালা আগে বেড়িয়ে এলো আর তার পিছনে বাবলী। মালা কি একটা লাল কাপড় হাতে নিয়ে ছুটছে আর বাবলী সেটা কেড়ে নিতে চাইছে, দৌড়ানোর সময় মালার মাইগুলো কি সুন্দর থলথল করে দুলছে, আমার ধোন আবার খাড়া হয়ে উঠতে লাগলো।

হঠাৎ মালা সেই লাল কাপড়টা আমার দিকে ছুঁড়ে দিয়ে বললো, “মামা, ক্যাচ।”

আমি সেটা লুফে নিলাম, জিনিসটা আর কিছুই নয় মেয়েদের প্যান্টি।

মালা বাবলীকে চেপে ধরে রেখে আমাকে বললো, “মামা, ওটা বাবলীর, ভাল করে দেখো তো।”

বেশি পরখ করেত হলো না, হাতে ভেজা আর আঠালো কিছু লাগায় খেয়াল করে দেখলাম, প্যান্টির যে জায়গায় গুদ থাকে সেখানে আঠালো আর ভেজা জিনিস লেগে আছে। বুঝতে পারলাম, আমার আর মালার চুদাচুদি দেখে মালার গুদ দিয়ে বেরনো কামরসে প্যান্টিটা ভিজে আছে।

আমি প্যান্টিটা বাবলীকে ফিরিয়ে দিলাম। বাবলী সেটা তাড়াতাড়ি ওর স্কুলব্যাগে লুকিয়ে রাখলো। মালা আবারো বাবলীকে আমার কাছে যেতে বললো কিন্তু বাবলী আসতে চাইলো না।

পরে মালা একটু রাগ করে বললো, “তাহলে তুই এখন বাসায় যা, কাল তো স্কুল বন্ধ, সকাল করে চলে আসিস।”
রেনু আপা একটু একটু করে আমার দিকে ঝুঁকে আসছে। যতক্ষন বাসায় থাকে সারাক্ষন একটা মেক্সি পড়ে থাকে, ওড়না পড়ে না, ফলে ওর মাইগুলো মেক্সির উপর দিয়ে ফুলে থাকে আর থলথল করে দোলে। রাতে মশারী টাঙাতে এসে আদর করে, মশারী গোঁজার সময় ইচ্ছে করেই আমার বুকের সাথে, পেটের সাথে মাই ঘষায়। মনে হয় সেদিনের খুব বেশি দেরি নেই যেদিন আপা সরাসরি আমাকে চোদার জন্য চেপে ধরবে।

পরের দিন কি একটা বিশেষ দিবস বলে মালাদের স্কুল বন্ধ ছিল। এদিকে রেনু আপা বললো যে ওদের ক্লাব থেকে মীনাবাজারের আয়োজন করেছে বলে আগামী এক সপ্তাহ খুব ব্যস্ত থাকতে হবে, কারণ রেনু আপা আয়োজকদের মধ্যে একজন। তাই খুব ভোরে উঠে আমাদের জন্য নাস্তা আর দুপুরের রান্না সেরে রেখে আপা ৯টার মধ্যে বেড়িয়ে গেলো।

মালা তখনো ঘুমাচ্ছে, আমি গিয়ে মালার পাশে শুয়ে পড়লাম, ওর গায়ে সুন্দর গন্ধ, জেগে উঠতে সময় লাগলো না। মালাকে জাগিয়ে মন ভরে একবার চুদলাম। তারপর আমরা নাস্তা করলাম।

সাড়ে ১১টার দিকে বাবলী এলো। মালা সরাসরি ওকে আমার রুমে নিয়ে এলো আর ওকে বললো, “আজ তোকে ছাড়ছি না, আজ তোর লজ্জা ভাঙাবো, আজ তোকে মামার সাথে খেলতেই হবে।”

আমি আর মালা দুজনেই পুরো ন্যাংটো হয়ে চাটাচাটি শুরু করলাম। কিন্তু বাবলী লজ্জায় লাল হয়ে রইলো, কিছুতেই আমাদের সাথে যোগ দিল না, তবে লোভী চোখে দেখতে লাগলো। মনে মনে আমি এই তুলতুলে পুতুলের মতো আনকোড়া মেয়েটাকে চোদার জন্য ব্যাকুল হয়ে উঠলাম।

চুদাচুদি শেষ হওয়ার পর মালা বাবলীকেও আমাদের সাথে গোসল করার জন্য ডাকলো, এবারে বাবলী রাজি হলো। আমরা তিনজনে গোসল করলাম, আমরা ন্যাংটো থাকলেও বাবলী পুরো ন্যাংটো হলো না, শেমিজ আর প্যান্টি খুললো না ও। তবে এই প্রথমবারের মত ওর তুলতুলে শরীরটা জড়িয়ে ধরার সুযোগ পেলাম। মালা ওকে জোর করে আমার দিকে ঠেলে দিলে আমি ওকে জরিয়ে ধরে চাপ দিলাম। ও আমার দিকে পিঠ দিয়ে থাকলো, আমি ওর মাই ধরার চেষ্টা করলাম কিন্তু কনুই দিয়ে মাই দুটো চেপে রাখলো বলে ধরতে পারলাম না।

আমার ধোন শক্ত লোহার ডান্ডায় পরিনত হয়েছিল, আমি ওর পাছার সাথে ধোন ঠেকিয়ে কিছুক্ষন চাপলাম। ভেবেছিলাম, ও হয়তো একটু ধরবে কিন্তু ধরলো না, পিছলে সরে গেল।
দুপুরে খাওয়ার পর আমরা একটু গল্পগুজব করলাম।

বাবলীর খুব ঘুম পাচ্ছিল, মালা আমার বিছানাতেই ঘুমাতে বললো কিন্তু বাবলী রাজি হলো না। ওরা মালার রুমে ঘুমাতে গেল।

বাবলীর উপর আমার এতো লোভ হলো যে আমি ওদের রুমে না গিয়ে পারলাম না, দুজনেই নাক ডাকিয়ে ঘুমাচ্ছিল। আমি ওদের ঘরে ঢুকলাম। বাবলী দেয়ালের পাশে শুয়েছিল, ওর এক পা উপর দিকে তুলে হাঁটু দেয়ালের ঠেস দিয়ে রেখেছিল। ফলে ওর স্কার্ট ফাঁক হয়ে ফর্সা ফুটফুটে উরুর অনেকখানি দেখা যাচ্ছিল। তখন আমার মনে পড়লো, বাবলী গোসল করার সময় ওর প্যান্টি শেমিজ সব ভিজিয়ে ফেলেছে, সুতরাং ওর স্কার্টের নিচে কিছু না থাকারই কথা। লোভটা আর সামলাতে পারলাম না, এগিয়ে গিয়ে স্কার্টের উপরের দিকটা চিমটি দিয়ে ধরে আস্তে আস্তে উঁচু করলাম। আমার বুকের মধ্যে হাতুড়ির ঘা পড়ছিল। সত্যি ওর স্কার্টের নিচে কিছু নেই, ছোটখাটো সাইজের গুদটা ফর্সা ফুটফুটে, ফুরফুরে ছড়ানো ছিটানো কয়েকগাছি বাল চোখে পড়লো। দুটি মোট মোটা ঠোঁটের মাঝে একটা গভীর চেরা দুই উরুর মাঝ দিয়ে নেমে গেছে নীচে। গুদের ঠোঁট দুটো ফুলকো লুচির মতো ফোলা, লালচে আভা সেখানে।
গুদের চেরার মধ্যে ক্লিটোরিসের দেখা পাওয়া গেল না, ভিতরে লুকনো আছে। আমি স্কার্টের ঘের টেনে পেটের উপরে উঠিয়ে পুরো গুদ আলগা করে রাখলাম। তারপর নিচে ছড়ানো পা ধরে একপাশে টেনে ফাঁক করলাম। পাতলা ফুরফুরে বালের জন্য গুদটা দেখতে আরো বেশি মনোহর লাগছিল। বাবলীর গুদ দেখে মনে হলো এই গুদ যদি একটু চাটতে না পারি, যদি একটু চুদতে না পারি তাহলে আমি হয়তো মরেই যাবো। আমি গুদের কাছে আমার মুখ নিয়ে গেলাম, একটা মিষ্টি সুগন্ধ আমার নাকে লাগলো। জিভটা না ঠেকিয়ে পারলাম না, আলতো করে গুদের নিচ থেকে উপর দিকে একটা চাটা দিলাম। তারপর জিভটা শক্ত করে গুদের চেরার মধ্যে ঢুকিয়ে দিলাম, ক্লিটোরিসের নরম মাংস জিভের ডগায় অনুভব করলাম। জিভটা একটু নিচে নিতেই গুদের ফুটোতে ঢুকলো। আমি ঠেলে আরেকটু ভিতরে ঢুকিয়ে দিলাম, হালকা নোনতা স্বাদ।

যখন আমি আমার শক্ত জিভটা বাবলীর গুদের ফুটোর মধ্যে থেকে টেনে ক্লিটোরিসে চাপ দিলাম তখন একটা লম্বা শ্বাস নিয়ে বাবলী নড়ে উঠলো কিন্তু ঘুম থেকে জাগলো না। তারপর আমি ওর গায়ের শার্টের বোতাম খুলে ওর মাইগুলো বের করলাম, কি অপূর্ব দেখতে, গোল শালগমের মতো দুটো মাই, নিপলের গোড়ায় কালোর পরিবর্তে খয়েরী বৃত্ত, ছোট্ট মটর দানার মত নিপল। আমি মাই দুটো দুহাতে ধরে আলতো টিপ দিলাম, কী নরম তুলতুলে! তারপর দুটো মাই চুষলাম, চাটলাম। ওর গুদের দুই ঠোঁট ফাঁক করে দেখলাম, কি অপূর্ব ক্লিটোরিস, ভেজা, লাল, ফুটোটা যেন গিলে খেতে চাইছে।

বাবলীর গুদ আর দুধ দেখে এতোটাই উত্তেজিত হয়ে পড়লাম যে শেষ পর্যন্ত থাকতে না পেরে মালাকে ডেকে তুলে এর মাই আর গুদ চেটে চুদতে শুরু করলাম। মালাকে চোদার ফলে বিছানাটা খুব নড়ছিল, বাবলী জেগে গেল। আমি আগেই ওর শার্টের বোতাম লাগিয়ে দিয়েছিলাম।

বাবলী জেগে দেখলো, ওর পাশে শুয়ে আমি মালাকে চুদছি। মালাও টের পেলো যে বাবলী জেগে গেছে। তখন হঠাৎ করেই মালা আমার একটা হাত টেনে নিয়ে বাবলীর মাইয়ের উপরে রাখলো, প্রথমে বাবলী একটু আপত্তি করলেও পরে মাই টিপতে দিল। আমি আবার ওর শার্টের বোতাম খুলে মাই দুটো বের করে নিয়ে চুষতে লাগলাম আর টিপতে লাগলাম।

প্রায় ২০ মিনিট পর মালা রস খসাবার পর বাবলীকে ডাকলো আমার সাথে চুদাচুদি করার জন্য। কিন্তু বাবলী আবারো অস্বীকার করলো।

অগত্যা আমি বাবলীর মাই চুষে আর টিপেই সন্তুষ্ট থাকলাম। পরে মালা বাবলীর সামনেই আমার ধোন চুষে মাল বের করে সবটুকু মাল চেটেপুটে খেয়ে নিল।

বাবলী নাক সিটকালো দেখে মালা বললো, “ক্ষিরের চেয়েও মিস্টি, একবার খেয়ে দেখিস, জীবনে ভুলতে পারবি না।”
সন্ধ্যার দিকে রেনু আপা এলো, জানালো আজ কাজের চাপ কম ছিলো বলে তাড়াতাড়ি আসতে পেরেছে। বাবলী রেনু আপার জন্যই অপেক্ষা করছিলো। আসলে ওর আম্মু আমার সৌজন্যে রাতে খাওয়া দাওয়ার আয়োজন করেছেন, তাই ও দাওয়াত দিতে এসেছে কিন্তু রেনু আপার অনুমতি ছাড়া তো আর যাওয়া যাবে না। এমনিতে আমার কোথাও যাওয়া হচ্ছে না দেখে আপা রাজী হয়ে গেলো।

আমরা তিনজনে একটা রিক্সা নিলাম। আধা ঘন্টার পথ, পৌঁছে আমার চোখ কপালে উঠে গেল। বাবলীর বাবার নিজের বাড়ি, বাড়ি তো নয় যেন রাজপ্রাসাদ। বাবলীর বাবা একজন প্রতিষ্ঠিত ব্যবসায়ী, তবে তার দেখা খুব একটা পাওয়া যায় না। সারা বছর বিভিন্ন ব্যবসায়িক কাজে পৃথিবীর বিভিন্ন দেশে ঘুরে বেড়ায়। সে কারনে বাবলী ওর বাবার আদর থেকে বঞ্ছিত। নিচতলায় গ্যারেজ, দোতলায় বিভিন্ন কাজের লোক, দারোয়ান, ড্রাইভার থাকে। তিনতলায় বাবলীদের ড্রইং রুম, গেস্ট রুম, কিচেন আর বাবলীর বেডরুম আর ওর আম্মা থাকেন চারতলায়।

একজন বুয়া দরজা খুলে দিলে বাবলী আমাকে ড্রইং রুমে বসালো আর বুয়াকে বললো ওর আম্মুকে খবর দিতে। একটু পর বাবলীর আম্মু এসে ড্রইং রুমে ঢুকলো। মহিলাকে দেখেই তো আমার পালস রেট বেড়ে গেল। অসম্ভব সুন্দরী, পরীর মত একটা মেয়ে। মেয়ে বললাম এই কারনে যে, তাকে দেখে মনেই হয় না যে বাবলীর বয়সী তার একটা মেয়ে আছে, দেখে কেউ বলবে না যে এই মহিলার বয়স কুড়ি’র উপরে হবে। রূপের আগুনে যেন জ্বলছে, দারুন চটপটে আর স্মার্ট। এসেই আমার দিকে হাত বাড়িয়ে দিল হ্যান্ডসেক করার জন্য।

বললো, “হাই ইয়াংম্যান, আমি শায়লা।”

হাতটা আলতো করে ধরলাম যেন মোমের তৈরী, জোরে চাপ দিলে ভেঙে যাবে। আসলে এর আগে কখনো মেয়েদের সাথে হ্যান্ডসেক করিনি তো তাই, তাছাড়া শায়লা এতো সুন্দরী যে শরীরে কাঁপন এসে যায়। মহিলা এক দৃষ্টিতে আমার পা থেকে মাথার চুল পর্যন্ত ভাল করে দেখলো, দাঁত দিয়ে নিচের ঠোঁট কামড়াচ্ছিল, লক্ষনটা ভাল নয়।

বাবলী ওর আম্মুকে বলল, “তোমরা গল্প করো, আমি রুমে গেলাম।”

বাবলী মালাকে নিয়ে চলে গেল। শায়লা এগিয়ে এসে আমার কাছে সোফায় বসলো। অবলীলায় আমার কাঁধে একটা হাত রেখে বললো, “হ্যালো ইয়াংম্যান, তুমি তো বেশ হ্যান্ডসাম, লজ্জা পাচ্ছো কেন? তোমাকে আমার বেশ লেগেছে, ঠিক আছে আমরা পরে একসময় আলাপ করবো, টিভি দেখো, আমি আসছি।”

মহিলার শরীর থেকে অদ্ভুত একরকম মন মাতাল করা সুগন্ধ ভেসে আসছিল। আমি টিভি দেখলাম, কয়েকটা বিদেশী ফ্যাশন ম্যাগাজিন ছিল, সুন্দর সুন্দর হাফ ন্যাংটো মেয়েদের ছবিতে ভরা, ভয়ে ভয়ে দুয়েক পাতা দেখলাম।

সাড়ে ৮টার দিকে খাবার দেয়া হলো। শায়লা নিজে হাতে খাবার তুলে তুলে খাওয়ালো। অপ্রত্যাশিতভাবে শায়লা আমাকে খাবার তুলে দিতে এসে আমার শরীরের সাথে বারবার ওর শরীর ঘষাচ্ছিল।

সাড়ে ৯টার দিকে বাবলীর কাছ থেকে বিদায় নিলাম। আমার একটু বাথরুম চেপেছিল, বেড়িয়ে দেখি মালা আর বাবলী নিচে নেমে গেছে, শায়লা দরজার কাছে দাঁড়ানো। আমাকে দেখে এগিয়ে এলো, তখন সেখানে আমি আর শায়লা ছাড়া আর কেউ নেই। শায়লা আমার সামনে একেবারে গা ঘেঁষে দাঁড়িয়ে আমাকে কিছু বুঝতে না দিয়ে হঠাৎ আমার সার্টের সামনের গলার কাছে ধরে টান দিয়ে আমাকে দুটো চুমু দিল আর আমার বুক পকেটে কি যেন গুঁজে দিল।

বললো, “আবার এসো, আমি অপেক্ষা করবো।”

আমি সিঁড়ি দিয়ে নিচে নামতে নামতে পকেট থেকে বের করে দেখি তিনটে ৫০০ টাকার নোট! খুশিতে আমার নাচতে ইচ্ছে করছিল। মালা আর বাবলীর কাছে ব্যাপারটা গোপন করে গেলাম। বাবলী গেট পর্যন্ত আমাদের এগিয়ে দিয়ে বিদায় নিল, আমি দ্রুত একটা ট্যাক্সি ডেকে মালাকে নিয়ে উঠে পড়লাম, আমার পকেটে তখন অনেক টাকা!
পরদিন স্কুল থেকে ফিরে মালা জানালো যে বাবলী ওর চশমা ফেলে গেছে, চশমা ছাড়া বাবলী পড়তে পারে না, তাই আমাকে অনুরোধ করে মালাকে বলে দিয়েছে, আমি যেন এর চশমাটা পৌঁছে দেই। আমার সন্দেহ হলো, আসলে চশমা-টশমা কিছু নয়, বাবলী আমাকে কিছু বলতে চায় যেটা মালার উপস্থিতিতে বলতে পারেনি তাই আমাকে একাকী চাচ্ছে।

সারা বিকেল জুড়ে মালাকে দুই বার চুদলাম। সন্ধ্যায় রেনু আপা ফিরলে আমি চশমা নিয়ে বাবলীদের বাসায় গেলাম। বাবলীর মা শায়লা আমাকে আন্তরিকভাবে আপ্যায়ন করলো। পরে সে আমাকে রাতের খাবার খেয়ে যেতে অনুরোধ করলে আমি রাজি হলাম। ড্রইং রুমে বসে বসে টিভি দেখছিলাম, শায়লা এসে বাবলীকে জানালো যে ওর বাবা ফোন করেছে ওর সাথে কথা বলতে চাচ্ছে।

বাবলী চলে গেলে শায়লা আমার কাছে বসলো। ওর একটা হাত আমার উরুর উপরে রেখে আলতো চাপ দিল।

বললো, “তুমি খুবই হ্যান্ডসাম আর বেশ শক্তসামর্থ, তোমাকে আমার খুব ভাল লেগেছে। আমার স্বামী মাসের পর মাস ব্যবসার কাজে দেশ-বিদেশ ঘুরে বেড়ায়, বছরে বড় জোর ৫/৭ দিন ওকে আমি পাই কি না সন্দেহ। এখন তুমিই ভাবো আমার দিনগুলো কিভাবে কাটছে। আমি বড্ড একা, ভীষন একা, আমার বাইরে কোথাও যেতে ভালো লাগে না, এমন কি কেনাকাটাও করি না, কিন্তু আমার টাকার কোন অভাব নেই। প্রচুর টাকা আছে কিন্তু আমার কোন সুখ নেই, কোন আনন্দ নেই। মনি, তুমি তো শিক্ষিত, বুদ্ধিমান ছেলে, তুমি নিশ্চয়ই বুঝতে পারছো, আমার বয়সী একটা মেয়ে যার স্বামী থেকেও নেই, তার দিনগুলি কিভাবে কাটে?”

শায়লার হাত ক্রমে ক্রমে আমার কুঁচকির দিকে সরে এলো, আরেক হাতে আমার কোমড় জড়িয়ে ধরে আমার পাঁজরের সাথে মাইয়ের সরম স্পর্শ লাগিয়ে বললো, “প্লিজ, আমাকে একটু সঙ্গ দাও, আমি তোমাকে অনেক টাকা দিবো, যা দিয়ে তুমি তোমার মেয়ে বন্ধুদের সাথে চুটিয়ে মৌজ করতে পারবে, আমি তাতে বাধ দিবো না। তুমি শুধু সপ্তাহে একটা দিন আমার কাছে আসবে আর একটা রাত আমার সাথে থাকবে, এর বেশি আমার লাগবে না, বলনা থাকবে আমার সাথে?”

শায়লা আমার মুখ ধরে ওর দিকে ঘুড়িয়ে নিয়ে চকাস চকাস করে চুমু খেতে লাগলো, ওর সারা শরীরে এমন কি মুখের মধ্যেও সুগন্ধ।

হঠাৎ করেই বাবলী এসে পড়ায় শায়লা আমাকে ছেড়ে উঠে চলে গেল। রাতে খেতে বসলে সেদিনও শায়লা খাবার তুলে দিল আর সব সময় আমার গায়ের সাথে মাই ঘষালো। শায়লা আমাকে পরিষ্কারভাবে ওকে চুদার ইঙ্গিত দিলো, আমারও প্রত্যাখ্যান করার কোন কারনই ছিল না, কিন্তু বাবলীকে জানিয়ে ওর মা’কে চুদতে মন সায় দিচ্ছিল না।

খাবার টেবিলেই শায়লা ঘোষনা দিল, আমার আর রাতে মালাদের বাসায় ফেরা হচ্ছে না, রাতে ওখানেই থেকে যেতে হবে। আমি পরিষ্কার বুঝতে পারলাম, ফেঁসে গেছি, আজ রাতে শায়লাকে না চুদে আমার রেহাই নেই।

কিছুক্ষণ পর বাবলী আমাকে একা পেয়ে আড়ালে টেনে নিয়ে গেল।

দুই হাতে আমাকে জড়িয়ে ধরে বলল, “মনি মামা, যদি তুমি আমাকে চাও তাহলে পালাও। আমার মা একটা বেশ্যা, ও আজ রাতে তোমাকে নিয়ে মজা লুটতে চাচ্ছে।”

আমি জানতে চাইলাম, কিভাবে পালাবো। বাবলী জানালো, ওর মা ইতিমধ্যে বাইরের দরজায় তালা লাগিয়ে দিয়েছে। বাবলী আমাকে টানতে টানতে বাসার পিছন দিকে নিয়ে গেল।

তারপর একটা গোপন দরজা খুলে দিয়ে বললো, “যাও, দৌড়াও, পালাও।”

আমাকে বের করে দিয়ে দরজা লাগানোর পর পরই আমি শায়লার গলার আওয়াজ পেলাম, “ওকে বের করে দিলি কেন? কুত্তি, ওকে তোর মনে ধরেছে না? ভালবেসেছিস? খানকীর বাচ্চা…”

আমি নিচে নেমে যাচ্ছি, হঠাৎ চটাস চটাস কয়েকটা শব্দ, বাবলীকে মারছে শায়লা। নিচে নেমে এসেছি তখন খটাং করে দরজা খুলে গেল, আমি অন্ধকারে গা ঢাকা দিলাম। পরে লুকিয়ে বাসায় ফিরে এলাম।
পরের দিন। মালা স্কুলে চলে গেলে রেনু আপা সেজেগুজে প্রস্তুত হলো, রেনু আপা ইদানিং আমার প্রতি বেশি ঝুঁকে পড়ছে। সাজগোজ করার সময় বুকে কাপড় থাকে না, বড় বড় দুধগুলো থলথল করে কাঁপে। দেখে আমার বুকের মধ্যেও কাঁপে কিন্তু উপায় নেই। রেনু আপা আমাকে ওর হারের হুক লাগিয়ে দিতে বলল। আয়নার সামনে দাঁড়িয়ে, আয়নার ভিতরে আমি ওকে দেখতে পাচ্ছিলাম, তখনো শাড়ি পড়েনি, শুধু ব্লাউজ আর পেটিকোট। ব্লাউজের সামনে অনেকখানি নিচু করে কাটা, ওর দুধের খাঁজ অনেক গভির পর্যন্ত দেখা যাচ্ছিল। পরে শাড়ি পড়ে বেড়িয়ে গেল।

আমি সময় কাটানোর উপায় খুঁজছিলাম, হঠাৎ বেল বাজলো, খুব অবাক হলাম, এখন কে? সুবীর সাহেব কি ফিরে এলো?

দুরু দুরু বুকে দরজা খুলে হতবাক হয়ে গেলাম, স্কুল ড্রেসে বাবলী, ওকে খুব মনমরা আর বিষন্ন লাগছিল। আমি ওকে ভিতরে নিয়ে এসে আমার বেডে বসালাম। ওর গালে লাল কালসিটে পড়ে আছে, কাল রাতে ওর মায়ের দেয়া চড়-থাপ্পড়ের সাক্ষী।

আমি আলতো করে ওর গালে আমার হাত বুলিয়ে আদর করে বললাম, “আমার জন্য তোমার মায়ের কাছে তোমাকে মার খেতে হলো।”

ওর দুই চোখ দিয়ে কয়েক ফোঁটা পানি চিবুক বেয়ে গড়িয়ে পড়লো, হঠাৎ আমাকে দুই হাতে জড়িয়ে ধরে বললো, “মার খেয়েছি, তাতে কি? তোমার জন্যই তো খেয়েছি, সত্যি বলছি আমি একটুও ব্যাথা পাই নাই। বিশ্বাস করো মনি মামা, আমি তোমাকে খুব ভালবাসি।”

ফুঁপিয়ে ফুঁপিয়ে কথাগুলো বললো বাবলী।

আমি ওর মাথা টেনে আমার বুকের সাথে চেপে ধরে বললাম, “আমি জানি সেটা, আচ্ছা ঠিক আছে, কিন্তু তুমি এমন করে কাঁদলে যে আমি বড্ড কষ্ট পাচ্ছি।”

বাবলী ওর মুখ আমার বুকের সাথে ঘষাতে লাগলো। আমি দুই হাতে ওর মুখটা ধরে উঁচু করে তুললাম, ওর চুখ দুটো বন্ধ। আমি মুখ নামিয়ে ওর ঠোঁটে গভিরভাবে চুমু দিলাম, সাড়া দিল বাবলী। ঠোঁট ফাঁক করে আমার জিভ ঢোকানোর রাস্তা করে দিল, চুক চুক করে আমার জিভটা চুষতে লাগলো। বুঝতে পারলাম, বাবলী আজ সবরকম মানসিক প্রস্তুতি নিয়েই আমার কাছে এসেছে।

আমি ওর কাঁধ ধরলাম, দুই হাতে ওর পিঠে চাপ দিয়ে আমার বুকের সাথে ওকে পিষে ধরলাম। ওর সরম কোমল পেলব মাইগুলো আমার বুকের সাথে চিড়ে চ্যাপ্টা হতে লাগলো। আমি ওকে শক্ত করে বুকে জড়িয়ে ওর সারা মুখ চেটে চুষে পাগল করে তুললাম। অবশেষে আমি ওর ইউনিফর্ম খুলতে শুরু করলাম। শার্টটা খুলে দিয়ে নিমাটাও খুলে ফেললাম। কি নিটোল আর নরম তুলতুলে মাইগুলো। দুই হাতে দুটো ধরে টিপতে লাগলাম, বাবলী একটু একটু ব্যাথা পেয়ে কোঁকাচ্ছিল। কতক্ষণ টেপার পর মাইগুলো চুষতে লাগলাম, কামড়ালাম, লাল হয়ে গেল মাই দুটো।
শেষ পর্যন্ত আমি ওর স্কার্ট খুলে প্যান্টিটাও খুলে ফেললাম। এই সেই আহামরি গুদ, যেটা আমি আগের দিন চুরি করে দেখেছিলাম, ঠিক তেমনি আছে। আমি ওকে চিৎ করে শুইয়ে অপূর্ব সুন্দর গুদটা চাটতে লাগলাম, গুদ তো নয়, যেন একদলা মাখন। আমার চাটার ফলে বাবলী কেঁপে কেঁপে উঠছিল। যখন ওর গুদের চেরায় জিভ ঢোকালাম আর ক্লিটোরিসটা জিভের ডগা দিয়ে ঘষে দিতে লাগলাম, গলগল করে ওর গুদের ফুটো দিয়ে রস গড়াতে লাগলো।

আমি ওর গুদের ফুটোতে জিভ ঢোকালাম, যেন একদলা মাখনের মধ্যে আমার জিভ ডেবে গেল। কি রসালো আর কি নরম, আহা! আমি যখন বাবলীর গুদের ফুটোর মধ্যে আমার জিভ নাড়াচ্ছিলাম আর ক্লিটোরিসটা আঙুল দিয়ে ডলে দিচ্ছিলাম তখনই ও কেমন যেন দড়পাতে লাগলো আর ওহ ওহ ওহ শব্দ করতে করতে মৃগী রুগির মত কাঁপতে কাঁপতে রস খসিয়ে দিল।

পরে আমি ওকে আমার ধোনটা চুষে দেওয়ার জন্য বললাম। প্রথমে নিতে চাইলো না কিন্তু পরে কি মনে করে নিজেই মুখে নিয়ে চুষতে লাগলো, সুন্দর করে ধোনের মাথার চারদিকে জিভ ঘোড়াতে লাগলো। আমি উল্টো দিকে শুয়ে ওর গুদ চাটতে লাগলাম, যখন ওর গুদটা আবার রসে ভরে উঠতে লাগলো

তখন আমি সোফার উপরে ওকে চিৎ করে ফেলে ওর গুদের ফুটোতে আমার ধোনের মাথা ঠেকিয়ে চাপ দিতে লাগলাম।

মনে হলো সত্যি সত্যিই মাখনের দলার মধ্যে আমার ধোনটা ঢুকে যাচ্ছে। বেশ কয়েকবার আগুপিছু করে পুরো ধোনটা ঢুকিয়ে দিয়ে তাকিয়ে দেখি কি সুন্দর একটা ভুদার মোটা ঠোঁট আমার ধোনের গোড়া ঘিড়ে রেখেছে। বাবলীর সতিপর্দা কোন ঝামেলা করলো না। এমনটি মাঝে মাঝে হয়, কুমারী থাকলেও কারো কারো সতিপর্দার ফুটো বড় থাকে বা পাতলা থাকে, ফাটাতে সমস্যা হয় না, তবুও আমি ওর ফর্সা ফুটফুটে গুদের নিচের দিকে হালকা রক্তের আভা দেখলাম। উপর দিকে ওর পা তুলে চাপ দিতেই যেন গোল হয়ে গেল, গুদটা উপরে উঠে এলো, রামচোদন শুরু করলাম। এরকম একটা গুদ চুদার মজাই আলাদা। পকাৎ পকাৎ করে শব্দ হচ্ছিল।

কিছুক্ষন পর ওকে বিছানায় নিয়ে শুইয়ে দিয়ে দাঁড়িয়ে দাঁড়িয়ে চুদতে লাগলাম, এভাবে চুদলে ধোনটা কিভাবে গুদের মধ্যে আসা যাওয়া করছে সেটা দেখা যায়। ওর মাই দুটো লাল টকটকে হয়ে গেছে টিপার কারনে। প্রায় ২০ মিনিট চুদার পরে বাবলী আবার রস খসালো। আমিও আর মাল আটতে রাখতে পারছিলাম না, ওর সুন্দর মাই দুটো মাল দিয়ে ভিজিয়ে দিলাম। বাবলীর সব বিষন্নতা উবে গেল, খুশীতে ঝলমল করছিল ও।

দুপুর পর্যন্ত আরো একবার চুদলাম ওকে, মালা আসার আগেই ও চলে গেল।
এবারে আপা নিজে আমাকে গ্রাস করলো

প্রতিদিন বিকেলে মালাকে কম করে হলেও ২ বার চুদি, সেদিন ১ বারের বেশি চুদতে ইচ্ছে করলো না, যদিও মালা আরেকবার চুদার জন্য ঘুরঘুর করছিল, আমি পাত্তা দিলাম না।

রাতে রেনু আপার কি যে হলো আমি বলতে পারবো না কিন্তু সে যেটা করলো তা আমাকে ঐ রাতটা সারা জীবনের মত স্মরনীয় করে দিলো। অন্যান্য দিনে রাতে মশারী টাঙানোর জন্য এসে আপা যদিও মশারী গোঁজার সময় আমাকে হালকা ছোঁয়াছুঁয়ি করে চলে যায়, আর মশারী গোঁজে মেঝেতে দাঁড়িয়ে। কিন্তু সেদিন রাতে মশারী টাঙানোর পর আপা খাটের উপরে উঠে হাঁটুতে ভর দিয়ে আমার গায়ের উপর দিয়ে মশারী গুঁজতে লাগলো। আমি কাত হয়ে শুয়েছিলাম, আপা মশারী গুঁজতে অনেক সময় নিচ্ছিল, কি করছিল বুঝতে পারছিলাম না, কারন উল্টো দিকটা ছিল আমার পিঠের দিক। যথারীতি আপার ভারী নরম মাইগুলো আমার হাতের সাথে ঘষা লাগছিল, চাপটা অন্যদিনের তুলনায় বেশি, আমি বৃঝতে পারছিলাম, আপার মেক্সির নিচে আর কিছু নেই।

কিছুক্ষণ পর মনে হল আপার সমস্ত শক্তি যেন ফুরিয়ে গেছে, এমনভাবে আপা আমার গায়ের উপর নেতিয়ে পড়লো। আপার মাইগুলো আমার গায়ের সাথে লেপ্টে গেল। আমি ঘুমের ভান করে মটকা মেরে পড়ে রইলাম। আপা আমার বুকে হাত দিয়ে আদর করতে লাগলো। তারপর মুখ এগিয়ে এনে আমার গালে চুমু দিল। পরে সোজা হয়ে বসে কি যেন ভাবলো কয়েক মিনিট, আমি সবই দেখছিলাম। কিছুক্ষন পর আমার কাঁধে হাত দিয়ে একটু একটু করে ঠেলা দিয়ে আমাকে চিৎ করে নিল। আমি ওকে কিছু বুঝতে না দিয়ে আমার শরীরটা চিৎ করলেও কোমড়টা তখনও বাঁকা করেই রাখলাম। আপা আমার বুকে হাত বুলাতে বুলাতে নিচের দিকে গেল। তারপর আমাকে হতবাক করে দিয়ে আমার লুঙ্গির গিট খুলে ফেলল। আমি চুপ করে রইলাম। আপা আমার লুঙ্গি টেনে নিচের দিকে নামিয়ে আমার ধোন বের করে নিল। আপার মাইয়ের স্পর্শে আগে থেকেই আমার ধোন খাড়া হয়ে ছিল।

রেনু আপা আলতো করে আমার শক্ত খাড়ানো ধোন ধরে টিপতে লাগলো। আমি তখনও চুপ করেই রইলাম। আপা সেদিকে ঝুঁকে আলতো করে আমার ধোনের মাথায় একটা চুমু খেলো, তারপর কাছ থেকে অবাক বিস্ময়ে আমার ধোনের দিকে কিছুক্ষন তাকিয়ে থাকলো। চুমু দেওয়ার সাথে সাথে আমার শরীরে একটা শিহরন খেলে গেল আর আমি একটু নড়ে একেবারে চিৎ হয়ে শুলাম, আমার ধোন সোজা খাড়া হয়ে আমার মাথার দিকে হেলে দাঁড়িয়ে রইল।

মাথার মধ্যে আমার চিন্তার ঝড় বয়ে যাচ্ছে, একটা দ্বন্দ্ব চলছিল, আপাকে চুদবো কি চুদবো না। শেষ পর্যন্ত সিদ্ধান্ত নিলাম, না চুদবো না, ও যে মালার মা, আমি ওকে কি করে চুদি, ওকে যে আমি বড় শ্রদ্ধার চোখে দেখি।

তাই আপা যখন আবারো আমার ধোনটা হাত দিয়ে চেপে ধরে সামনে ঝুঁকে প্রায় অর্ধেকখানি মুখের ভিতরে নিয়ে চুষতে লাগলো আমি হঠাৎ চমকে জেগে গেছি এমনভাবে উঠে বসে আপাকে ঠেলে সরিয়ে দিয়ে লুঙ্গি দিয়ে আমার ধোন ঢেকে বললাম, “ছিঃ ছিঃ আপা, এ কী করছো?”
আপা যেন পাগল হয়ে গেলো, আমাকে জড়িয়ে ধরে চুমু দিতে দিতে বললো, “প্লিজ আমাকে একটু সুখ দে, আমি আর থাকতে পারছি না, আমি তিলে তিলে শেষ হয়ে যাচ্ছি, লক্ষ্মী ভাই আমার, আমাকে বঞ্ছিত করিস না।”

আমার দুই হাত টেনে নিয়ে নিজের মাইয়ের উপরে জোর করে চেপে ধরে বললো, “ধরে দেখ, খুব মজা পাবি, আমাকে ঘেন্না করিস না, প্লিজ আমাকে একটু সুখ দে, একটু সুখ।”

আমি জোর করে হাত টেনে নিতে কাঁদতে লাগলো আপা। নিজেকে সামলে নিয়ে ২ মিনিট পর আবার আমার হাত টেনে নিয়ে নিজের মাইয়ের উপরে ধরে চাপ দিলো।

বললো, “এখন তো সব আড়াল সরে গেছে, আর কিসের লজ্জা রে, নে যেভাবে চাস যতটুকু চাস আমাকে নে, আমাকে নিঙড়ে চুষে শেষ করে দে। আমি সেই প্রথম তুই যখন আমাদের বাসায় আসলি তখন থেকেই তোর জন্য পাগল হয়ে আছি।”

আমি আবারো হাত টেনে নিয়ে হিসহিস করে বললাম, “না আপা, তা হয় না, আমি পারবো না।”

আপা আমার মুখ ধরে নিজের দিকে টেনে তুলে বলল, “কেন পারবি না? আমি বুড়ো হয়ে গেছি? তোকে সুখ দিতে পারবো না ভাবছিস?”

আমি বললাম, “না আপা, তা নয়।”

আপা হিসহিস করে বললো, “তাহলে? কিসের জন্য আমাকে সরিয়ে দিচ্ছিস, আমি নির্লজ্জ বেহায়ার মত তোর কাছে এসেছি আর তুই আমাকে অপমান করছিস, কেন? সুবীরের জন্য?”

আমি বললাম, “না, তা নয় আপা।”

আপা জিজ্ঞেস করলো, “তবে?”

আমি বললাম, “সেটা আমি তোমাকে বলতে পারবো না।”

আপা রেগে গেলো, “কেন বলতে পারবি না শুনি? আমাকে বলতেই হবে, যদি তুই সুনির্দিষ্ট কারন দেখাতে পারিস, কথা দিচ্ছি, আমি এখান থেকে চলে যাবো, নাহলে আজ তোকে আমার শরীরের আগুন নেভাতেই হবে। আর তাতেও যদি তুই রাজি না হোস, আমি কিন্তু চিৎকার দেবো বলে দিলাম। সবাই জানবে সুবীর বাসায় না থাকায় তুই আমাকে ধর্ষন করার চেষ্টা করছিস।”

আমি অবাক হয়ে রনরঙ্গীনি রেনু আপার দিকে তাকিয়ে থাকলাম।

আপা আবারো আমাকে ঝাঁকি দিয়ে বলল, “কি হলো বল।”

আমি দেখলাম, না বলে আমার উপায় নেই, মিনমিন করে বললাম, “মালার জন্য।”
আপা পাগলের মত হো হো করে হাসতে লাগলো।

বেশ কিছুক্ষণ পর হাসি থামিয়ে বললো, “ওওওওও এই কথা? কি ভাবিস আমাকে অ্যাঁ, চোখ কান সব বন্ধ? তুই আর মালা যে ডুবে ডুবে জল খাচ্ছিস আমি টের পাইনা?”

আমার মাথায় যেন বজ্রপাত হলো, হাঁ করে রইলাম।

আপা আমার অবস্থা দেখে বলল, “সেটাই তো বলি, ভাবছিস মা আর মেয়েকে একই সাথে কী করে…তাই না।”

আমি সম্বিৎ ফিরে পেয়ে বললাম, “হ্যাঁ তাই তো, মালা তোমার মেয়ে, আর তুমি যখন জানোই যে আমি আর মালা কি করছি, তাহলে আমার কাছে আসতে তোমার লজ্জা করলো না?”

আপা আমার নাক টিপে দিয়ে বলল, “না করলো না, তুই কি ভাবিস, আমি কিছুই জানিনা, বুঝি না? সব জেনেও চুপ করে আছি কেন জানিস? তোকে ভাল লেগেছে বলে, তোকে যে আমার খুব দরকার, আমার ভেতরটা ঘুন পোকার মত কুড়ে কুড়ে খাচ্ছে, একমাত্র তুইই পারিস আমাকে বাঁচাতে।”

আমি বললাম, “কিন্তু তোমার মেয়ে?”

আপা আমার চোখে চোখ রেখে বলল, “কে আমার মেয়ে? মালা? না, ও আমার পেটের মেয়ে নয়, পালক। সুবীরও ওর বাপ নয়।”

এবারে আরেকবার আমার চমকাবার পালা, বললাম, “তাহলে?”

আপা আমাকে দিয়ে কসম খাওয়ালো যে, এসব আমি মালাকে বলবো না। পরে জানালো, মালা সুবীরের বোনের অবৈধ গর্ভের ফসল। বোনকে কলঙ্কের হাত থেকে বাঁচাতে সুবীর এই নাটকটা করেছিলো, মালাকে নিয়ে এসে মানুষ করছে। রেনু আপা বন্ধ্যা, তার কোন বাচ্চা হওয়ার সম্ভাবনা নেই। তাছাড়া প্রায় ১০ বছর আগে সুবীর একটা এক্সিডেন্ট করে। কোমড় আর নিম্নাঙ্গে আঘাত লাগে, সেই থেকে সুবীরের সেক্সুয়াল ক্ষমতা নষ্ট হয়ে গেছে, ধোনটা এতটুকুন হয়ে গেছে, ঠিকমত দাঁড়ায় না, চুদতেও পারে না। সেই থেকে আপা নিজের শারীরিক চাওয়া থেকে বঞ্ছিত, তাই আমাকে নিজের দেহ উজাড় করে দিতে চায়।
সব শোনার পর আর কোন বাধা রইলো না।

নিজের মেক্সি খুলে ফেলল আপা, পরিপূর্ন গোল, সুডৌল, পেলব একজোড়া মাই আপার, কি সুন্দর। মোটা মোটা নিপলস আর কালো চওড়া বৃত্ত মাইয়ের ডগায়। আমি চুষতে লাগলাম আর টিপতে লাগলাম। আপা আমার ধোন নাড়তে লাগল আর মাঝে মাঝে বাঁকা হয়ে ধোনের মাথা চাটতে লাগলো। বেশ কিছুক্ষন পর আমি আপাকে শুইয়ে দিয়ে পেটিকোট তুলে ফেললাম। মোটা মোটা ঠোঁটওয়ালা বেশ চওড়া বড় একটা গুদ আপার, সুন্দর করে বাল কামানো। ক্লিটোরিসটা বেশ মাংসল। হামলে পরে চাটতে লাগলাম।

৫/৭ মিনিট চাটার পর আপা আমার ধোন ঢোকাতে বলল। বেশ টাইট, ঠেলে ঠেলে ঢুকিয়ে দিয়ে চুদতে লাগলাম। আপা ক্রমাগত আহ উহ করে যাচ্ছে আর আমি পকাৎ পকাৎ পক পক ফক ফক করে চুদে যাচ্ছি, একই সাথে আপার বড় বড় মাইগুলো চটকাচ্ছি। অনেক দিন চুদা থেকে বঞ্ছিত আপার প্রথমবার রস খসাতে সময় লাগলো না। দুই পা দিয়ে আমার কোমড় আঁকড়ে ধরে নিজের কোমড় বাঁকা করে উপর দিকে তুলে ঝাঁকি মেরে মেরে ওঁওঁওঁওঁ করতে করতে রস খসিয়ে দিলো।

রস খসার পর আপার গুদের ভিতরটা আরো বেশি রসালো আর পিছলা হয়ে গেল। আমি ওকে কাত করে নিয়ে এক রানের উপরে বসে আরেক পা আমার মাথার উপরে তুলে নিয়ে হাঁটু পেতে বসে শরীরের সমস্ত শক্তি দিয়ে প্রচন্ড গতিতে পকাৎ পকাৎ করে চুদছিলাম। এভাবে ৫/৭ মিনিট চুদার পর আপাকে মেঝের উপরে দাঁড় করিয়ে খাটের উপর হামা দিয়ে দিলাম আর পিছন দিক থেকে ওর কোমড় ধরে চুদতে লাগলাম।

আরো প্রায় ১৫ মিনিট পরে আপার দ্বিতীয়বার রস খসার সময় হয়ে এলে আপা নিজেই আমাকে সরিয়ে দিয়ে খাটের কিনারে চিৎ হয়ে শুয়ে দুই পা উপরে তুলে নিজের দিকে টেনে ধরে থাকলো আর আমি আপার হাঁ করে থাকা গুদের মধ্যে আমার ৮ ইঞ্চি লম্বা আর মোটা ধোন ঠেলে ঢুকিয়ে দিয়ে পকাপক চুদতে লাগলাম। কিছুক্ষণ পর আপা আবারো রস খসিয়ে দিয়ে তড়পাতে লাগলো। আমারো মাল আউট হওয়ার সময় ঘনিয়ে এলে আপা ওর গুদের মধ্যেই মাল আউট করতে বললো।

আমার চুদা শেষ হওয়ার পর আপা আমাকে চুমু দিয়ে দিয়ে আদর করছিল।

সে সময় হঠাৎ আমার চোখ পড়ল বাথরুমের দরজার দিকে, দরজাটা এদিক থেকে আটকানো ছিল না কিন্তু সামান্য একটু ফাঁক হয়ে ছিল। আমি সেদিকে ভাল করে থাকাতেই দরজাটা একটু নড়ে উঠলো আর একটা ছায়ার মতো কি যেন সরে গেল। বুঝলাম, ছায়াটা আর কেউ নয়, মালা। এতক্ষণ দাঁড়িয়ে দাঁড়িয়ে আমার আর রেনু আপার চুদাচুদি দেখছিল।

একটু ভয় পেয়ে গেলাম, কি জানি কি আছে কপালে কে জানে।

পরদিন মালা স্কুল থেকে ফেরার পর খুব গম্ভীর হয়ে থাকলো। আমি কিছু বলতেই ফোঁস করে উঠলো, “ভাল্লাগছে না, যাও।”

আমি বললাম, “ঠিক আছে, আমার ব্যাগ গুছিয়ে দে, আমি আজই চলে যাবো।”

তখন একটু নরম হলো। জানতে চাইলাম, কি হয়েছে?

অনেক তেল দেওয়ার পর বলল, “তুমি কাল রাতে মা-মনির সাথে রাত কাটিয়েছো, তাই না?”

আমি বললাম, “তুই রাগ করেছিস?”

মালা বলল, “না, তবে কষ্ট পেয়েছি, সে যাক, তুমি তো আর আমার স্বামী না যে তোমাকে আমি আঁচলে বেঁধে রাখবো, আমি আগে থেকেই বুঝতে পেরেছিলাম যে মা-মনির লোভ আছে তোমার উপর, সেই প্রথম থেকেই।”

ভেবেছিলাম মালা হয়তো আর রাজি হবে না, কিন্তু শেষ পর্যন্ত নিজেই আমাকে সুযোগ দিল চুদতে।

পরের দিন বাবলী এলো স্কুল পালিয়ে, থাকলো ষ্কুল ছুটির টাইম পর্যন্ত, আয়েশ করে ওকে চুদলাম তিন বার।

আপার মীনাবাজার শেষ হয়ে গেল আর সুবীর বাবুও ফিরে এলেন। আমিও গাট্টি বোঁচকা নিয়ে বিদায় নিলাম।

পরে মাঝে মাঝেই যেতাম আর সময় সুযোগ মত কখনো মালাকে কখনো রেনু আাপাকে চুদে আসতাম। এভাবেই আমার দিন কাটতে লাগলো।

কিন্তু বাবলীকে আমি কিছুতেই ভুলতে পারছিলাম না। মনটা সারাক্ষন আকুপাকু করতো, যদি আরেকটা দিন ওকে চুদতে পারতাম। কিন্তু ওদের বাসায় গেলে ওর মা শায়লাকে আগে চুদতে হবে। কি যে করি ভেবে পাচ্ছিলাম না। তাছাড়া আমি সেদিন যেভাবে পালিয়ে এসেছি তাতে শায়লা আমাকে কিভাবে নেবে সেটাও একটা সমস্যা। সর্বোপরি, শায়লা একটা বেশ্যা, ওর স্বামী কাছে থাকে না জন্য যাকে পায় তাকেই চুদা দিতে চায়। এরকম বারো জনের চুদা গুদ চুদতে আমার রুচিতে বাধে।

শেষ পর্যন্ত সিদ্ধান্ত নিলাম, নাহ, ওদিকে আর নয়…বাবলী আমার কাছে একটা আধ-পড়া রহস্য গল্প হয়েই থাক।

বাংলা চটি গল্প – বারবধূ – ২

Bharatiya o Barir Maliker chodachudir Bangla choti golpo 2nd part

কথা বলতে বলতেই মুখুর্জে মশাই দুহাতে রমেনের মার পাছার মাংসের ঢিপি চটকাতে চটকাতে অসহ্য লালসায় গুদখানা প্রায় মুখে পুরে নিয়ে চেটে চুসে কামড়ে একসা করতে থাকে.
দু আঙ্গুলে গুদের পাতলা গোলাপি ঠোঁট দুটো অনেকখানি চিরে ধরে পিপাসু কোনও মানুষের মত জিভের ডগাটা প্রায় বল্লমের মত ছুঁচালো করে চেরা গুদের গর্তের গভীরে প্রবেশ করিয়ে দিতে থাকে সুধা পাত্রে সঞ্চিত সুধার সন্ধানে.
– এই লক্ষ্মীটি আর অমন করে চুস না মাইরি, গাঁয়ের মধ্যে আমার কি রকম যেন করছে. আমি আর থাকতে পারছি না –

রমেনের মা খাটের গায়ে হেলান দিয়ে দাড়িয়ে দু হাতে মুখুর্জে মশাইয়ের মাথাটা নিজের গুদের উপর ঠেসে ধরতে ধরতে প্রায় চোখ বুখে গোঙাতে থাকে. এই মুহূর্তে আগের মানুষটার সঙ্গে তার এখন অনেক প্রভেদ.
– কেন রে শালী, এই যে আমার কথা শুনে হাসছিলি, এক্ষন দেখছিস তো, আমার বাঁড়ার জন্যে তোর গুদও ওঁয়া ওঁয়া করে ডাকছে কিনা –
মুখুর্জে মশাই প্রানভরে গুদখানা চুষতে চুষতে সবজান্তার হাসি হেঁসে ওঠে.

– হ্যাঁ, হ্যাঁ. কাঁদছে আমার গুদের ভেতরটা ভীষণ কতকত করছে. মনে হচ্ছে কেউ যেন সাঁড়াশি দিয়ে চেপে চেপে ধরছে, তুমি আমাকে খাটে নিয়ে চল. কামড় উঠলে আমি একদম থাকতে পারি না – ওমা – রমেনের মার গলায় মিনতি ঝরে পরে.
– বাবা, এক ছেলের মার কত বাই! তবে রমেনের বাবা ঘরে না থাকলে কি করিস? মুখুর্জে মশাই ব্যস্ততা দেখায় না.
– কি আবার. নিজে আংলি করি, কিংবা মোমবাতি দিই – এই চল না.

– অত ব্যস্ততা কিসের, দাড়া আগে একটু চুসে চেটে নিই, এতদিন পরে এমন সুযোগ পেয়েছি, ছাড়া যায়. আমি তোর গুদ চাটছি তারপর তুই আমার বাঁড়াটা চুসে দিবি, তারপর তো – ফচ – ফচ –
– না, না, তোমার পায়ে পড়ি, এরপর কেউ এসে গেলে, ইস – রমেনের মা প্রায় গুঙ্গিয়ে ওঠে –
– আরে ধুত্তরি, কেউ এসে গেলে –
– কেউ আসবে না – মুখুর্জে মশাই আবার রমেনের মার গুদ চোষায় মগ্ন হয়ে যায়.

আর রমেন অবাক বিস্ময়ে, ঘেন্নায় জানলার ফুটোয় মুখ রেখে তন্ময় হয়ে দেখতে থাকে দুই বয়স্ক মানুষের ছেলেমানুষি কাণ্ড. তার নিজের মা আর বাড়িওয়ালা মুখুর্জে জ্যেঠা.
রমেন ভেবে পায়না, অমন দুটো বয়স্ক লোক কি করে এসব ছেলেমানুষি কাণ্ডকারখানা করছে. অতবর ধুমসো লোকটা মাকে প্রায় ন্যাংটো করে ফেলে, হুমড়ি খেয়ে পরে অমন করে জিভ দিয়ে চেটে চেটে দিতে পারে পারে ওই নোংরা পেচ্ছাবের জায়গাটা.

রমেনের রাগও হল কিছুটা. লোকটা নিশ্চয় ওই সব চাটাচাটি করতে গিয়ে মার ওই খয়েরী খয়েরী লোমে ঢাকা জায়গাটায় দাঁত দিয়ে জোরে কামড়ে দিচ্ছে, নইলে মা অমন গোঙাচ্ছে কেন? কুকিয়ে কুকিয়ে উঠছে?
কিন্তু রমেন ভেবে পায় না, লোকটা মাকে ব্যাথা দিচ্ছে, তবু মা কেন বেয়াদপি সহ্য করছে ওর. হোক সে মুখুর্জে মশাই – তাদের বাড়িওয়ালা.
হিঃ হিঃ হিঃ, মাইরি সুন্দরী, তোর খুব কষ্ট হচ্ছে নারে? গুদে জল কাটছে দেখতে পাচ্ছি, ইস গুদের ভেতরটা তোর একদম সরশরে হয়ে উঠেছে. মাইরি আজ বাঁড়া ঢোকাতে যা আরাম লাগবে না. আর শালা ওঁ সব গ্লিসারিন – গ্লিসারিন কি, গুদের টাটকা রসে ভেতরটা টসটসে না হয়ে উঠলে গুদ মেরে আরাম.

রমেনের মার দলমলে পাছা আর উরু দু’খানা সাপটে ধরে কামরসে টসটসে হয়ে ওঠা ভিজে গুদখানার সব রস পরম তৃপ্তির সঙ্গে চেটে চুসে খেতে খেতে চুটিয়ে খিস্তি করতে লাগল মুখুর্জে মশাই.
এক্ষেত্রে মুখুর্জে মশাইয়ের সামান্য পরিচয় দেওয়া আবশ্যক. ভদ্রলোকের বয়স চল্লিশের ওপর. লম্বা ফর্সা সম্ভ্রান্ত চেহারা. মাথায় তাক, বাজপাখির মত নাক. মুখুর্জে মশাই যাকে বলে বাপের সুপুত্তুর. বাপের একমাত্র ছেলে.

কলকাতা শহরের উপর দু’খানা তিনতলা নিজস্ব বাড়ি. এই বাড়ি ভাড়া থেকে মাসে হাজার বিশেক রোজগার তার. করে খেতে তাকে কিছুই হয় না. বিদ্যে বুদ্ধিও কিছু নেই. সচ্ছল সংসারে গোঁফ উঠতে না উঠতেই সতসঙ্গে পড়ে সনাগাছি আর হাড়কাটা গলিতে মদ আর মাগীর কারবার করেছেন তিনি. এখন বয়েস বাড়তে বিয়ে থা করে দু’তিন ছেলেমেয়ের বাপ. কিন্তু সেই নষ্টামি তার আর যাওয়ার নয়. এখন বেশ্যাবাড়ি আর জান-টান না তেমন, এখন নজর ভদ্রঘরের মেয়ে-বউদের উপর. পয়সার লোভ দেখিয়ে ভাড়াটে মেয়ে-বউদের সর্বনাশ করেন.

ইদানিং কিছুদিন হল রমেনের মার উপর নজর পড়েছে তার অনেক দিনই তক্কে তক্কে ছিলেন. উপর তলার জানলায় বসে, কোলের পারে, বাথরুমে কাজকর্মের ফাঁকে উঁকিঝুঁকি মারতেন রমেনের মার শরীরের ভাঁজে-ভুজে আর লালা ফেলতেন.
চিরিয়াখানা ডাঁসা. বছর ২৫-২৬ বয়েস. টাটকা টাইট তন্বী শরীর. একছেলের মা দেখলে বিশ্বাসই করা যাবে না.

মাগীটাকে অতএব মুখুর্জে মশাইয়ের চাই. আর এসব যা করতে হয় – ছিদ্র খুজে বেড় করা, বেসির ভাগ মেয়েমানুস চরিত্র খোয়ায় গর্তের দোষে. কুটকুটুনির জ্বালায়, আর কিছু মেয়েমানুষ মরে পয়সার লোভে.
মুখুর্জে মশাইয়ের পাকা চোখ ঠিকই টের পেয়েছিল রমেনের মার দুর্বলতা. ঘরে মাগীর জোয়ান ভাটার আছে বটে, কিন্তু ভাতারের পয়সা নেই. রমেনের বাবা একটা ছোট কারখানায় সামান্য মাইনের কর্মচারী. ওই টাকায় ঘরভারা দিয়ে তিনটে লোকের পেট চলা কোলকাতায় প্রায় অসম্ভব.

– আর সেই সুযোগটাই নিলেন মুখুর্জে মশাই. প্রথমে রমেনের বাবার সঙ্গে ভালো করে ভাব জমিয়ে নিয়ে ভালমন্দ খাবার-দাবার পাঠাতে লাগলেন, মাঝে মাঝে রমেনের মায়ের হেঁসেলে ঢুকে, বউমার ছ্যাঁচড়া-চচ্চড়িটাও চলতে লাগল. আর সেই সঙ্গে চলল আভাসে-ইঙ্গিতে টাকার লোভ দেখান.
প্রথমে প্রথমে ব্যাপারটা এরাতে চেষ্টা করলেও শেষ পর্যন্ত সে ফাঁদে ধরা পরতেই হল তাকে. রমেনের মার দোষ খুব নেই. অভাবি ঘরের মেয়ে, স্বামীর ঘরে এসে অবধিও পয়সা-কড়ির মুখ খুব একটা দেখেনি. সুতরাং দুয়ে দুয়ে চার.

কিন্তু এসব কারবার চার হলেই হয় না. লোকের চোখ বিশেষত বৌয়ের চোখ বাঁচিয়ে অন্য মেয়ে মানুষের ঘরে যাওয়া খুব কঠিন. মুখুর্জে গিন্নি স্বামীর দেব চরিত্রের কথা ভালই জানে, তাই সদাই চোখে চোখে রাখে. আজ এতদিন বাদে দিন কয়েকের জন্য বাপের বাড়ি যেতে –
– ইস কিগ, তোমার কি হল. দেখছ গুদে জল সরসর করছে, এবার ছাড়ত! ইস গুদ চুসে ঢ্যামনা মরদের আর হয় না কিছুতেই –
বেজাই গরম খেয়ে গিয়ে রমেনের মা প্রায় রেগে উথেই নিজের গুদখানা ছারিয়ে নিয়ে সেই ভাবে মুখুর্জে মশাইয়ের মুখে একটা ধাক্কা দিল.

– হিঃ হিঃ হিঃ, সুন্দরী আবার দেখছি বেজাই ক্ষেপে গেছে. আচ্ছা নে বাপু, এতই যখন তোর বাই, তখন নে একবার চদাচুদিতা সেরেই নি, বাঁড়াটা আমার বড় সরসর করছে. তা হ্যাঁরে, একবার একটু চুসে-টুসে দিবি না? বাঁড়া চোষাতে আমার বড় আনন্দ, দে না মাইরি একটু চুসে. মুখের মধ্যে যা ফটাস ফটাস ঠাপ মারব না. –
– না, এখন ওসব চোসাচুসি হবে না. চটপট চুদেচাদে নিয়ে কেটে পরও. রমেনের আসার সময় হয়ে গেছে.

– এই জন্যই তো বলছি, সব ছেড়ে ছুড়ে দিয়ে চ’ আমার সঙ্গে. আমার অন্য বাড়িটার উপরের একখানা ঘর দেব তোকে, পরম সুখে রাখব. এখানে পড়ে থেকে তো খেটে খেটে গতর কালি করে ফেললি?
– হ্যাঁ তোমারতো শুধুই কথা. আমার রুজির টাকা কি হল?
– হবে হবে, ব্যাস্ত কি? নে এখন খাটে উঠে পর দিকি. আচ্ছা উঠতে হবে না. খাটের ধারে পাছা ঠেকিয়ে বোস, আমি দাড়িয়ে দাড়িয়ে চুদব তোকে.

দাড়িয়ে দাড়িয়ে চোদার গল্পটা Bangla choti গল্পের পরের পর্বে বলব …..

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বাংলা চটি গল্প – বারবধূ – ১

Bharatiya o Barir Maliker codacudir Bangla choti golpo 1st part

– মা ওমা, শীগগির কি খাবার আছে খেতে দাও – ইস কি খিদে যে পেয়েছে. রমেন বইয়ের ব্যাগটা পিঠ থেকে খুলতে খুলতেই দুর-দ্বার শব্দে সিঁড়ি ভেঙে উঠে এলো. কিন্তু পরক্ষনেই বারান্দার সামনে এসে থমকে দাঁড়াল.
– হিঃ হিঃ হিঃ ইস মুখুর্জে মশায়, কি হচ্ছে কি – ইস কেও এসে পড়বে যে. – হিঃ হিঃ হিঃ –
– আরে মাগী আসে আসুক, মুখুর্জে মশাই কাওকে পরোয়া করে না –
– ঘরে আপনার যে একটা মাগ রয়েছে, সে খেয়াল তো করবেন?
– মাগ, শালীর মাগকে তুমি যেদিন বলবে এক লাথি মেরে দূর করে দেব ঘর থেকে. তারপর তুমি যাবে আমার ঘরে, রানির মত থাকবে. বল মাইরি সুন্দরি, কবে যাবি, কবে যাবি –

রমেন সারা শব্দ না করে, পা টিপে টিপে নিঃশব্দে গিয়ে দাড়ায় বন্ধ জানলাটার সামনে. চোখ রাখে একটা ছোট ফুটোয়. মুহূর্তে ঘরখানা স্পষ্ট হয়ে ওঠে তার চোখের সামনে.
ঘোরের একপাসে রাখা খাটখানার গায়ে নিজের শরীরটা ঠেকিয়ে কোনও রকমে দাড়িয়ে আছে রমেনের মা. বুকের আঁচল খসে গিয়ে মাটিতে লুতাচ্ছে. ব্লাউসের বোতামগুলো খোলা, মায়ের বড় বড় সাদা সাদা তলতলে মাই দুটো বেড়িয়ে আছে সম্পূর্ণ উদলা হয়ে. যে মাই দুটো হাতে ধরে, মুখে নিয়ে আর কয়েকটা বছর আগেও রমেন কত খেলেছে মায়ের কোলে শুয়ে শুয়ে. খয়েরী রঙের মাছর মত বোঁটা দুটো থেকে ঠোঁট দিয়ে চুক চুক করে মাই চুসে নিতে নিতে দুষ্টুমি করে কতাশ করে কামর বসিয়ে দিয়েছে.
– উঃ রমু. কি দুষ্টুমি হচ্ছে, লাগে না –

দুই বয়স্ক মানুষের ছেলেমানুষি কাণ্ডের Bangla choti golpo

রমেনের মা ব্যস্ত হাতে কাজ করতে করতে ধমকে উঠছে. মায়ের ব্যাথা পাওয়া দেখে রমেন মজা পেয়েছে আরও, মেটে উঠেছে মাকে ব্যাথা দেওয়ার খেলায়.
কিন্তু মজা পাওয়া না, এখন রমেনের অবাক হওয়ার পালা. রমেন জানতেও পারেনি এই কবছরে তার সেই সম্পত্তি হাত ছাড়া হয়ে গেছে কখন.
এই মুরতে মাকে খাটের গায়ে হেলান দিয়ে দাড় করিয়ে দু হাতে মায়ের পাছা আর কোমর জড়িয়ে, সাপটে ধরে পাছার দলমলে মাংসগুল, দু হাতে সায়া সাড়ির উপর দিয়ে এলোপাথাড়ি খামচাতে খামচাতে তাদের বাড়িওয়ালা মাঝ বয়সী, টেকো অবন জ্যেঠা যেমন অবলীলায় সেই বড় বড় সুন্দর মাই দুটোয় মুখ লাগিয়ে চুক চুক করে বোঁটা চুসে দুধ টানছে.

রমেন অবস্য জানে মায়ের দুধ দুটোয় এখন আর সত্যি কোনও দুধ আসে না. তানলেও না. শুকনো.
কিন্তু অবন জ্যেঠার সে সব খেয়াল নেই. মার মাংসঠাঁসা দলমলে মস্ত পাছাখানা কসে খামচাতে খামচাতে মাইয়ের বোঁটা চুসছে. বুক দুটোর খাঁজে, উপরে মুখ ঘসছে, আর বকে যাচ্ছে পাগলের মত.
– ইস মাইরি সুন্দরী, তোর মাইদুটো যে কি সুন্দর. অনেক মাগীর মাই আমি দেখেছি, বেশ্যা থেকে ভদ্দর ঘরের মেয়ে মানুষ, কিন্তু এমন সুন্দর সুন্দর ঠাঁসা, টাইট টাইট মাই আমার বাপের জন্মেও দেখিনি. ইস কি যে সুন্দর – উ-উ-উম-

বলতে বলতে মুখুর্জে মশাই তার বাজপাখির মত লম্বা নাকটা ঘসে দিল দুই মাইয়ের খাঁজের মাজখানে.
-ই হি-হিহ-, আপনি ভারী দুষ্টু. রমেনের মা আধো আধো গলায় হেঁসে উঠল. হাত তুলে মুখুর্জে মশাইয়ের টাকে টোকা দিল একটা.

মুখারজি মশাই আনন্দে আটখানা হয়ে আচমকা কোমরটা নিচু করে মুখটা সজোরে গুঁজে দিল রমেনের মার শাড়ি সায়ার ভেতর দিয়ে দুপায়ের ভাঁজে, কোমরের নীচে যেখান দিয়ে মেয়েরা পেচ্ছাব-টেচ্ছাব করে.
রমেন অবাক না হয়ে পারে না. মুখুর্জে জ্যেঠার এ আবার কি কাণ্ড! রমেন চিরদিন শুধু মায়ের মাইয়ে মুখ দিয়েছে, আর মুখুর্জে জ্যেঠা মুখ দিচ্ছে কিনা মায়ের ওই নোংরা পেচ্ছাবের জায়গাটায়! ছ্যা!
রমেন মুখুর্জে জ্যেঠার কাণ্ড দেখে অবাক হয় আবার ঘেন্নাও পায়.

– এই দুষ্টু, এই হচ্ছেটা কি কি এসব – ইস অমন কোরও না লক্ষ্মীটি, কে এসে পড়বে, এখন ছাড় – রাত্রে –
রমেনের মা, কোমরের কাছে দু’পায়ের খাঁজে লেপটে থাকা মুখুর্জে মশাইয়ের টেকো মাথাটা সরিয়ে দেওয়ার চেষ্টা করতে করতে চকিত চোখে দরজার দিকে তাকায়.

– আরে দূর মাগী, তোর কেবল ভয়. বাঁড়াখানা তাঁতিয়ে বাঁশ হয়ে তোর গুদে ঢোকার জন্য ওঁয়া ওঁয়া ডাক ছেড়ে কান্না জুরে দিয়েছে, আর উনি এলেন রাত্তির দেখাতে. ওঁ শালা বাথরুমে অন্ধকারে একটু ফুচুত ফুচুত আমার ভালো লাগে না. আজ শালী গুদ মারানির ভাইকে খাটে ফেলে ন্যাংটো করে না চুদে এক পাও এখান থেকে নরাচ্ছি না আমি –
বলতে বলতে মুখুর্জে মশাই ঝুঁকে পরে একটা হাত বাড়িয়ে খপ করে শাড়ি আর সায়ার নীচের দিকটা মুঠো করে ধরে টেনে তুলতে শুরু করে রমেনের মার.

রমেনের মা এবার আর বাঁধা দেয় না. মুখুর্জে মশাইয়ের খিস্তির দমকে দুলে দুলে হাসে খিল খিল করে.
ইস মুখুর্জে মশাই, আপনি শালা এক নম্বরের খচ্চর. বলে কি না, ওনার বাঁড়া ওঁয়া ওঁয়া করে কাঁদছে. হি হি হি-
মুখুর্জে মশাই ততক্ষণে এক হাতে রমেনের মার ডবকা পাছাখানা খিমচে ধরে অন্য হাতে সায়া সমেত শাড়িটা টেনে তুলে ফেলেছে হাঁটুর উপরে.

রমেনের মার দু’পায়ের শক্ত গোছা, সুডোল মাংসল ডিম দুটো, ঢেউ খেলান হাঁটু – তারও উপরে সাপের মত সাদা, কলা গাছের থোড়ের মত এই মোটা মোটা মসৃণ, পেলব উরু দুটো স্পষ্ট দেখা যাচ্ছিল. কিন্তু মুখুর্জে মশাইয়ের হাত সেখানেই সংযত হল না. শাড়িটা টেনে তুলে ফেলল আরও উপরে প্রায় কোমর বরাবর.

চর্বি ঠাঁসা মাংসল দলমলে দুই মোটা মোটা উরুসন্ধির মাঝ বরাবর একটা ছোটখাটো অরন্যে ঢাকা সবুজ-শ্যামল উপত্তকার মত কচি কচি খয়েরী – কালচে রঙের অল্প অল্প ঘন বালে ঢাকা মোচার খলার আকৃতি মাজ বরাবর টসকান রমেনের মার মাংস ঠাঁসা ফুলো ফুলো ডাঁটো – মুথভর গুদখানা স্পষ্ট দেখা যাচ্ছিল, গুদের ঠিক তল বরাবর কে যেন ধারাল ছুরি দিয়ে চিরে দিয়েছে সমান করে.

– ইস, ইস শালা, আহা রে সুন্দরী, এক ছেলের মা তুই, কিন্তু তবু তোর গুদখানা কি অপূর্ব সুন্দর. ইস ঠিক যেন দিদিমার হাতে বানানরসে টসটসে আসকে পিঠে, মুখে দিলেই রস গড়াবে. আঃ! এই গুদের জন্য বাঁড়া কাঁদবে না?
মুখুর্জে মশাইয়ের আর তোর সইল না, বলতে বলতে মুখুর্জে মশায় প্রনামের ভঙ্গিতে হাঁটু মুড়ে সামনে বসল রমেনের মায়ের. তারপর শাড়িখানা আরও একটু তুলে ধরে, শাড়ির তোলা দিয়ে বিরাট মাংস চর্বি ঠাঁসা একটা ছোটখাটো ঢিপির মত নরম পাছাখানা দু হাতে চটকাতে চটকাতে সবলে মুখখানা গুঁজে দিল বাল ভর্তি রমেনের মায়ের ডাঁসা গুদখানার উপর. কামড়ে কামড়ে প্রায় দাঁত বসিয়ে কামড়ে কামড়ে খেতে লাগল গরম প্যেস্ট্রির মত, জিভ বুলিয়ে চাটতে লাগল.

– আঃ আঃ ইস – এই অমন কোরও না লক্ষ্মীটি, ইস ইস – রমেনের মার এখন বাঁধা দেওয়া দূরে থাক, মুখুর্জে মসাইয়ের এ ধরনের বেপরোয়া আচরনে, আদরে স্পষ্ট গরম খেয়ে যাচ্ছিল ক্রমশ. মুখ চোখের চেহারা বদলে বদলে যাচ্ছিল. গোঙানির মত আওয়াজ করতে করতে রমেনের মা সামনের দিকে ঝুঁকে পরে মুখুর্জে মশাইয়ের টেকো মাথাটা সজোরে চেপে চেপে ধরতে লাগল নিজের টাটকা ডাঁসা গুদখানার উপরে.

– ইস মাইরি সুন্দরী, তোর গুদের গন্ধটা কি মিষ্টি, ইস যেন নেশা ধরে যাবে. এবার থেকে রোজ তোর গুদ চুষব আমি. আমার বউটা এক দিনও গুদটা ওর ভালো করে পরিস্কার করে না. এঃ কি যে গন্ধ বিশ্রী, বমি উঠে আসে. যেমন গুদে, তেমনি মুখে. মুখে তো শালা রাজ্যের পাইরিয়া, আর তোর মুখে যেন গোলাপ ফুলের গন্ধও –

 

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ভাবীর মুখের ভেতর আমার ধোন

একটা ফোরামে লেখালেখি করতে গিয়ে ভাবীর সাথে পরিচয়। উনি কেন ভাবী হলেন আমি জানিনা। কারন ভাবীর স্বামী অর্থাৎ ভাইয়াকে কখনো দেখিনি যিনি পেশায় সেনাবাহিনীর অফিসার। জানিনা ভাবীর সাথে সম্পর্ক কেমন। ভাবীকে সবসময় দেখেছি একাই ঘুরতে। কখনো মেয়েকে সাথে নিয়ে। মেয়েটা ন দশ বছরের বয়সী। ভাবীর সাথে পরিচয় হয়েছে বেশ কবছর, কিন্তু ঘনিষ্টতা তেমন না। হাই হ্যালো ইত্যাদি আর কি। তবে কোন এক ফাকে জেনেছি ভাবীর আগের প্রেমের কাহিনী। খেলাধুলার কাহিনী। ভাবী খুব উচ্চ শিক্ষিত, সমাজের উচ্চ অংশে চলাচল। আমি সাধারন মানুষ বলে এড়িয়ে চলি উচ্চ লেভেলে চলাচল। ভাবী কি

একটা কাজে আমাদের শহরে এলো কয়েকদিন আগে। আসার আগে আমাকে মেইল দিল। তারপর এসে ফোন করলো। বললো আমার সাথে চা খেতে চায়, গল্প করতে চায়। আমি বললাম অফিসের পরে আসবো। ভাবী বললেন তিনি কোন হোটেলে উঠেছেন। সন্ধ্যায় আমি হোটেলে গেলাম। ভাবী দরজা খুলে ওয়াও করে উল্লাস করে উঠলেন। অনেক দিন পর দেখা। আমার হাত ধরে রুমে ঢোকালেন। আর কেউ নেই রুমে। আমিও রোমাঞ্চিত কিছুটা। তবে বেশী রোমান্টিক হতে পারিনা ভাবীর ফিগার দেখে। বিশাল শরীর। এত মোটা মহিলা কম দেখেছি। অথচ বয়সে আমার ছোট। লম্বায় আমার প্রায় সমান, শরীরের বেড় আমার দ্বিগুন হবে। বিশাল দুটি বাহু। ঘাড় মাথা এক হয়ে মিশে গেছে কাধের কাছে। বুকের মাপ কতো হবে আন্দাজ করতেও ভয় লাগে। বিয়াল্লিশ থেকে পঞ্চাশের মধ্যে হবে। এত বড় দুধ দেখে শালার কামও জাগে না, খাড়া হওয়া তো দুরের কথা। মনে মনে বলি এর স্বামী নিশ্চয়ই পালিয়ে থাকে। এত বড় বিশাল বপু সামলানো কোন পুরুষের পক্ষে সম্ভব না। আমারে ফ্রী দিলেও খাবো না এই মুটকিকে। ভাবী আমাকে চেয়ারে বসিয়ে নিজে খাটে বসলো। ভাবীর পরনে যে পাতলা জর্জেটের সালোয়ার কামিজ, শরীর ঢাকতে পুরোপুরি ব্যর্থ হয়েছে। বিশাল সাইজের ব্রাটা কোনমতে লাউদুটোকে আটকে রেখেছে পতনের হাত থেকে। কেন যে মোটা মেয়েরা এত পাতলা পোষাক পরে!! কথা শুরু করলো ভাবী:
-তো, আর কি খবর বলো
-ভালো, আপনার খবর কী, একটু শুকিয়ে গেছেন বোধহয়
-আরে না, কী যে বলো, এখনতো নব্বই কেজিতে পৌছে গেছি

-বলেন কী, দেখে কিন্তু মনে হয় না।

-তাই? (ভাবী বেশ খুশী, এই একটা ভুল করে ফেললাম। ভাবী লাইনে চলে গেছে এরপর-সত্যি, আপনি এমনিতে খুব সুন্দর (ভুল পথে চলতে লাগলাম, পরে খেসারত দিয়েছি)
-মাই গড, আমি এখনো সুন্দর, তুমি বলছো, আর তোমার ভাইয়া এই মুটকিকে চেয়েও দেখেনা বহুবছর
-কি নিষ্ঠুর (আমি সহানুভুতি দেখাচ্ছি, কিন্তু এটাই কাল হলো
-তাই তো ভাই, তুমিই বুঝেছো মাত্র, আর কেউ বোঝেনি
-বলেন কি,
-তোমাকে আজ স্পেশাল কিছু খাওয়াতে হয় এই কম্পলিমেন্টের জন্য
-না না ভাবী এখানে আপনি মেহমান, আপনাকে আমিই খাওয়াবো
-দুর, আমি খাওয়াবো, তুমি আজ আমার গেষ্ট। এটা আমার হোটেল রুম।
-হা হা, কিন্তু শহরতো আমার
-সে রুমের বাইরে
-আমরা তো রুমের বাইরে খাবো
-না, ভেতরে খাবো
-ভেতরে?-হ্যাঁ, ভেতরেই। শুধু তুমি আর আমি। আমাদের প্রাইভেট ডিনার হবে আজ। তোমার কোন তাড়া নেই তো?
-না, আমি সময় নিয়ে এসেছি (এই আরেক ভুল করলাম, পরে খেসারত দিয়েছি)
-ওকে, তাহলে তুমি ফ্রী হয়ে বসো। গল্প করি আগে। পরে অর্ডার দেবো।
-আচ্ছা
-বিছানায় এসে বসো
-না, এখানে ঠিক আছে-অতদুর থেকে গল্প করা যায় দেবরের সাথে, ভাবীর কোলঘেষে বসতে হয়।
-হা হা, ঠিক আছে। (ভাবীর কাছ ঘেষে বসলাম বিছানায়, ভাবীর চোখে যেন অন্য কিছু)
-আচ্ছা, আমি কী খুব অসহনীয় মোটা?
-না, ঠিক তা না, এরকম মোটা অনেকেই হয়
-তুমি আমাকে ভয় পাও না তো?
-আরে না, ভয় পাবো কেন
-গুড, তোমাকে এজন্যই ভালো লাগে আমার, তোমার মধ্যে কেমন যেন একটা লুকানো বন্যতা আছে।
-কেমন?
-এই ধরো তুমি উপরে বেশ ভদ্র, শান্ত শিষ্ট। কিন্তু ভেতরে ভেতরে উদগ্র কামনার আধার। যেকোন মেয়েকে তুমি ছিড়ে খুড়ে খুবলে খেতে পারো
-উফফ ভাবী, কি করে মনে হলো আপনার
-তোমার চোখ দেখে
-হা হা হা, সেরকম হলে তো বেশ হতো, কিন্তু কখনো চেষ্টা করিনি (আবারও ভুল পথে গেলাম)
-চেষ্টা করতে চাও?-কিভাবে
-আরে, আমি আছি না? ভাবীরা তো দেবরদের ট্রেনিং দেয়ার জন্যই আছে
-হুমম, ফাজলেমি করছেন?
-সত্যি, তুমি যদি চাও, আমি তোমাকে সাহায্য করবো
-সাহায্য করবেন বন্য হতে?
-হ্যাঁ, আমাকে দেখে তোমার বন্য হতে ইচ্ছে না?
-না মানে
-লজ্জা করার কিছু নেই। আমি আর তুমি ছাড়া আর কেউ নেই এখানে। আমরা দুজন স্বাধীন।
-ঠিক আছে
-আসো, আরো কাছে আসো

আমি কাছে যাবার আগে, ভাবীই কাছে এসে আমাকে জড়িয়ে ধরলেন। তার উষ্ণ নরম সুগন্ধী শরীরটা আমার শরীরের সাথে লেপ্টে গেল। আমি উত্তপ্ত হতে শুরু করলাম। মুটকি বলে যাকে অবজ্ঞা করেছিলাম, তার স্পর্শে ধোন শক্ত হয়ে যেতে থাকে। কেন কে জানে। এই মেয়েকে চুদে সন্তুষ্ট করা আমার পক্ষে অসম্ভব। তবু তার স্পর্শেই ধোনটা শক্ত হয়ে যাচ্ছে। পুরুষ জাতটা অদ্ভুত। যে কোন মেয়ের স্পর্শে জেগে উঠতে পারে। একমাত্র বউ ছাড়া। বউ যদি সারাদিন বাড়া ধরে টানাটানি করে তবু খাড়াবে না। ভাবীর ডানহাত আমার দুই রানের মাঝখানে ধোনের উপরিভাগে বুলাচ্ছে। ভাবীর মতলব ভালো ঠেকলো না। আমাকে দিয়ে চোদাতে চায় বোধহয়। কিন্তু আমি কী পারবো? আমার ধোনের সাইজ মাত্র ছ ইঞ্চি। এই মাগীকে দশ ইঞ্চি বাড়া ছাড়া চুদে আরাম দেয়া যাবে না, তল পাওয়া যাবে না। ভাবীর চাপের মধ্যে থেকে ভাবছি কী করে না চুদে এড়ানো যায়। দুধ টুধ খেয়ে যদি ছাড়া পাওয়া যায়? দেখি কতটুকু করে পার পাওয়া যায়। কামিজের ওপর দিয়ে ভাবীর দুধে হাত দিলাম। যেন একতাল ময়দা। একেকটা স্তন দুই হাতেও কুলায় না। বামস্তনটা দুই হাতে কচলাতে চাইলাম। খারাপ না, আরাম লাগছে এখন। এতবড় দুধ কখনো ধরিনি। কামিজটা খোলার জন্য পেছনে হাত দিলাম। ভাবী নিজেই কামিজ খুলে ফেললেন। হালকা নীলচে বিশাল ব্রা, ভেতরে দুটো বিশাল দুধ ধরে রেখেছে। ছিড়ে যায় যায় অবস্থা। ভাবী ব্রার ফিতা খুলে উন্মুক্ত করতেই বিশাল দুটি লাউ ঝুলে পেটের কাছে নেমে পড়লো। দুটো তুলতুলে গোলাপী লাউ। এত বিশাল। এত বিরাট। বর্ননা করার ভাষা নেই। দুধের এই অবস্থা নীচের কি অবস্থা কে জানে। রান দুটো মনে হয় তালগাছ। পাছার কথা ভাবতে ভয় লাগলো। এমনিতে আমার প্রিয় একটা অভ্যেস হলো মেয়েদেরকে কোলে বসিয়ে পাছায় ঠাপ মারা। কৈশোর বয়স থেকেই মেরে আসছি। কিন্তু এই মাগীর যে সাইজ আমার কোলে বসলে হাড্ডি চ্যাপটা হয়ে যাবে। ধোনটা কিমা হয়ে যাবে চাপে। আগে ভাগে প্ল্যান করলাম চুদতে যদি হয়ও আমি উপর থেকে চুদবো। ওকে কিছুতেই আমার গায়ের উপর উঠতে দেবো না
দুই হাত একসাথ করে ডানদুধ আর বামদুধ ময়দা মাখার মতো কচলাতে লাগলাম। ভাবী সন্তুষ্ট না। বললো, আরে এগুলো খাও না কেন? আমি মুখ নামিয়ে দুধের বোটা মুখে নিলাম। নরম বোটা। চুষতে খারাপ লাগলো না। দুধে কিছু পারফিউম দিয়েছে। সুগন্ধী দুধ। ভালোই লাগলে। চুষতে চুষতে গড়িয়ে ভাবীর গায়ের উপর উঠে গেলাম। স্তন বদলে বদলে চুষছি। একবার ডান পাশ, আরেকবার বামপাশ। তারপর দুই বোটাকে একসাথ করে চুষলাম। চোষার যত কায়দা আছে সব দিয়ে চুষলাম দুধ দুটো। ভাবীর চেহারা দেখে মনে হলো খিদা বাড়ছে আরো।
আমি যখন ভাবীর দুধ চুষতে ব্যস্ত, সেই ফাঁকে ভাবী আমার শার্ট প্যান্ট খুলে ফেললেন, নিজেও সালোয়ারটা খুলে ছুড়ে দিলেন। এখন দুজন নেংটো নারী পুরুষ দলাই মলাই করছে একে অপরকে। আসলে ভাবীর বিশাল দেহের উপর আমি ক্ষুদ্র ইদুর বিশেষ। নিজেকে এই পৃথিবীতে খুব তুচ্ছ মনে হলো ভাবীর শরীরের উপরে থেকে। কোনা চোখে ধোনের অবস্থানটা দেখলাম, এটি এখন ভাবীর যোনী কেশের মধ্যে মাথা ডুবিয়ে আছে লজ্জায়। কী ক্ষুদ্র এই যন্ত্র! এর দ্বিগুন সাইজেও কুলাবেনা এই মহিলাকে সন্তুষ্ট করতে। ভাবীর পেট দেখলাম। বিশাল চর্বির আধার। নাভির দিকে তাকালাম। এখানে এত বিরাট গর্ত যে আমার ধোনটা অর্ধেক ঢুকে যাবে। ইচ্ছে হলো নাভি দিয়ে একবার চোদার। ইচ্ছে যখন হলোই দেরী কেন। উঠে বসলাম ভাবীর পেটের উপর। ধোনটাকে নাভীর ছিদ্রে ঢুকিয়ে দিলাম। ভাবী মজা পেল আমার কান্ডে। হি হি করে হেসে উঠলো। সুড়সুড়ি লাগছে ওনার। ভাবীর পুরো শরীরটা যেন মাখন। যেখানে ধরি সেখানেই মাংস। এত মাংস আমি জীবনেও দেখিনি। আর এতবড় নগ্ন নারী শরীর, কল্পনাও করিনি। ধোনটা নাভীছিদ্রে ঢোকার পর দেখলাম দারুন লাগছে। যদিও অর্ধেক ধোন বাইরে, ঠাপ মারতে গেলে পুরোটা ঢুকে যায়,এত বেশী মাংস। লিঙ্গটা ওখানে রেখে আমি মুখটা ভাবীর ঠোটের কাছে নিয়ে ভাবীর সেক্সী ঠোটে লাগালাম। ভাবী চট করে টেনে নিল আমার ঠোট দুটি। চুষতে লাগলো। একবার আমি নীচের ঠোটটা চুষি আরেকবার ভাবী আমারটা চোষে। মজাই লাগলো। ওদিকে লিঙ্গটা নাভিতে ঠাপ মেরে যাচ্ছে। মারতে মারতে গরম হয়ে শরীরে কাপুনি দিল। অরগাজম হয়ে যাচ্ছে, এখুনি মাল বেরুবে। কী করবো বুঝতে পারছি না। মাল আটকানোর কোন উপায় দেখলাম না। যা থাকে কপালে, আমি আটকানোর চেষ্টা করে ধোনকে কষ্ট দিলাম না। চিরিক চিরিক করে বীর্যপাত হয়ে গেল নাভির ছিদ্রমূলে। ভাবী অবাক
-অ্যাই কী করছো
-কেন
-মাল ফেলে দিয়েছো আমার নাভীতে
-তাতে কী
-তুমি আমার সোনায় ঢুকাবে না, এত তাড়াতাড়ি আউট করে দিলে কেন
-আরাম লাগলো, আর দিলাম আর কি
-তোমার আরাম লাগলো, আর আমার আরামের খবর কি, হারামজাদা (খেপে উঠলো ভাবি)
-ভাবী প্লীজ, রাগ করবেন না।
-রাগ করবো না মানে, তোকে ডেকে এনেছি নাভি চোদার জন্য, কুত্তার বাচ্চা( খিস্তি বেরুতে লাগলো ভাবীর মুখ থেকে। আমি বিপদ গুনলাম)
-ভাবী, আমি তো ইচ্ছে করে করিনি-তুই সোনায় না ঢুকিয়ে ওখানে ঢুকাতে গেলি কেন।
-একটু ভিন্ন চেষ্টা করে দেখলাম
-তোর চেষ্টার গুল্লি মারি আমি, আমাকে না চুদে তুই আজ এখান থেকে বেরুতে পারবি না। রাত যত লাগে, পারলে সারারাত থাকবি
-পারবো না ভাবী, আমাকে দশটার আগে বাসায় যেতে হবে
-ওসব ধোনফোন চলবে না। আমার কথা মতো না চললো আমি পুলিশ ডেকে বলবো তুই আমাকে রেপ করতে চেয়েছিলি, তারপর পত্রিকায় ছবি ছাপিয়ে দেবো। আমার স্বামী কি জানিস?
-কি বলছেন ভাবী এসব?
-যা বলছি তাই করবো, এদিক সেদিক করবি না। পালানোর চেষ্টা করবি না। মাল যখন ফেলে দিয়েছিস, এখন যা বাথরুম থেকে পরিষ্কার হয়ে আয়। তারপর ডিনার করে চুদবি আমাকে। কোন চালাকি করার চেষ্টা করলে গলা চেপে ধরবো।
আমি ভয় পেলাম। কী ভূলই না করলাম এই মহিলার ফাদে পা দিয়ে। আমাকে তো বেইজ্জত করে ছাড়বে। চোদা খাবার পর যদি সন্তুষ্ট না হয়, তাহলে? বলবে সারারাত থাকতে নাহলে পুলিশে ধরিয়ে দেবে। কী সাংঘাতিক মহিলা।
আমি বাথরুমে ঢুকে দরজা বন্ধ করে আয়নায় নিজের দিকে তাকালাম। জীবনে এই প্রথম একটা মেয়ের কাছে নিজেকে বিপন্ন মনে হলো। পুরুষ ধর্ষন আগে কখনো শুনিনি। আজ নিজেই ধর্ষনের স্বীকার হতে যাচ্ছি। একটা মেয়ে প্রাকৃতিক ভাবেই কয়েকজনের সাথে পর পর সেক্স করতে সক্ষম। কিন্তু পুরুষের সেই ক্ষমতা নাই। পুরুষ একবার পড়ে গেলে এক ঘন্টা অপেক্ষা করতে হয়। দুর্বল লাগে। ভাবীর যা আক্রোশ দেখলাম, আমাকে ছাড়বে না। ভয় পাচ্ছি সারারাত ধরে চুদতে বলে কি না। সারারাত চোদা আমার পক্ষে সম্ভব না। বিধ্বস্ত হয়ে যাবো। আমি এখন ভাবীর যৌন আকাংখার সহজ শিকার। তাকে তৃপ্ত করতে না পারলে রক্ষা নাই। নীচে হাত দিয়ে নরম ইদুরের মতো কালচে লিঙ্গটা দেখলাম। শক্তিহীন। ভাবীর নাভির উপর সব ছেড়ে দিয়ে শক্তিহীন হয়ে গেছে। দাড়িয়ে কমোডে পেশাব করলাম। তারপর বেসিনে ধুয়ে নিলাম নুনুটা। তোয়ালে দিয়ে মুছে বেরুলাম বাথরুম থেকে। ভাবী তখনো নেংটো শুয়ে আছে। আমার দিকে চেয়ে হাসলো। আমি আস্বস্ত হবার চেষ্টা করলাম। ভাবীর সামনে গিয়ে দাড়াতেই ভাবী হাত বাড়িয়ে নরম লিঙ্গটা হাতে নিয়ে নেড়ে চেড়ে দেখলো।
-তোমার জিনিস এত ছোট কেন
-মাল পড়ে গেছে তো
-বড় হতে কতক্ষন লাগে তোমার।
-ঘন্টাখানেক
-অতক্ষন আমি অপেক্ষা করতে পারবো না। আসো আমার দুধে এটাকে ঘষো। পাছায় ঘষো। যেখানে খুশী ঘষে এটাকে শক্ত করো। তারপর আমাকে কঠিন চোদা দাও। প্লীজ। তোমাকে জোর করতে চাই না। তুমি পুরোনো বন্ধু। আমি চাই তুমি আমার যৌবনকে ছিড়ে খাও সারারাত। আমি তোমাকে নিয়ে একটা রাত মৌজ করতে চাই। তুমি বৌয়ের কাছ থেকে ছুটি নাও। আজ রাতে তুমি আমার।
-ভাবী, তুমি এটা মুখে নাও তাহলে এটা তাড়াতাড়ি দাড়াবে
-তাই? আগে বলবে তো। তোমার এটাকে চুষতে আমার ভালোই লাগবে
-কিন্তু কামড় দিও না ভাবী। শুধু চুষবে আস্তে আস্তে। জোরে চুষলে মাল বেরিয়ে যাবে।
-আমি তোমার মাল খাবো, আমাকে দাও
-মাল মুখে ফেলে দিলে তো চুদতে পারবো না। আবার নরম হয়ে যাবে
-ওহ আচ্ছা। তাহলে মাল আসার আগে বোলো।
আমি ভাবীর দুই দুধের উপর উঠে বসলাম। ধোনটা ঢুকিয়ে দিলাম ভাবীর মুখের ভেতর। নরম ধোন। ধোন মুখে পেয়ে ভাবী পরম আনন্দে চুষতে লাগলো। আহ, এতক্ষনে আরাম লাগছে আবার। সুখ সুখ। এই মাগীকে দিয়ে লিঙ্গটা চোষাতে পারছি বলে প্রতিশোধের আনন্দ পাচ্ছি। খা মাগী খা। মিলিটারীর বৌরে আমি মুখে চুদি। আমার বিচিদুটো চুমুতে ভরিয়ে দিচ্ছে ভাবী। আমি ধোনের মাথা দিয়ে ভাবীর ঠোটে লিপিস্টিক লাগানোর মতো করতে লাগলাম। নাকের ফুটোতে দিলাম। চোখে, মুখে, কপালে, গালে, সবজায়গায় ধোন দিয়ে ঘষতে লাগলাম। অপূর্ব আনন্দ। কোন মেয়েকে চোদার চেয়ে তার মুখে ধোন ঘষার সুযোগ পেলে আমি বেশী খুশী।
দশ মিনিটের মাথায় খাড়া শক্ত হয়ে গেল ধোনটা। আমি ভাবীর গায়ের উপর উপূর হয়ে ধোনটা সোনার ছিদ্র বরাবর লাগালাম। ওখানটায় ভেজা। থকথকে। সোনার দরজাটা হা করে খোলা। বিনা বাধায় ফুড়ুত করে ঢুকে গেল। ছিদ্র এত বড়, মনে হলো এরকম তিনটা ধোন একসাথে নিতে পারবে মাগী। আমি কিছুটা নিরাশ হয়ে তবু ঠাপাতে লাগলাম। ঠাপাচ্ছি, কিন্তু ধোনে কো অনুভুতি নেই। ভেতর থেকে শুধু গরম গরম ছোয়া পাচ্ছি সোনা ছিদ্রের, সোনার দেয়ালের। চোদা যুতসই না হওয়াতে ভাবীও হতাশ। বললো
-ওটা বের করো
-কেন
-যা বলছি করো
-করলাম
-তুমি আমার সোনায় মুখ দাও
-কেন
-আরে দাও না, অত প্রশ্ন করো কেন
-তোমার ওখানে থকথকে
-হোক থকথকে, তবু তুমি ওখানে মুখ দিয়ে চোষ আমাকে
-ভাবী, আপনি বাথরুম থেকে ধুয়ে আসুন, তারপর চুষবো আমি
-আমি বাথরুমে যাই, আর তুমি পালাও এদিকে, চালাকী, না?
-আরে না না, পালাবো কেন
-বেশী কথা বলো না। যা বলছি চোষ আমাকে। নাহলে আগে যা বলেছি, পুলিশ ডাকবো। পুলিশ মেয়েদের কথাই বিশ্বাস করবে।
আমি উপায় না দেখে ভাবীর দুই রানের মাঝখানে মুখ দিলাম। দুই রানে চুমো খেয়ে, জিহবা দিয়ে চেটে দিলাম। বাল কাটে না মাগী বহুদিন। লম্বা লম্বা বাল। বাল সরিয়ে ভেতরে নজর দিলাম। মোটেও সুন্দর না।লাল গোলাপীর মিশ্রন যোনীছিদ্রে। দু আঙুলে ছিদ্রটা ফাক করলাম। নরম মাংস। গন্ধে ভরপুর। মালের গন্ধ। একসময় এই মালের গন্ধের জন্য কত পাগল ছিলাম। মেয়েদের গুদে কতবার নাক ডুবিয়েছি আনন্দে। আজ সেই জায়গায় ভর করেছে নিরানন্দ। আমি যোনীদেশে নাক ডুবিয়ে বাইরের অংশে চুমু খেতে খেতে ভাবীর চোখে তাকালাম। ভাবী চোখ বন্ধ করে আনন্দ নিচ্ছে। আমি চেষ্টা করলাম ভেতরে ঠোট না দিতে। ঘেন্না লাগছে। কিন্তু ভাবী দুই উরু দিয়ে আমার মাথা চেপেধরলো। আমি নড়া চড়া করতে পারলাম না। তারপর আমার চুলের মুঠি ধরে চেপে ধরলো সোনার মধ্যে। বললো, “খা খা। জলদি খা। জিহবা বের কর হারামজাদা। আলগা আলগা খাস কেন।” আমি ঠিক এই জিনিসটার ভয় পাচ্ছিলাম। জিহবাতে ভাবীর যোনীদেশের শ্পর্শ লাগলে কী ঘেন্না লাগবে ভাবছি। তবু উপায় নেই। জিহবা বের করে ছোয়ালাম হালকা করে। যোনীছিদ্রের একটু ভেতরে। ভাবী বললো, “আরো ভেতরে। ঢোকা- ঢোকা। পুরো জিহবা বের কোরে ঢোকা” এবার আমি চোখ বুঝে বন্য জন্তুর উন্মত্ততায় চুষতে শুরু করলাম ভাবীর সোনার ভিতর বাহির। জিহবা টা পুরো ঢুকিয়ে দিলাম। নোনটা স্বাদ, বিশ্রী লাগলো। তবু তাড়াতাড়ি করে চোষাচুষি করতে লাগলাম যাতে ভাবীর অর্গাজম হয়ে যায়। তাহলেই আমার মুক্তি। প্রায় দশ মিনিট বন্য দাপাদাপির পর ভাবীর শরীরটা মোচরাতে শুরু করলো। মিনিটখানেক পরই মাল খসলো ভাবীর। গরম গরম টাটকা রস বলকৎ বলকৎ করে ছেড়ে দিল ভাবী আমার মুখের ভেতর। আমার নাক, ঠোট, জিহবা ভাবীর রসে ভরপুর ভরে গেছে। নোনতা স্বাদ, নোনতা গন্ধ। বুঝলাম ভাবীর অর্গাজম হলো। মুখভর্তি যোনীরস নিয়েও শান্তি লাগছে কারন এবার আমার মুক্তি আসন্ন। কুলি করে ফেলতে হবে, নাহয় গলার ভেতরে চলে যাবে মালগুলো।
ভাবির চেহারায় তৃপ্তির ছোয়া। হাসি হাসি মুখ। আমার দুর্দশায় মজা পেয়েছে। আমাকে কাছে ডাকলো। বললো, ‘আসো তোমাকে একটু আদর দেই। তুমি আমাকে অনেক মজা দিলে। এই মজাটা আমাকে আর কেউ দেয় নাই জীবনে। তুমি এত্ত ভালো। তোমার কাছে আমি চিরকৃতজ্ঞ। তোমার বাড়াটা আমাকে দাও আমি চুষে দেব।’ আমি এগিয়ে গিয়ে বাড়াটা ভাবীর মুখে ধরলাম। এটা এখন সেমি হার্ড। ভাবী মুখের ভেতর নিতেই এটার বড় হতে শুরু করলো। মিনিটের মধ্যেই শক্ত আর বড় হয়ে গেল। আমি হালকা ঠেলছি চোদার ষ্টাইলে। ভাবীর মুখের ভেতর আসা যাওয়া করতে করতে দারুন অনুভুতি হলো। একটা বুদ্ধি হলো। প্রতিশোধ নেবো। মাগীর মুখের ভেতর মাল ছেড়ে দেব। ভাবী বিছানায় শুয়ে আমি খাটের কিনারে দাড়িয়ে। ভাবীর মুখের ভেতর আমার ধোন আসা যাওয়া করছে। শুধু যাওয়া আসা আর আনন্দ আমার মনে। ফুর্তি আমার ধোনে। মুটকি আমার ধোন খাচ্ছে। খা। তোকে হেডায় চুদে কোন সুখ নেই। তোর মুখেই চুদি তাই। ভাবী একদম খাটের কিনারায় শুয়েছে বলে ভাবীর ডান পাশের লাউদুধটা খাটের কিনারা বেয়ে নীচের দিকে ঝুলে ফ্লোরের কাছাকাছি চলে গেছে। শালী, কত্তবড় দুধ বানিয়েছে খেয়ে খেয়ে। লাউয়ের দোলা দেখতে দেখতে ধোন ঢোকাতে আর বের করতে লাগলাম ভাবীর মুখের ভেতর। একহাতে ঝুলন্ত লাউটা ধরে তুলে বিছানায় রাখার চেষ্টা করলাম। তুলতুলে ব্যাগের মতো লাগলো। ওজন আছে। দুই কেজির কম না। রাখতে পারলাম না, আবার ঝুলে পড়লো। আমি বোটা ধরে ঝুলিয়ে রাখলাম হাতে। অন্যদিকে কোমর নাচিয়ে ঠাপ মারছি মুখে। এই চরম আনন্দময় সময়ে আমার মাল বের হয়ে আসার সময় হলো। আমি লাউদুধ ছেড়ে দিয়ে মাগীর চুল ধরলাম দুই হাতে। মিনিটখানেক পর একদম চরম মুহুর্তে, ধোনটা ঠেসে ধরলাম পুরোটা মুখের ভিতর। চিরিক চিরক করে বীর্যপাত হলো চরম সুখের একটা আনন্দ দিয়ে। মাগী মাথা সরাতে চাইলো, আমি ঠেসে ধরে রাখলাম। খা। মনে মনে বললাম। মালের শেষ ফোটা বের হওয়া পর্যন্ত লিঙ্গটা বের করতে দিলাম না। আমার শক্তি দেখে ভাবী স্তম্ভিত। বললাম, “আমি তোমারটা খাইছি, তুমি আমারটা খাইলা। কিছু মনে কইরো না। আমি তোমারে পরেরবার আসলে আবার চুদবো। সারারাত থাকবো। তুমি খুব সুন্দর ভাবী।” মনে মনে বললাম, তোর সাথে জীবনে যদি আমি দেখা করি। খানকি মাগী।

জীবন যখন যেমন 1

Bangla Choti ভারতের পশ্চিম বঙ্গ রাজ্যে অবস্থিত, ছোট্ট শহর আসানসোল। মূলত কিছু বড় আর কিছু মাঝারি মাপের কল কারখানার জন্যই এই শহরের পরিচিতি। এখানে কয়েকটি নামকরা ইংরাজি মিডিয়াম আর কিছু সাধারণ বাংলা মিডিয়াম স্কুল, তিনটি সরকারী ডিগ্রী কলেজ এবং একটি সরকারী ইঞ্জিনিয়ারিং কলেজ আছে। এ ছাড়া, বড় ও ছোট বাজারহাট, দোকানপাট, একটি সরকারী হাসপাতাল এবং চারটি বেসরকারী নার্সিং হোম, তিনটি সিনেমা হল আর লাখ দেড়েক লোকের বাস নিয়ে আনন্দপুর। শহরের রাস্তা দিয়ে বেসরকারী বাস ও মিনিবাস, ট্যাক্সি, রিকশা, অটো প্রভৃতি যানবাহন চলাচল করে। তবে, এখানকার বাসিন্দাদের অনেকেরই নিজস্ব সাইকেল, স্কূটার, মোটরসাইকেল এবং কারো কারো মোটর গাড়ীও আছে। আনন্দপুর রেল স্টেশনটি শহরের কেন্দ্র বিন্দু থেকে বেশ কিছুটা দূরে। শুধু প্যাসেঞ্জার ট্রেন এবং হাতে গোণা কয়েকটি এক্সপ্রেস ট্রেন ছাড়া, এখানে আর কোন ট্রেন দাঁড়ায় না। তবে শহরটি জি.টি. রোডের একদম লাগোয়া। বাসিন্দারা বেশির ভাগই শহরে অবস্থিত বিভিন্ন লাভজনক শিল্প সংস্থায় চাকরি করেন। তাদের বেতনও ভালো। এদের একটা সার্বিক স্বচ্ছলতা আছে। এ কারণে, এখানে ব্যাবসাও ভালো চলে।
এই আনন্দপুরেই একটি নামকরা প্রাইভেট কোম্পানির উচ্চ পদস্থ অফিসার বিজয় দাস। বর্তমানে তার বয়স সাতচল্লিশ বছর আর তার স্ত্রী শোভা দেবীর বয়স বিয়াল্লিশ বছর। তাদের একমাত্র সন্তান সন্দীপ, পড়াশোনায় খুবই ভালো। স্কুলের গণ্ডি টপকে সে সবে আনন্দপুরের সরকারী ইঞ্জিনিয়ারিং কলেজে ঢুকেছে। ইলেক্ট্রনিক্স নিয়ে পড়ছে। বিজয় বাবু নিজেও খুবই উচ্চ শিক্ষিত। নামকরা সরকারী কলেজ থেকে ইঞ্জিনিয়ারিং এবং ম্যানেজমেন্ট পাশ করেছেন। তিনি দারুন কর্মদক্ষ অফিসার। কোম্পানিকে, বছরে কোটি কোটি টাকা লাভ করান। তাই, কোম্পানিতে তাঁর কদরই আলাদা।
তবে, তার আরও একটি গুণ আছে। তিনি ভীষণ চোদনখোর ব্যাটাছেলে। শোভা দেবীর যখন বয়স কম ছিল, তখন বিজয় বাবু তাকে দিনে নিয়মিত দু’বার করে চুদতেন। কিন্তু বিজয় বাবুর একটি বদভ্যাস আছে। তার কণ্ডোম ব্যাবহারের অভ্যাস নেই। তাই স্ত্রীকে নিয়ম করে গর্ভনিরোধক বড়ি খাওয়াতেন। এতে চোদাচুদির সময় উভয়েরই চরম সুখ মিলত। এরকম চোদাচুদি করতে করতে যথা সময়ে তাদের একটি পুত্র সন্তান হয়, যার নাম সন্দীপ। কিন্তু নিয়মিত গর্ভনিরোধক বড়ি সেবনের ফলে, শোভা দেবী বছর কয়েকের ভিতর বেশ মুটিয়ে যেতে আরম্ভ করেন এবং তার শরীরে একটা থলথলে ভাব চলে আসে।
মুটিয়ে যাওয়ার ফলে স্বামীর কাছে শোভা দেবীর কদর আস্তে আস্তে কমতে শুরু করে। বেশির ভাগ পুরুষের মতই বিজয় বাবুরও মত হল, একটা স্লিম, সেক্সি মেয়েছেলেকে চুদে যতটা মস্তি পাওয়া যায়, একটা মোটা, থলথলে মাগীকে চুদে তার অর্ধেক মস্তিও পাওয়া যায় না। স্ত্রীর প্রতি চোদার আগ্রহ কমে আসায়, তিনি অন্য পাখী শিকারের ধান্দা শুরু করেন। বিজয় বাবুর শিকারি চোখ এদিক ওদিক ঘুরতে শুরু করে।
তবে তাকে বেশি দূর যেতে হল না। অফিসে, তার প্রাইভেট সেক্রেটারি তৃপ্তি মণ্ডল অবিবাহিতা মহিলা। বয়সে বিজয় বাবুর চেয়ে বছর বারো ছোট। বিজয় বাবুর আগের প্রাইভেট সেক্রেটারি চন্দনা রায় রিটায়ার করে যাওয়ায়, কোম্পানি তৃপ্তিকে অস্থায়ী ভাবে নিয়োগ করেছে। চাকরির প্রথম দিন সকালে অফিসে এসে, বিজয় বাবুর চেম্বারে ঢুকে, সাদা ঝকঝকে দাঁতের এক গাল হাসি হেসে যখন সে বলল, “গুড মর্নিং স্যার। আমি আপনার নতুন প্রাইভেট সেক্রেটারি, তৃপ্তি মণ্ডল,” তখন বিজয় বাবু তাকে একবার মাথা থেকে পা পর্যন্ত, আর একবার পা থেকে মাথা পর্যন্ত বেশ কয়েকবার খুঁটিয়ে খুঁটিয়ে দেখলেন। প্রথম দর্শনেই মেয়েটিকে তার দারুন পছন্দ হয়ে গেল।
তৃপ্তি একদম স্লিম, ছিপছিপে, সেক্সি মাল। গায়ের রঙ হাল্কা শ্যামবর্ণ। কিন্তু চেহারায় চটক আছে। কপালে একটা বড়, খয়েরী রঙের বিন্দি। প্লাক করা সরু ধনুকাকৃতি ভ্রুর নীচে কাজল টানা বড় বড় চোখ। টিকলো নাকে একটা সরু সোনার রিং। পুরুষ্ট ঠোঁটে বাদামী লিপস্টিক। হেনা লাগানো হাল্কা বাদামী রঙের চুল বব ছাঁট করে ছাঁটা। দুই কানে ও গলায় অনাড়ম্বর এথনিক গহনা। ডান হাতে একটি মোটা এথনিক বালা। বাঁ হাতের কব্জিতে চামড়ার ফিতে দেওয়া হাতঘড়ি। হাতের আঙ্গুলের নখগুলো লম্বা লম্বা। হাতের এবং পায়ের সবকটি আঙ্গুলের নখই বাদামী রঙের নেল পালিশে রঞ্জিত। ডান হাতের মধ্যমায় একটি সরু সোনার আংটি। কাঁধের থেকে লম্বা ফিতে দিয়ে ঝোলানো একটি হালফ্যাশানের চামড়ার ব্যাগ। পায়ে হাই হীল কোলাপুরী চটি।
তৃপ্তির মাই দুটো মাঝারি মাপের, কিন্তু টাইট। পাছাটিও সুগঠিত, একদম ঠাসা এবং সম্পূর্ণ গোলাকার। কোমরটা পাতলা। পেটে কোন মেদবাহুল্য নেই। পরণে একটি সিন্থেটিক শাড়ির সাথে ম্যাচ করানো খুব সরু পট্টির স্লিভলেস ব্লাউজ। এক কথায়, ঠিক যেমনটি বিজয় বাবুর মনপসন্দ্। বিজয় বাবুর আরও সুবিধা হয় কারণ তৃপ্তির চাকরিটা পাকা নয়। কোম্পানি তাকে টেম্পোরারি হিসাবে নিয়োগ করেছে। এক বছর তার কাজ দেখে সন্তুষ্ট হলে, তবেই কোম্পানি তার চাকরি পাকা করবে।
চাকরির প্রথম দিন থেকেই তৃপ্তিকে বিজয় বাবুর প্রাইভেট সেক্রেটারি হিসাবে পোস্টিং করা হয়েছে। এরকম একটা নামকরা কোম্পানির চাকরি পাকা করতে, সে সব রকম চেষ্টা করে। সে কাজে দক্ষ। এম.এ. পাশ। ভালো কম্পিউটার জানে। অনর্গল ইংরাজিতে কথা বলতে পারে। এ ছাড়াও, সে রোজ নিত্যনতুন পোশাক পরে, খুব সাজগোজ করে অফিসে আসে। শুধু কাজে নয়, সাজেও সে তার বসকে খুশি করতে চায়। এক বছর শেষ হলে বিজয় বাবুই রিপোর্ট লিখবেন যে তৃপ্তির চাকরিটা পাকা হল না খোয়া গেল।
বিজয় বাবুও পুরো মাত্রায় তৃপ্তির এই অবস্থার সুযোগ নিতে ছাড়েন না। তিনি মনেপ্রাণে বিশ্বাস করেন যে একটা প্রাইভেট কোম্পানির উচ্চ পদস্থ অফিসারের তার প্রাইভেট সেক্রেটারিকে নিজের শয্যা সঙ্গিনী বানানোর ষোল আনা হক আছে। এতে অন্যায়ের কিছুই নেই। শুধু কাজের জন্যই প্রাইভেট কোম্পানি গুলো এই সব সেক্সি মেয়েদের প্রাইভেট সেক্রেটারির চাকরিতে নিয়োগ করে না। বসের মনোরঞ্জন করাটাও তাদের আবশ্যিক কর্তব্যের মধ্যে পড়ে।
ওনার আগের প্রাইভেট সেক্রেটারি চন্দনা রায় ছিল বুড়ি মাগী। রোজ খুব সেজে গুজে অফিসে আসত। বিজয় বাবু চাইলে, চন্দনা দেবী হয় তো তাকে চুদতেও দিত। কিন্তু বিজয় বাবুর একবারের জন্যও ওই ষাট বছরের বুড়ি মাগীকে চোদার রুচি হয় নি। যদিও লোকে বলে যে বছর দুয়েক আগে, চন্দনা দেবী যখন বলদেব সিংহ সাঁধু নামে কোম্পানির চীফ সিকিউরিটি অফিসারের প্রাইভেট সেক্রেটারি ছিল, তখন মিস্টার সাঁধু বেশ কয়েকবার রাত্রি বেলায় অফিসের সিকিউরিটি তদারকির কাজে তাকে সহায়তা করার জন্য ফোনে চন্দনা দেবীকে বাড়ী থেকে অফিসে একটু বেশি রাতে ডেকে পাঠাতেন।
সারাদিন অফিস করে ছুটির পর বাড়ী গেলেও, বসের নির্দেশে, চন্দনা দেবীকে আরও একবার, বেশি রাতে অফিসে আসতে হত। অবশ্য মিস্টার সাঁধু তাকে বাড়ী থেকে নিয়ে আসা এবং আবার বাড়ী পৌঁছে দেওয়ার জন্য অফিসের গাড়ীর বন্দোবস্ত করে দিতেন। সিকিউরিটির তদারকি সেরে, নিজের চেম্বারে নিয়ে এসে, মিস্টার সাঁধু ধীরেসুস্থে চন্দনা দেবীকে চুদতেন অথবা তার পোঁদ মারতেন। নাইট ডিউটির দারোয়ান ছাড়া তখন অফিসে আর কেউ নেই। নিঃসন্দেহে এই ধরণের কাজের জন্য এটাই প্রকৃষ্ট সময়।
মিস্টার সাঁধু ছিলেন শিখ পাঞ্জাবী। তার উপর রিটায়ার্ড সেনা অফিসার। অন্য পাঞ্জাবীদের মতই, রসালো বাঙ্গালী মেয়েদের মোটা মোটা গাঁড় মারতে তিনি খুবই পছন্দ করতেন। অবশ্য মিস্টার সাঁধু অন্যভাবে চন্দনা দেবীকে পুষিয়ে দিতেন। বেশি রাতে ওই এক ঘণ্টার জন্য অফিসে আসার জন্য, সে এক একবার পাঁচ হাজার টাকা করে ওভারটাইম পেত। আর নাইট ডিউটির দারোয়ানগুলো যারা সারা রাত জেগে পাহারা দিত, কিন্তু একটি পয়সাও বেশি পেত না, তারা কপাল চাপড়াত। মিস্টার সাঁধু রিটায়ার করার পরই, চন্দনা দেবীকে বিজয় বাবুর প্রাইভেট সেক্রেটারি করা হয়।
তৃপ্তির চাকরিতে ঢোকার মাস খানেক পরে, একদিন ওকে নিজের চেম্বারে ডেকে এনে ডিক্টেশান দিতে দিতে বিজয় বাবু কখনও আলতো করে তার পাছায়, আবার কখনও তার কোমরে হাত রাখতে শুরু করলেন। কোন বাধা না পেয়ে তিনি ধীরে ধীরে আরও এগিয়ে গেলেন। কাজের আছিলায় তৃপ্তিকে একটু বেশী রাত অবধি অফিসে আটকে রেখে, কাজের প্রশংসা করার ছলে তাকে জড়িয়ে ধরা বা গালে একটা চুমু দেওয়া শুরু হল। তৃপ্তির বুঝতে অসুবিধা হল না যে তার বস তার কাছে কাজ ছাড়া আর কি চায়। তবে যা কিছুই হচ্ছে, সবই উপরে উপরে। এতে যদি চাকরিটা পাকা হয়, তো আপত্তির কোন কারণ নেই। কাজেই, সে বিজয় বাবুকে কোন বাধা তো দিলই না, উল্টে কিছুটা প্রশ্রয়ই দিতে শুরু করল। কিন্তু বিজয় বাবু যে কত দূর যেতে পারেন, সে সম্বন্ধে তৃপ্তির কোন ধারণাই ছিল না।
তৃপ্তির প্রশ্রয় পেয়ে বিজয় বাবুর সাহস বেড়ে গেল। লোকটা পাক্কা হুলো বিড়াল। মাছের গন্ধ পেয়ে দিনরাত ছোঁকছোঁক করা শুরু করলেন। একদিন প্ল্যান করে, অফিস ছুটি হয়ে যাওয়ার পরও, কাজের আছিলায় তৃপ্তিকে একটু বেশী রাত অবধি আটকে রাখলেন। তৃপ্তি বিজয় বাবুর চেম্বারের সংলগ্ন একটি ছোট ঘরে বসে। উভয়ের নিজস্ব ঘরের বাইরের দরজা দুটি ছাড়াও, দুই ঘরের মধ্যে সরাসরি যাতায়াত করার জন্য একটি পৃথক দরজা আছে। বিজয় বাবু ডেকে পাঠালে, তৃপ্তি ওই দরজা দিয়েই বিজয় বাবুর চেম্বারে প্রবেশ করে।
অফিস থেকে সবাই বেড়িয়ে গেছে। কিন্তু বিজয় বাবুর টেবিলে স্তূপাকার ফাইল, যার মধ্যে একটি হাতে নিয়ে তিনি একাগ্র মনে পড়ছেন। আসলে ফাইলটা আছিলা মাত্র। তিনি শুধু সঠিক সুযোগের জন্য অপেক্ষা করছেন। ঘড়ির কাঁটার দিকে এক পলক তাকিয়ে, বিজয় বাবু তাঁর চেম্বারের বাইরে এসে দাঁড়ালেন। গোটা অফিস সুনসান। বিজয় বাবুর ঊর্ধ্বতন কর্তারাও বাড়ি চলে গেছেন। শুধু তার চেম্বারের বাইরে একটি কাঠের স্টুলের উপর প্রভুভক্ত কুকুরের মত ঠায় বসে আছে তাঁর বিহারী আর্দালি, রামকৃপাল সিং। তাকে উদ্দেশ্য করে বিজয় বাবু বললেন, “রামকৃপাল, আমার আজ অনেকগুলো দরকারি কাজ শেষ করতে হবে। তাই বেরোতে দেরী হবে। তোমাকে অতক্ষণ অপেক্ষা করতে হবে না। তুমি বাড়ি যাও। তবে সুনীলকে নিচেই অপেক্ষা করতে বলে দিও।” “জী সাহেব,” বলে একটি সেলাম ঠুকে রামকৃপাল স্টুল ছেড়ে উঠে দাঁড়াল এবং আস্তে আস্তে বেড়িয়ে গেল।

অফিস থেকে বিজয় বাবুকে চব্বিশ ঘণ্টা ব্যাবহারের জন্য একটি দামী গাড়ী এবং ড্রাইভার দেওয়া হয়েছে। ড্রাইভারের নাম সুনীল। তার সাহেবের অনেক সময়ই বাড়ি ফিরতে দেরী হয়। কখনও অফিসে কাজের চাপের জন্য বেরোতে দেরী হয়। আবার কখনও সাহেব মেমসাহেবকে নিয়ে অন্য সাহেবদের বাড়িতে কিংবা ক্লাবে পার্টিতে যান। তখনও দেরী হয়। তবে দেরী হলে তারই লাভ। সে অনেক টাকার ওভারটাইম পায়। রামকৃপালের কাছে সে যখন শুনল যে আজও তার সাহেবের দেরী হবে, সে বেশ খুশিই হল। আজও তার ওভারটাইম হবে।

অদ্ভুত অসুখের অদ্ভুত চিকিৎসা – ১

Dharabahik Bangla choti golpo

মুখবন্ধঃ এই ঘটনাটি আমার জীবনের সবচেয়ে উল্লেখযোগ্য একটি ঘটনা. যেটি আমাকে আমার পরবর্তী জীবনের জন্য বিশেষ গুরুত্ব বহন করে চলেছে. এই ঘটনাটি না ঘটলে হয়ত আমি আমার জীবনের মাঝ পথে মুখ থুবড়ে পরতাম. বিশেষ করে যৌনতার দিক থেকে আজও আমি যে কোনও বয়সী নারীর কাছে কিভাবে অপরাজেয়, এই ঘটনায় প্রকাশ করলাম.

বদরুল আমার ছোটবেলার বন্ধু, খুবই ঘনিস্ঠ বন্ধু. বদরুল কে শুধু বন্ধু বললে বোধ হয় একটু কম বলা হয়, ওদের পরিবারের সাথেও আমার হৃদ্যতা নিজের পরিবারের মতই. বদরুলের ৭ বছরের বড় বোন ফরিদা আপার বিয়ে হয়েছিল ১৯ বছর বয়সে. ৬ বছরের মাথায় ডিভোর্স হয়ে গেল. কারন, ফরিদা আপা বাঁজা, মা হওয়ার কোনও সম্ভাবনাই নেই দেখে ফরিদা আপার স্বামী আর শ্বশুরবাড়ির লোকেরা ফরিদা আপাকে ডিভোর্স দিয়ে বিদায় করে দিল. সেই থেকে ফরিদা দিদি বাপের বাড়ি অর্থাৎ বদরুলএর সাথেই আছে. ফরিদা দিদি খুবই রক্ষণশীল আর বদমেজাজি মহিলা. যে কারনে আমি সচরাচর তার সামনে যেতে ভয় পি, ফরিদা আপাও আমার সাথে খুব একটা কথা বলে না. আমি যতদুর সম্ভব একটু দুরত্ব রেখে চলার চেষ্টা করি.

বদরুলের বাবা-মা ফরিদা আপার আবার বিয়ে দেওয়ার আপ্রান চেষ্টা চালিয়ে যাচ্ছে. কিন্তু জেনেশুনে কে বাঁজা মেয়েকে কে বিয়ে করবে? তাছাড়া ফরিদা আপার বদ্মেজাজের কথা সবাই জানে. অন্যদিকে ফরিদা আপা খুব একটা সুন্দরিও নয় আর গাঁয়ের রঙটাও ফর্সা নয়, তাই বলে ফরিদা আপা কালোও নয়, শ্যামলা. এই শ্যামাঙ্গিনী মহিলা হঠাৎ করেই এক অজ্ঞাত অসুখে পড়ল. খায় না, ঠিকমতও ঘুমায় না, কারো সাথে ভালো করে কোথাও বলে না, অকারনে মেজাজ খিটমিট করে, বাসনপত্র আছড়ে ভাঙে. অনেক রকমের ডাক্তার, কবিরাজ, বৈদ্য দিয়ে চিকিৎসা করানো হল কিন্তু ফরিদা আপা সুস্থ হল না. পরে ধারনা করা হল ফরিদা আপার উপরে দুই জিনের আত্মা ভর করেছে. ফরিদা আপা এমনিতে শারীরিকভাবে সুস্থ কিন্তু মানসিকভাবে উনি অসুস্থ, আবার পাগলও নয়. অদ্ভুত তার অসুখ.

বদরুল আবার এক সাধু বাবার সাগরেদ. সীতাকুণ্ড পাহাড়ের জঙ্গলের ভিতরে একটা বিশেষ জায়গায় সেই সাধুর আস্তানা. বদরুলের এই সাধুভক্তি অবস্য ওর বাবা-মা জানত না. অবশেষে বদরুল নিজের খোলস ভেঙে বেড়িয়ে এসে ওর বাবা-মাকে জানালো যে ওর সাধু বাবা নাকি এ ধরনের রগির চিকিৎসা করে থাকে এবং শতভাগ রোগী সুস্থ হয়ে যায়, সেজন্য ও ফরিদা আপাকে ওর সাধু বাবার কাছে নিয়ে যেতে চায়. উপায়ন্তর না দেখে বদরুলের বাবা-মা অবশেষে রাজি হলেন কিন্তু শর্ত জুরে দিলেন যে ওদের সাথে আমাকেও নিতে হবে. কারন ফরিদা আপার এখন যে অবস্থা, যদি রাস্তার মধ্যে উল্টাপাল্টা কিছু করে বসে তখন বদরুল একা সামলাতে পারবে না. তাছাড়া বদরুলকে ওনারা ঠিক শতভাগ বিশ্বাস করেন না.

তার অবস্য বেশ কিছু কারন ছিল, বদরুল এরই মধ্যে এ ধরনের ঘটনা তৈরি করে বাবা-মার কাছে থেকে টাকাপয়সা হাতানোর চেষ্টা করেছে কয়েকবার. যায় হোক ফরিদা আপাও আমাকে সঙ্গে নিতে মানা করল না. আমরা তিনজনে রওনা হলাম এবং কোনরকম সমস্যা ছারায় নিরাপদে বদরুলের সেই সাধুর আখড়ায় পোঁছে গেলাম. তবে পৌছাতে বেস কসরত করতে হল. প্রথমে ট্রেন, তারপর বাস, তারপর রিক্সা এবং অবশেষে প্রায় তিন কিলোমিটার জংলা হাঁটা পথ. আমার ভয় হচ্ছিল ফরিদা আপা হইত শেষ পর্যন্ত বেঁকে বসবে, কিন্তু সেও দিব্বি তিন কিলোমিটার বিনা বাক্যে হেঁটে এলো. বরঞ্চ ফরিদা আপার মধ্যে এক ধরনের অতি উৎসাহী ভাব লক্ষ্য করলাম.

আমি ভেবেছিলাম জঙ্গলের ভিতর সাধু বাবার আস্তানাটা সম্ভবত খড়, গাছ, লতাপাতা দিয়ে তৈরি কাঁচা কুঁড়েঘর টাইপের হবে. কিন্তু আমি অবাক হয়ে দেখলাম যে বিশাল জায়গা জুরে টিনের শেড, আধ পাকা বিল্ডিং. জেনারেটার দিয়ে বিদ্যুতের ব্যবস্থা করা হয়েছে. আধুনিক প্রায় সব কিছুই নিজের ব্যবস্থাপনা করে নিয়েছে সে. সাধু বাবার অ্যায় রোজগার যে ভালই সেটা বোঝা গেল. আমাদের আগে আরেকটা রোগী এসেছে, তাকে বিদায় করতে প্রায় ঘন্তাখানেক লেগে গেল. তারপর বদরুল এই সাধুর পুরানো ভক্ত. আমরা বাইরে বসে রইলাম, প্রায় ১৫ মিনিট পর বদরুল আমাদেরকে সাধু বাবার খাস কামড়ায় ডেকে নিয়ে গেল.

সাধু বাবার বয়স কম করে হলেও ৬৫ বছরের কম হবে না. গাঁয়ের রঙ বেস ফর্সা, বিশাল লম্বা চুল আর মুখ ভর্তি দাড়ি গোঁফের জঙ্গল, সব পেকে সাদা. চোখ দুটো দেখলেই যে কেও বলতে পারবে এ শালা আসতো বদমাশ. কারন ফরিদা আপার দিকে তাকাতেই ওর চোখ দুটো লোভে চকচক করে উঠল. উঠবেই তো ফরিদা আপার বাচ্ছাকাচ্ছা হয়নি, ২৭-২৮ বছরের মচমচে যুবতী, ৩৬ ডি সাইজের মাই দুটো ভরাট আর নিটোল, নিরেট. ফরিদা আপার চেহাড়ায় একটু ঘাটতি থাকলেও শরীরের সম্পদের কোনও ঘাটতি নেই. ভালো করে তাকালে আমার নিজেরই মাঝে মাঝে শরীর গরম হয়ে যায়, তো অন্যকে কি বলব. আমার মনে হয় ফরিদা আপার স্বামী হয়ত ঠিকমতও চুদতেই পারে নি. আপাকে দেখে অনেকটা সেইরকমই লাগে, রস যেন চুইয়ে চুইয়ে পড়ছে.

মাখে মাঝে মনে হয় ফরিদা আপাকে একবার ধরে ধুমসে চুদে ফ্যাদা বেড় করে দিই, তারপর ওর ভোদার পকেট থকথকে আঠালো রসে ভরে দিয়ে দেখি বাচ্চা না হয়ে যায় কোথায়. সাধু বাবা মাঝে ন্মাঝেই ফরিদা আপার ব্লউসের ফাঁক দিয়ে ঠেলে বেড়িয়ে থাকা দুধের একটু অংসের দিকে লোভী দৃষ্টিতে তাকাচ্ছিল. আমার কেমন যেন সন্দেহ হল, আমি তখনই সিদ্ধান্ত নিলাম, আমাকে গোয়েন্দাগিরি করতে হবে.
সাধু বাবার ভেতরে কোথায় যেন একটা রহস্য লুকিয়ে আছে, সেটা খুজে বেড় করতে হবে, তবে খুব সাবধানে. ধরা পরে গেলে মেরে পুঁতে রেখে দেবে, এদের সাথে অনেক সাগরেদ থাকে আশেপাশে লুকিয়ে. ডাক দিলেই হায়নার মত হাম্লে পড়বে, কারন এদের ব্যবসার ক্ষতি হবে এমন কিছু বরদাস্ত করবে না.

সাধু বাবা আমাদের সামনেই ফরিদা আপাকে কয়েকটা প্রশ্ন করল. আমার কাছে প্রশ্নগুলো খুবই মামুলি বলে মনে হল. তেমন গুরুত্বপূর্ণ কোনও কথায় সাধু বাবা বলল না. বেল বাজিয়ে তার এক সাগরেদকে ডেকে এনে কাগজ কলম চাইল. সেই কাগজে সাধু বাবা কিছু জিনিসের নাম লিখল, সম্ভবত বনজ ঔষধ হবে হয়ত. তারপর সেই কাগজটা বদরুলকে দিয়ে শহর থেকে জিনিসগুলো কিনে আনতে বলল. আমি সন্দেহ করলাম, নিশ্চয় ব্যাটার কোনও বদ মতলব আছে, বদরুলকে শহরে পাঠাচ্ছে শুধু এখান থেকে সরিয়ে দেওয়ার জন্য. আমার ধারনা ও ব্যাটা এমন কিছু জিনিসের নাম লিখেছে যেগুলি খুজে বেড় করে সব যোগার করে আনতে আনতে রাত হয়ে যাবে. বদরুল আমাকে ফরিদা আপার দিকে খেয়াল রাখতে বলে জিনিসগুলো কিনে আনতে সহরে গেল.

সাধু বাবার আচার আচরন দেখে ক্রমে আমার সন্দেহ গাড় হতে লাগল, আমি খুব সতর্ক রইলাম. সাধু বাবার খাস কামড়ায় আমরা তিনজন ছাড়াও দরজায় একজন পাহাড়াদার ছিল. পাহাড়াদার ব্যাটাকে দেখলেই বোঝা যায়, খুব শক্তিশালী আর ভয়ঙ্কর লোক. সাধু বাবা আবার সেই সাগরেদকে বেল বাজিয়ে ডাকল, তারপর ওকে আমাদের বিশ্রামের ব্যবস্থা করতে নির্দেশ দিল.

তারপর সাগরেদের কানে কানে ফিসফিস করে দুটো কথা বলল. আমি যেন ষড়যন্ত্রের আভাস দেখতে পেলাম. সাগরেদ লোকটা আমাদের দুজনকে একটা রুমে নিয়ে গেল. রুমের দুদিকে দুটো বিছানা, ফরিদা আপা আমাকে ধমক দিয়ে বলল, “এই ছেলে, তুই এখানে কেন? যা বাইরে যা. হারামজাদার হাড্ডি, তোর সাথে এক ঘরে আমি শোবো নাকি? যা বের”.

আমি সুড়সুড় করে বেড় হয়ে এলাম. দীর্ঘ ভ্রমনের পর শরীরটা ম্যাজম্যাজ করছিল বলে আমি একটু হাঁটাহাঁটি কড়ার জন্য বাইরে চলে গেলাম.

হঠাৎ কি মনে করে আমি সাধুর ডেরার পিছন্দিকে চলে এলাম. পিছনদিকে ঘন জঙ্গল, এদিকে কেউ সচরাচর আসে বলে মনে হল না. আমাদের যে ঘরে বিশ্রাম করতে দেওয়া হয়েছে সেটা, বাইরের ঘর আর সাধুর খাস কামরা ছাড়াও আরও তিনটে ঘর আছে. ডেরার পাশ দিয়ে লতাগুল্ম আর আগাছার ঘন বেড়া. আমি সাবধানে পা টিপে টিপে বেড়ার ভেতরে গেলাম. তারপর চুপিচুপি পেছন ন্দিকের জানালা দিয়ে প্রত্যেকটা ঘরে উঁকি মেরে মেরে দেখতে লাগলাম.

সবগুলো ঘোরের পেছনের জানলা খোলা, কেবল সাধুর খাস কামরা আর আরেকটা ঘোরের জানালা বন্ধ. খাস কামায় সাধু আছে সেটা তো জানিই, তাহলে আর একটা কামড়ায় কি আছে. কাম্রাতা সাধুর খাস কাম্রার সাথেই. আমি সাবধানে নিচু হয়ে জানালার কার্নিশের নীচ দিয়ে তাকালাম. জানালাগুলো কাঠের, নীচ দিয়ে একটু ফাঁকা আছে, আমি সেদিক দিয়ে দেখার চেষ্টা করলাম.

কি দেখলাম Bangla choti golper পরের পর্বে বলব ….

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মেয়ে আর মেয়ের মাকে চোদা Ma Meya K Aksate Choda

লীখন খুবই মনের আনন্দে আছে, কারন লীখন কচি মেয়েকে চুদতেছে আজ প্রায় তিন বছর যাবত। লীখনের সাথে প্রেমার মার পরিচয় হয় ইন্টার্নেটের তাগ ওয়েব সাইডের মাধ্যমে, প্রথমে বন্ধুত্ব পরে খুবই ঘনিষ্ট সম্পর্ক হয় আচলের সাথে (প্রেমার মায়ের নাম আচল কথা), লীখনের চেয়ে ১২ বছরের বড় প্রেমার মা, তারপরেও লীখন আর প্রেমার মার বন্ধুত্ব অনেক গভীর। একজন আরেকজনের সাথে কথা না বলে একদিনও থাকতে পারে না। প্রেমার বাবার সাথে প্রেমার মার ডিভোর্স হয় যখন প্রেমার বয়স দুই বছর। আচল ভাবী পরে আর বিয়ে করেনি। ভালো কোন ছেলে পায়নি তাই বিয়ে আর করেনি। কিন্তু আচল ভাবীর সাথে মহিম নামের এক লোকের পরিচয় হয়,

পরে তাদের মাঝে প্রতিদিন চোদা-চুদি হয়ে থাকে। যাক সেই কথা, আসল কথায়ে আসা যাক, আচল ভাবী একদিন লীখনকে তাদের বাসাতে দুপুরের খাবারের জন্যে আমন্তন করে ছিলো, সেই থেকে লীখন প্রেমাদের বাসায় প্রতিদিনই যেত, আর এই আসা যাওয়ার মাধ্যমে লীখনের সাথে প্রেমারও পরিচয় হয়, প্রেমা লীখনকে কাকু বলে
ডাকতো, এইভাবে লীখন আর প্রেমা একজন আরেকজনের খুবই কাচা-কাছি চলে আসে, পরে লীখন আর প্রেমার মাঝে দৈহিক মিলনও হতে থাকে। এইভাবে প্রায় বছর খানিক কেঁটে গেলো। আর আচল ভাবী কেমন জানি একটু একটু সন্দেহ করা শুরু করেছে। খুবই স্বাভাবিক – গত দুই বছরে প্রেমার স্তন আর পাছা যেভাবে বেড়েছে আর এখন যা হয়েছে। প্রেমা এখন আর লীখনকে কাকু বলে ডাকে না। প্রেমাকে যখনই সেই কথা বলা হয় তখনই ও চোদন খেতে খেতে বলল যে ‘রাখো তো, মাকে অত পাত্তা দিবা না। মা যে দুপুর বেলায় আমি স্কুলে চলে যাওয়ার পর মহিম কাকুকে বাসায় ডেকে তারা চোদা চুদি করে তার বেলায় কি শুধুই জিরো?’

‘মহিম কাকু কে?’
‘বাবার সাথে এক সময় ব্যবসা করতো।’
একদিন দুপুরে লীখনের মোবাইল ফোনে কল পেল।
‘’লীখন আমি তোমার আচল ভাবী বলছি।’
‘ও ভাবী, হ্যাঁ বলুন?’
‘তুমি এক্ষুনি একটু আসো তো।’

‘এখন দুটো বাজে, ভার্সিটি ৫টায় ছুটির পর গেলে হবে না?’
‘নাগো দেরী হয়ে যাবে। তোমার তো এখন টিফিন পিরিয়ড। আমার এখানে তুমি খাবে চলে আসো।’
যাক, লীখন ভাবল হয়ত আচল ভাবীর শরীর খারাপ। সে ভাবীর বাসায় গিয়ে কলিং বেল বাজাল। ভাবী বেরিয়ে এল। দেখেতো অসুস্থতার কোন চিহ্নই চোখে পড়ল না। একটা হাতকাটা ডিপনেক পাতলা নাইটি পরে আছে। ভিতরে ব্রা পেন্টি কিছু নেই। মাই, পাছা সব পরিষ্কার বোঝা যাচ্ছে। লীখনের ধোন তো ৯০ ডিগ্রী হয়ে গেলো। যাই হোক লীখন সোফায় বসল।
ভাবীঃ দেখো তো তোমাকে এখন ডাকার কারণ- বিকালে প্রেমা থাকবে, তাই বলা যাবে না।
লীখনঃ ব্যাপারটা কি ভাবী?
ভাবীঃ দেখো লীখন, তোমার আর প্রেমার চোদনলীলা আমি সব জানি। তুমি আমার মেয়েটাকে এভাবে নষ্ট করছ কেন? ওতো এখনো বাচ্চা মেয়ে মানুষ, মোহে পড়ে আছে।
লীখনঃ আমি প্রেমাকে বিয়ে করব।
ভাবীঃ মেয়ের মার বিনা অনুমতিতে কি তুমি বিয়ে করবে নাকি?
লীখনঃ সেটার সময় হলেই আমরা অনুমতি চাইব।
ভাবীঃ ঠিক আছে আগে খেয়ে নাও, তোমার লাঞ্চ তো এখনো হয়নি।

খাওয়ার পর লীখন উঠতে যাবে ভার্সিটিতে ফেরত যাবার জন্য। আচল ভাবী সোফায় বসে উঃ করে বসে পড়ল। কি হল ভাবী, বলে লীখন এগিয়ে গেল।

ভাবীঃ কোমরে একটা ফিক ব্যথা হয়েছে।
লীখনঃ ঘরে মুভ আছে?
ভাবীঃ আছে, কিন্তু প্রেমা না আসা পর্যন্ত কে লাগিয়ে দেবে?
লিখনঃ যদি কিছু না মনে করো তাহলে আমি লাগিয়ে দিচ্ছি।
ভাবীঃ সেতো আমার পরম সৌভাগ্য।
ভাবী ডিভানের উপর উপুড় হয়ে শুলো।
লীখনঃ কিন্তু ভাবী, তোমার নাইটিটা একটু কোমরের উপরে উঠাও?
ভাবীঃ এর জন্য আলাদা অনুমতি দরকার?

লীখন কোন কথা না শুনে ভাবীর নাইটিটা কোমরের উপর তুলে দিল। লীখন ভাবীর কোমর মালিশ করবে কি, দলদলে ধামসানো পাছা দেখে চিত্তির ফাক। মনে মনে ঠিক করল আজ ভাবীকে না চুদে ও যাবে না। কোমর মালিশ করতে করতে ইচ্ছে করে পাছাও টিপে দিচ্ছে। আচল ভাবী কোন আপত্তি করছে না। বরং উল্টো বলল ‘পিছনটা বেশ আরাম লাগল। সামনের দিকটা একটু দেখো ভাই।’

লীখন সাথে সাথে ভাবীকে চিৎ করে শুঁইয়ে দিল। লীখন মালিশ করবে কি – কতদিন এই রকম গুদ কল্পনা করেছে চোদার জন্য। পরিষ্কার বাল কামানো। মসৃণ, গুদের ঠোঁট দুটো গোলাপের পাপড়ি, ৪৪ বছরের মাগীর খানদানী সতেজ গুদ দেখে লীখনের মাথার মধ্যে ভো ভো শুরু হয়ে গেছে। ভাবী চোখ ভোঁজা অবস্থায় বলল, ‘কি ব্যপার লীখন, আমারটা কি প্রেমার চেয়ে খুব খারাপ নাকি?’ লীখনের সব বাঁধ ভেঙে গেল। ভাবীকে জড়িয়ে ধরে চুমু খেতে লাগল আর ঠোঁট চুষতে চুষতে বলল, ‘ভাবী তোমার এই গুদের কাছে প্রেমার গুদের কোন তুলনায় হয় না।’
ইতিমধ্যে ভাবীর নাইটি পুরো খুলে ফেলেছে, ভাবীও লীখনের প্যান্ট জামা সব খুলে ফেলেছে। লীখন ঠিক করতে পারছে না, কোনটা ছেড়ে কোনটা ধরবে- মাই না গুদ না পাছা। লীখন ডান মাইটা চুষতে থাকল আর বা দিকের খয়েরী নিপল মৃদু ভাবে খুঁটতে থাকল। ভাবী উঃ আঃ স্বরে শীৎকার করতে থাকল। তলপেটে হালকা চর্বি জমায় ঐ জায়গা আকর্ষণীয়। লীখন তলপেট রগড়াতে থাকল। গুদে আঙুল দিয়ে দেখে হড়হড় করে রস কাটছে। লীখন পাগলের মত জিভ ঢুকিয়ে দিয়ে রস খেতে থাকল। ভাবী লীখনের মুণ্ডিটা হালকা করে চাপ দিয়ে বলল ‘একা রস খেলে হবে? ৬৯ পজিশনে লীখনকে শুইয়ে দিয়ে লীখনের ধোনটা মুখে নিয়ে আইসক্রিমের মত চুষতে থাকল। আর লীখন তো বিরামহীন চুষে চলেছে। ভাবী বলল ‘আর পারছিনা গো, তোমার আইফেল টাওয়ার টাকে এইবার আমার গুদের মধ্যে ডুঁকিয়ে দাও তারা তারি, আমি আর পারছি না গো।

লীগন ভাবীকে জিজ্ঞাসা করল ‘কিভাবে তোমার পছন্দ ভাবী সোনা?’
ভাবীঃ ‘তুমি আমাকে কুত্তিচোদা কর।‘
ভাবী উপুড় হয়ে শুঁইলো, মাই দুটো দুলতে থাকল – সে এক অপরুপ দৃশ্য। লীখন মাই দুটো পিছন থেকে ধরে পকপক করে টিপতে টিপতে বাড়াটা ভাবীর গুদে ঢুকিয়ে দিয়ে সজোরে একটা ধাক্কা দিয়ে বাড়াটা ভাবীর গুদের ভিতরে ঢুঁকে গেলো – ভসভস করে ঢুকিয়ে দিল আর ফচাৎ ফচাৎ করে জোরে জোরে চুদতে লাগলো। এই ভাবে ১০ মিনিট চোদার পর ভাবী মাল ছেড়ে দিলো আর লীখন চুদেই চলছে। পরে ৩০ মিনিট পরে লীখন ভাবীকে বলল যে ভাবী আমারও হয়ে আসছে, তা আমি আমার মাল গুলো কোথায়ে ফেলবো, বাহিরে না গুদের ভিতরে? ভাবী বলল যে গুদের ভিতরে ফেলো। পরে লীখন আরো কিছুক্ষন সময় জোরে জোরে চুদে ভাবীর গুদের ভিতরে সবটুকু মাল ঢেলে দিল।
কিছুক্ষন পরে ভাবী বলল যে ‘কি আরো চলবে, নাকি কঁচি গুদ মারবার ইচ্ছা আছে?’
লীখন মাই টিপতে টিপতে বলল, ‘এই রকম খানদানী গুদের কাছে কচি গুদ নস্যি।‘

আচল ভাবী লীখনের কাছ থেকে কথা নিয়ে নিল যে দুপুরে এখানে খাবে আর আচল ভাবীকে চোদন খাইয়ে আসবে। মহিম ভাই ও প্রেমার সামনে বাইরে খাবার সহ্য হচ্ছেনা বলে পেয়িং গেষ্টের ব্যাপারটা ঠিক করে নিল। লীখন তো মহানন্দে দুপুরে মাকে সন্ধ্যায় মেয়েকে চুদতে থাকল। মহিমের সাথে আচল ভাবীর গোলমাল হওয়াতে ভাবী এখন পুরোপুরিই লীখনেরী। ভাবীকে লীখন আর ভাবী বলে ডাকে না। লীখন আরেকটা জিনিস দেখেছে, ভাবীকে চুদতে অনেক বেশী মজা পাওয়া যায়, যা প্রেমাকে চুদে তা পাওয়া যায় না। ভাবী কোন কন্ডম ব্যবহার করা পছন্দ করে না। তাইতো আচল ভাবীকে জন্ম নিরোধক ব্যবস্থা ছাড়াই চুদতে থাকল। আর প্রেমার ক্ষেত্রে পুরো জন্ম নিরোধক ব্যবস্থা নিয়ে ওকে চুদতে হতো। এর ফলে আচল ভাবী বছর খানেকের মধ্যে গর্ভবতী হয়ে গেল। যথা সময়ে একটা ছেলে হলো। একমাত্র লীখন আর ভাবীই জানে যে ছেলের বাপটা লীখন। লীখন ভার্সিটিতে জানিয়ে দিল যে সে আরো কিছুদিন ক্লাসে আসতে পারবে না। প্রেমা উচ্চ মাধ্যমিক পাশ করার পর লীখনের তাকে প্রেমার বিয়ে দেওয়া হলো। আর ততদিনে পাঁচ বছর ধরে লীখনের চোদন খেয়ে প্রেমাও খানদানী মাগী হয়ে গেছে। লীখন আলাদা ফ্ল্যাটে উঠেছে। কিন্তু লীখনের সেই চোদন লীলা এখনও চলতেছে, যেমন দুপুরে আচল ভাবীকে চোদে আর রাতে ওর বউ প্রেমাকে চোদে – এইভাবে এখনো চলতেছে তাদের তিনজনের চোদন লীলা।

New Bangla Choti Golpo 2016 সদ্য বিয়ে করা বৌয়ের এ অবস্থা

ShareNew Bangla Choti Golpo 2016 সে ঢাকা শহরে রিকশা চালায়। best sex stories 2016 গ্রাম থেকে বহু আগে এতিম ছেলে একটা চাকুরীর আশায় এসেছিল ঢাকায় কিন্ত কোন উপায় না পেয়ে তাকে রিকশা চালানো ধরতে হয়েছে। সে একা মানুষ বলে এতেই তার খেয়ে-পড়ে ভালোই চলে যায়। তবে সুখ কি জিনিস তা সে জানে না। একা মানুষের […]

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বাংলা চটি গল্প – চোদনে হাতেখড়ি

Bangla choti golpo – নমষ্কার, বাংলা চটি কাহিনির সকল গুদ-খেচাঁ ও বাড়া-খেচাঁ পাঠক-পাঠিকা দের জানাই নতুন বছর এর প্রীতি, শুভেচ্ছা ও ভালবাসা। আমি শানু – এই সাইটের নতুন লেখক। আশা রাখি নতুন বছরে তোমাদের পছন্দের চটি গল্প লিখে তোমাদের যৌন জীবন কে আনন্দময় করে তুলতে পারবো।

আর বেশী ভুমিকা না করেই বলি আমি কিভাবে সেক্সগুরু হলাম-আমার চোদাচুদিতে হাতেখড়ি সেই ক্লাস সেভেনে। তারপর থেকে আজ পর্যন্ত বহু মহিলাকে চুদেছি। চোদাচুদিতে পি.এইচ.ডি ও করে ফেলেছি। একে একে সব কিছু তোমাদের সাথে শেয়ার করবো। তবে আজ বলব নুনুর ডগায় সদ্য বাল গজানো এই ছোট্ট ছেলেটার জীবনের প্রথম মাল কোন খানকি মাগী চুসে বার করেছিল। হ্যাঁ ঠিকই পড়ছেন। বেশিরভাগ পুরুষ জীবনের প্রথম মাল ফেলে চটি বই পড়তে পড়তে অর্থাৎ প্রথমে থিয়োরি পরে প্রাকটিকাল। কিন্ত আমার চোদার কপাল বরাবরই ভাল তাই আমার প্রথম প্রাকটিকালই হয়ে ছিল। আমার প্রথম চোদন শিক্ষিকা আমাদের কাজের মাসি বুল্টি।

বাড়িতে আমি,মা, আর বুল্টি মাসি থাকি। আমার বাবা বাড়িতে থাকে না। মা একটা অফিসে কাজ করে। তাই বেলা ১০-৫টা আমি আর বুল্টি মাসি থাকি। বুল্টি মাসি কাজের লোক হলেও মোটেও দেখতে খারাপ নয়- হেব্বী সেক্সী মাল। তখন বয়স ছিল ৩০ এর কাছাকাছি, টসটসে মোটা ঠোঁট, তরমুজের মতো ভারী দু-খানা দুধ, দেখলে মাল পড়ে যাবে এমন একখানা গাঁড়। পাক্কা খানকি মাগী টাইপ চেহারা। এই বুল্টি আগে গ্রামে থাকত কিন্তু মাতাল-বোকাচোদা স্বামীটার জ্বালায় আমদের বাড়িতে কাজ করতে থাকে। তখন আমি নিতান্তই বাচ্চা ছিলাম। চোদাচুদি ব্যাপার টা কি “খায় না মাথায় দেয়”- এসম্পর্কে কোন ধারনাই ছিলো না। সদ্য নুনুর ডগায় কালো রঙের ছোট ছোট বাল গজিয়েছে। মাঝে মাঝে বিচি দুটোকে টিপি আর নুনুটাকে ধরে রগড়াই। এতে করে নুনুটা লাল হয়ে যায় এবং বেশ আরাম হয়। কিন্তু কিভাবে মাল বের করতে হয় জানতাম না।

সেবার ক্রিকেট খেলতে গিয়ে হাল্কা চোট লাগে তাই মা অফিস যাওয়ার আগে বুল্টি মাসি কে আমার খেয়াল রাখতে বলে দিয়ে যায়। মার ও কি একটা মিটিং আছে আস্তে দেরি হবে। মাসি আমার খুব খেয়াল রেখেছিল ইনফ্যাক্ট সেদিনই শুরু হয়েছিল আমার জীবনের এক নতুন অধ্যায়ের- জন্ম হয়েছিল চোদনখোর শানুর।
-“শানু স্নান করবে এসো”, দুপুর এর দিকে বুল্টি মাসি ডাক দেয়
-আমি বলি “আমি একা স্নান করে নেব মাসি”

আমার কেমন যেন লজ্জা লাগছিল।
-“না হবে না, তোমার হাতে ব্যাথা। বউদি বলে গিয়েছে তোমাকে স্নান করিয়ে দিতে” মাসি উত্তর দেয়।
আমি আর কি করি বাধ্য ছেলের মতো বাথরুমের দিকে এগোলাম। বাথরুমে গিয়ে আমার চক্ষু চড়কগাছ। দেখি মাসি শুধু সায়া আর ব্লাউজ পরে হাতে তেল নিয়ে দাড়িঁয়ে আছে। আমায় দেখে পাক্কা খানকিদের মতো একটা মুচকি হাসি দিয়ে বলল, “জল লেগে শাড়ি ভিজে যেতে পারে তাই খুলে রাখলাম”। মাসির হালকা শ্যামলা গায়ের রঙ, তবে বুকটা বেশ ফর্সা, লাল ম্যাচিং সায়া-ব্লাউজ, তরমুজের মতো ইয়া বড়ো বড়ো দুটো দুধ ব্লাউজের ভিতর থেকে বেরিয়ে আসতে চাইছে আর অল্প মেদযুক্ত পেট দেখে আমার গলা শুকিয়ে গেল এবং প্যান্টের ভিতর আমার নুনুটা সরসর করতে লাগল।

সম্বিৎ ফিরল মাসির ডাকে।
-“এমন হাঁ করে কি দেখছ, এসো তেলটা মাখিয়ে দিই”
আমি আর কি বলব, আমার অবস্থা তো করূন।এই প্রথম নরম নুনুটা শক্ত হয়ে উঠছে। প্যান্টটা ধীরে ধীরে তাঁবুর মতো উঁচু হচ্ছে। আমি এগিয়ে গেলাম। বুল্টি মাসি হাতের চেটোয় কিছুটা তেল নিয়ে প্রথমে মাথায়, বুকে মাখাতে মাখাতে তারপর আস্তে আস্তে নিচের দিকে নামতে থাকে। মাথায় মাখানোর সময় ইচ্ছা করে বুকের খাঁজটাকে আমার মুখের সামনে রেখেছে এবং গায়ে ছোঁয়াচ্ছে।

আর আমার সারা শরীরটা শিরশির করতে লাগে। তারপর বাথরুমের মেঝেতে বসে পড়ে বলে, “নাও এবার প্যান্টটা খুলে ফেল”।
আমি ইতস্তত করতে থাকি।
-“আরে এত লজ্জার কি আছে?” বলে নিজেই টেনে আমার প্যান্টটাকে নামিয়ে দিল।

ওমনি আমি পুরোপুরি ন্যংটা হয়ে গেলাম। মাসি প্রথমে পোঁদে বেশ করে টিপেটিপে তেল মাখাল। তারপর নুনুর কাছে এসে একটু থমকে গেল পরে খুব মনোযোগ দিয়ে আমার নুনুটাকে দু-আঙ্গুলের মধ্যে নিয়ে নাড়াতে লাগল ও নুনুর চামড়াটাকে আস্তে আস্তে উপর-নীচ করতে লাগল। প্রথমেই এরকম একটা খানকি দেখে গরম খেয়ে গেছিলাম তারপর এমন আদর আর সহ্য করতে পারলাম না; জীবনে প্রথমবারের মতো নুনু স্বমূর্তি ধারন করে বাড়াঁয় পরিনত হল। নিজের চোখকেই বিশ্বাস করতে পারছিলাম না প্রায় ৬ ইঞ্চি মতো লম্বা।

খানকি মাসি তা দেখে বাড়ার ডগার বাল ধরে টান দিল এবং আমার দিকে তাকিয়ে চোখ মেরে ছেনালি করে বলল, “বাঃ বেশ বড় হয়েছে তো। তবে গুদের রস আর মুখের চোসন পেলে আরো বড় হবে”।
আমি বোকচোদার মতো জিজ্ঞেস করলাম, “মাসি গুদ কি ?”
মাসি হিহিহিহি করে হেসে বলল, “ তুমি তোমার মার যেখান থেকে বের হয়েছো সেটাই গুদ”
-“ তোমার গুদ আছে ?”
-“আজ তোমার বাড়াটাকে তো ওখানেই ঢোকাব, দাড়াঁও দেখাচ্ছি” বলেই মাসি একে একে ব্লাউজ, সায়া খুলে ফেলল।

আমি দেখি মাসির ২ কেজি ওজনের একেকটা দুধ আর তার মাঝে বাদামি রঙের গোলাকার বৃত্ত, দুধগুলো টাইট আছে, দুপায়ের মাঝে ঘন চুলযুক্ত জায়গা।
মাসি আমার সামনে দুধ দুটাকে একবার নাচিয়ে বলল, “এই দুটো হল দুধ”। নীচের বাল গুলোকে সরিয়ে একটা চেরা অংশ দেখিয়ে বলল, “এটা গুদ”। পিছন ঘুরে পোঁদের ফুটো দেখিয়ে বলে, “ এখানে বাড়াঁ ঢুকিয়ে চুদলে তাকে গাড়ঁ মারা বলা হয়। আমার গাড়ঁ মারাতে হেব্বী লাগে”

এই বলে বুল্টি মাসি আচমকা তার রস টসটসে ঠোঁট জোড়া আমার ঠোঁটে বসিয়ে কামড়ে ধরল। প্রথমে আমার কেমন একটা অস্বস্তি লাগলেও একটু পরে নেশা লাগল। আমিও প্রত্যুত্তরে মাসির ঠোঁট, জিভ এলোপাথাড়ি ভাবে চুসতে লাগলাম। মাসি আমার হাতটা নিয়ে তার দুধে লাগিয়ে টিপতে লাগল। দেখি দুধ তো নয় যেন মাখনের গোলা। কিছুক্ষন ঠোঁট চোসার পর মাসি আমার গলায়, বুকে কিস করতে লাগল ফলে খানকি মাসির লালায় আমার গা মাখামাখি হয়ে গেল।

ধীরে ধীরে মসি নেমে দাড়িঁয়ে থাকা বাড়াঁটাকে মুখে ঢুকিয়ে নিল। সাথেসাথে যেন একটা ইলেক্ট্রিক শক খেলাম। মনে হল যেন কোন আগ্নেয়গিরিতে বাড়াঁ ঢুকিয়েছি। মাসি পাক্কা রেন্ডিদের মতো করে বাড়াঁ চুসতে লাগল। এক একবারে পুরো বাড়াঁটাকে মুখে ঢুকিয়ে নিচ্ছে আর বাড়াঁর মুন্ডিটায় জিভ বোলাচ্ছে। মাঝেমাঝে বিচি দুটো চুসছে। আমি চোখ বন্ধ করে কিংকর্তব্যবিমূড় হয়ে দাঁড়িয়ে আছি। বুল্টি একহাতে বিচিদুটো টিপছে আর গোগ্রাসে বাড়াঁটাকে গিলছে।

সারা শরীরটা ঝিনঝিন করছে ও বাড়াঁথেকে কি একটা বেরোবে মনে হচ্ছে। হঠাৎ মাথা থেকে পা পর্যন্ত যেন কয়েক লক্ষ ভোল্টের কারেন্ট বয়ে গেল, চোখে অন্ধকার দেখলাম। মনে হল আগ্নেয়গিরি থেকে লাভা পিচকারি মেরে বেরোচ্ছে। বাথরুমের মেঝেতে ধপ করে বসে পড়লাম।
জীবনের প্রথম মাল ফেলার অভিজ্ঞতা ছিল ঠিক এরকমই। যখন স্বাভাবিক হলাম দেখি বুল্টি মাসির মুখে-চোখে-বুকে থকথকে সাদা দই এর মতো মাল পড়ে আছে। খানকি আমাকে দেখিয়ে দেখিয়ে আঙ্গুলে একটু মাল নিয়ে জিভে চাটতে চাটতে বলল, “ বাব্বাঃ কত মাল বের করলে গো। ঠিকঠাক ট্রেনিং দিলে তো এক্কেবারে চোদনদেব হবে”।

আমি মুচকি হাসলাম।
-“হয়েছে হয়েছে আর হাসতে হবে না, এবার আমার চোদনখোর গুদটাকে শান্ত করো দেখি। অনেকদিন ধরেই উপোসী আছি। আজ আমার সব জ্বালা মিটিয়ে দাও শানু”।
-“এবার থেকে সবসময় তোমার গুদে বাড়াঁ ঢুকিয়ে থাকব মাসি”
-“ কি মাসি মাসি করছো ? চোদার সময় যত নোংরা খিস্তি করবে তত মজা আসবে। গুদমারানি, নাংমারানি, দুধওয়ালি, খানকিমাগী, রেন্ডিশালী-যা খুশি বলবে”
-“ঠিক আছে খানকি মাসি আমার বাড়াঁ চুসে দাড়ঁ করা”
বুল্টি বাড়াঁতে মুখ লাগিয়ে জিভ দিয়ে চেটে চেটে আমার বীর্য পরিষ্কার করে দিতে লাগল। কয়েক সেকেন্ডের মধ্যে বাড়াঁ দাড়িঁয়ে পড়ল।
-“এবার আমার গুদটা একটু চুসে দাও না গো শানু”
-“না আমি ওখানে মুখ দিতে পারবো না”
-“বোকাচুদা আমি যখন তোর বাড়া চুসলাম তারবেলা। আর শুন এরপর থেকে যে মেয়েকেই চুদিস না কেন তার গুদ না চুসলে কোনোদিনও আরাম পাবে না”

আজ পর্যন্ত আমার চোদনশিক্ষিকার এই মহান চোদনবাক্য কখনোই অমান্য করি নি। রেন্ডি মাগীটা চোসন খাওয়ার জন্য বাথরুমের মেঝেতে শুয়ে পড়ল। বাধ্য হয়ে আমি গুদের কোঁকড়ানো বালগুলো সরিয়ে গুদে মুখ দিলাম। কেমন একটা বোঁটকা গন্ধ কিছুক্ষন পরে বেশ নেশা লেগে গেল আর আমি চেরাটা জোরে জোরে চুসতে লাগলাম। ওমনি বুল্টি মাসি মাথাটা গুদের ওপ্র চেপে ধরে চেঁচিয়ে বলল, “আহঃ কতদিন পরে গুদে মুখ পড়ল। আরো জোরে জোরে চোস শালা। চুসে চুসে গুদের চামড়া ছাড়িয়ে দে রে”
কিছুক্ষন চোসার পর মাসি উঠে বসল। বলল, “তুমি এবার নিচে শুয়ে পড়”।

কথামত আমি শুয়ে পড়লাম। বাড়াঁটা তালগাছের মত দাঁড়িয়ে থাকল। এরপর চোদনমাসি হাগতে বসার মতো করে আমার বাড়াঁর উপর বসে একটা চাপ দিল তাতে বাড়াঁটা গুদের মধ্যে কিছুটা ঢুকল। এরপর মোটা গাঁড়সহ পুরো শরীরের ভার আমার উপর দিল এতে গোটা ৬ ইঞ্চি বাড়াঁটা গুদের গহ্বরে অদৃশ্য হয়ে গেল। তারপর যা হল তারজন্য আমি আদৌ প্রস্তুত ছিলাম না। গুদমারানি মাসি থপ-থপ-থপ করে রামঠাপ দিতে লাগল। মনে হচ্ছে কোমরটা যেন ভেঙে যাবে কিন্তু খানকিচুদির কোন ভ্রুক্ষেপই নেই। সে ঠাপ মেরেই চলেছে আর আহঃ আহঃ আহঃ ওহঃ করে চিলাচ্ছে ও খিস্তি মারছে।

-“ আজ শালা এমন চুদব তোর বাড়াঁর চামড়া ছাড়িয়ে দিব। তোর বাড়াঁ কেটে আমার গুদে ঢুকিয়ে রাখব। আহঃ চোদ শালা চোদ। তোর কাজের মাসির গুদ মেরে ফাটিয়ে দে রে”
আমি চুপচাপ শুয়ে জীবনের প্রথম চোদনের সুখ নিচ্ছি। এক আলাদা ধরনের অনূভুতি হচ্ছে। বাড়াঁটা যেন নরম মাংসপিন্ডের মধ্য থেকে বেরোচ্ছে আর ঢুকছে। গরমে বাড়াঁটা পুড়ে যাবে মনে হচ্ছে। মাসির ভারী ভারী দুধ জোড়া ঠাপের সাথেসাথে লাফাচ্ছে। চামরি গাঁড়টা উঠছে-নামছে। হঠাৎ মসি একটা দুধের বোঁটা আমার মুখে ঢুকিয়ে দিল। মাই চুসছি আর মাঝে মাঝে বোঁটা টা হালকা কামড়ে দিচ্ছি। এতে মাসি “আহঃ উহঃ” করে শীৎকার দিচ্ছে। এরপর মাসি চোদা থামিয়ে ঠোঁট চোসাচুসি করল। তারপর ফের ভীষন জোরে চোদা শুরু করল। আমার মনে হচ্ছিল আর বেশীক্ষন ধরে রাখতে পারবোনা।

মাসিকে একথা বলায় বলল, “ আর একটু সোনা। আমারও হয়ে এসেছে.”
এরপর মাসিও কিছু জোর ঠাপ দিল সাথমিলিয়ে আমিও তলঠাপ দিলাম। তারপর একটা শেষ ঠাপ দিয়ে মাসি আমার উপর পড়ে গেল; দুজন দুজনকে জোরে জড়িয়ে ধরলাম। সাথেসাথে গুদের ভেতরে গরম জলের বন্যা সৃষ্টি হল। এই অনুভূতি আমার বাড়াঁর মুন্ডিতে লাগার সঙ্গে সঙ্গেই চিরিক চিরিক করে একবাটি মাল ঢেলে দিলাম। বেশ কিছুক্ষন এভাবে শুয়ে ছিলাম। মাসির ডবকা শরীরটা উপর থেকে উঠলে আমিও উঠে পড়লাম।
চোখ মেরে মাসি জিঞ্জেস করল, “কেমন লাগল ?”

আমি প্রত্তুত্তরে কাছে গিয়ে দুধজোড়া টিপতে টিপতে বললাম, “আর একবার চুদব”
-“ ওমা ছেলের শখ দেখো! আজ আর না। তাড়াতাড়ি স্নান করে খাবে চল। তোমার মা চলে আসবে। কাল মনভোরে চোদো”
এরপ্র মাসি আমার বাড়া সাবান মাখিয়ে ধুয়ে দিল। আমি মাসির দুধে-গুদে বেশ করে সাবান মাখালাম। পোঁদের ফুটোয় আঙুল ঢুকিয়ে ঘুরাতে লাগলাম; মাসি বলল্কাল পোঁদ মারতে দেবে।
পরেরদিন মাসির চামরি পোঁদের ফুটোতে শাম্পু ঢেলে ফচ-ফচ করে গাড়ঁ মেরেছিলাম। পরে আমি ও আমার বেস্ট ফ্রেন্ড শুভ একসাথে মাগীর গুদ-পোঁদ ও মেরেছিলাম। সে কাহিনি তোমাদের সাথে শেয়ার করবো। যাই হোক দাদা-দিদি-বৌদি-কাকিমা তোমাদের মাল খেসেছে তো ?
কেমন লাগল তোমাদের এই কাহিনি আমাকে জানাতে পারো। আমার ই-মেল আইডি হল [email protected]

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যুবতী বৌয়ের ডাঁশা-গুদ Juboti Bou Ar Dasha Gud Choti Golpo

Bangla Choti চুদবার আগে গুদের বাল চেঁচে দিয়েছে অমর। এতে তার গুদ চুষতে খুব সুবিধা হয়। গুদ না চুষলে নিয়মিত স্বামী সহবাসে অভ্যস্তা বিবাহিতা নারীদের কাম উঠবে না। তাই অমর জোর করেই সঙ্গিনীদের গুদ চোষে নন্দিনী সরকারী চাকরী করে। স্বামী স্কুলের মাষ্টার। দুজনে মিলে লোন করে দমদমে একটা ফ্ল্যাট কিনেছে। তার গৃহ প্রবেশের কয়েক দিন আগেই শ্বাশুড়ী ডাকলো – শোন বৌমা, গৃহপ্রবেশ হবে, নারায়ন পূজা হবে, সেসব ঠিক আছে। কিন্তু আমাদের বাড়ীর নিয়ম হচ্ছে মতুন বাড়ীর গৃহপ্রবেশের পর নারায়ণ পূজার জায়গাতেই স্বামী-স্ত্রী মিলিত হবে। এর যেন অন্যথা না হয়।মা,

আপনি তো জানেন না, ওর ও সবে একদম আগ্রহ নেই। ঠিক আছে, আমি খোকাকে আলাদা করে ডেকে বলে দিচ্ছি যাতে তোমার রাগরস বার করিয়ে দেয়।। এই প্রথা আমাদের বংশগত।কিন্তু তুমিও পুরো চেষ্টা চালিয়ে যাবে, ঠিক গৃহপ্রবেশের নারায়ণপূজার জায়গাতেই ও যাতে মিলনের তৃপ্তি পেয়ে তোমার যোনির মধ্যে বীর্যপাত করেপরিবারের মঙ্গলের জন্য ঐ দিন স্বামীর বীর্যধারণ বাড়ীর বৌ হিসাবে তোমার অবশ্য কর্তব্য। এই রাতে তোমার শ্বশুর মশাইয়ের বীর্যেই তোমার স্বামীকে গর্ভধারণ করেছিলাম আমি। কাজেই তোমাদের ভবিষ্যতের জন্য এ কাজ ঐখানেই করতে হবে।মাতৃ আজ্ঞা শিরোধার্য। তাই নতুন বাড়ীর গৃহপ্রবেশের পরদিনই নন্দিনী ব্যবস্থা করলো যাতে বারাসাত থেকে ছোট বোনের স্বামী দুপুরবেলা এসে দুই মেয়েকে নিয়ে যায়। সারা দুপুর থেকে অনেক ভ্যাজর ভ্যাজর করে বিকালের দিকে বড় শালীর দুই মেয়েকে নিয়ে বিদায় হলো দেবাশীষ। অনেকক্ষন ধরেই দুজনের যৌনাঙ্গে কুটকুটানি ধরেছে। না চুদলে যাবে না।সন্ধ্যা তখন ঘনিয়ে আসছে। অমিতাভ পুজোর জায়গাটা পরিস্কার করে তোষক পাতলো। নন্দিনীর আবার পরিস্কার বাতিক। অমিতাভ কাচা নতুন বেডশীট যখন বিছাচ্ছে, তখন নন্দিনী ঢুকলো স্নানে, যা গরম। সঙ্গমের আগে স্নান করে, গায়ে পাউডার দেওয়া নন্দিনীর বরাবরের অভ্যাস। এমনকি ছোটবেলার প্রেমিক অমরের বিছানাতে যাওয়ার আগেও নন্দিনী এটা করে থাকে। ফ্রেশ হয়ে থাকলে বহুক্ষণ পুরুষের লোড নেওয়া যায়। অমরের বীর্যধারণ ক্ষমতা বিরাট। এক নাগাড়ে সে তিন ঘন্টা ছোটবেলার প্রেমিকাকে নানা কায়দাতে শুয়ে বসে চূড়ান্ত আরাম দিয়ে ভোগ করে। তবে এর মধ্যে নন্দিনীর সব থেকে পছন্দ অমরের কোলে বসে সঙ্গম। দু দিকে পা ছড়িয়ে দিয়ে উদ্যত লিঙ্গকে যোনি দিয়ে চেপে ধরে যোনিরস দিয়ে স্নান করায় নন্দিনী। এসব অমরকে বলতেও হয় না। নন্দিনীর পা দুটো ফাঁক করে নিয়ে, পাছা বালিশে দিয়ে গুদটা ফেড়ে নিয়ে রস চাটা অমরের নিত্য কর্তব্য। অমর জানে কি করলে নিয়মিত স্বামী সহবাসে অভ্যস্তা বিবাহিত নারীও যৌন তৃপ্তির জন্য তার কাছে চিটিয়ে থাকবে। অমরের প্রতিবার সঙ্গমে নন্দিনীর ২৫-৩০ বার রাগমোচন হয়। বান্ধবীদের রাগরস অমরের বিচি বেয়ে বিছানায় যাতে না পড়ে তার জন্য পাছার তলায় তোয়ালে দিয়ে চোদা শুরু করে অমর। সঙ্গিনীর রতিতৃপ্তির ব্যাপারে অমর সদা সতর্ক। এতক্ষন চোদাচুদির পরেও যে বান্ধবীদের সারা শরীরে অমর কোন দাগ ফেলে না, এটাই আশ্চর্য। অথচ নিজের স্বামী অমিতাভ দশ মিনিটের মিলনে দুবারের বেশি বৌয়ের রাগমোচন করাতে তো পারেই না বরং বুকের বোঁটায় দাগ করে দেয়। এই কায়দাতে অমর অতক্ষন চুদলে কবেই নন্দিনীর গুদের ছাল উঠে যেত। তবে স্বামী আর প্রেমিকের বীর্য নিয়মিত নেওয়ার আর রাগমোচনের জন্য নন্দিনীর শরীর এই বয়সী নারীদের থেকে অনেক কমনীয় – স্তন অনেক সুডৌল।যাই হোক, স্নান করে নন্দিনী একটা হাতকাটা লাল রংয়ের নাইটি পরলো। নাইটির সামনেটা ডিপ কাট – যাতে বুকের অনেকটাই বেরিয়ে থাকে। তলায় অমরের দেওয়া পিটার প্যানের লেস দেওয়া ব্রা। অমিতাভ সায়া, নাইটি সব মিলিয়ে গোলমাল করে ফেলবে বলে সায়া আর পরলো না। আজ স্বামীকে উত্তেজিত করে তাকে সঙ্গমে তৃপ্তি দিতেই হবে।এদিকে নিচের ফ্ল্যাটের মুখার্জীবাবু এসে মিউটেশন, প্রোমোটারের বজ্জাতি নিয়ে কাহিনী জুড়লেন। ওদিকে যুবতী বউ অধীর আগ্রহে অপেক্ষা করে আছে শারীরিক মিলনের জন্য। অমিতাভ অতি কষ্টে মুখার্জীবাবুকে বিদায় করেই গেটের গ্রিলে বাইরে থেকে তালা ঝুলিয়ে দিলো যাতে বাইরে থেকে দেখে মনে হয় বাড়ীতে কেউ নেই। নিজের বিয়ে করা বৌকে চুদতেও কত বাধা। নিজের বাড়ীতে মেয়েদের জন্য প্রাণপনে ঠাপানো দূরে থাক, বৌয়ের পাকা মাইদুটোকেই চোষা যায় না। প্রায় বছরখানেক আগে এক দুপুরে খালি বাড়ীতে নন্দিনীকে পুরো ল্যাংটো করে চুদেছিলো অমিতাভ। সেদিন দুজনেই বুঝেছিল চোদনের আসল আরাম পেতে গেলে গায়ে জামা-কাপড় থাকলে হবে না। আর অমর তো নন্দিনীকে চোদনের আগেই গুদ চুষে উলঙ্গ করে নেবেই। প্রথমে আপত্তি করলেও, পরে নন্দিনী আরাম পেয়ে অমরের ল্যাংটো চোদনের ভক্ত হয়ে গেলো। নিজেই কাপড় খুলে চোদার জোগাড় করে আজকাল।এঘরে আলো আধাঁরিতে যুবতী বৌয়ের শরীর দেখেই অমিতাভর লিঙ্গাগ্র শক্ত হয়ে উঠল। স্বামীর কাম বাড়ানোর জন্যে দরজার দিকে পা দিয়ে, নাইটি কোমরে তুলে, গুদ বার করে আধশোয়া হয়ে ছিলো সতীসাধ্বী স্ত্রী। কিছুদিন আগেই চুদবার আগে গুদের বাল চেঁচে দিয়েছে অমর। এতে তার গুদ চুষতে খুব সুবিধা হয়। গুদ না চুষলে নিয়মিত স্বামী সহবাসে অভ্যস্তা বিবাহিতা নারীদের কাম উঠবে না। তাই অমর জোর করেই সঙ্গিনীদের গুদ চোষে। মেয়েদের নিয়ম হছে না না করা। একবার স্বাদ পেয়ে গেলে পরের বার থেকে বান্ধবীরা ঠ্যাং ফাঁক করেই রাখে যাতে অমর আরো ভালো করে গুদ চোষে। অমরের চোদনের পর থেকে তার পর আর বৌকে চোদার সময় বা সুযোগ কোনোটাই পায়নি অমিতাভ। বৌয়ের নতুন করে গজানো বালের ফাঁকে কোট উঁকি মারছে – দেখেই অমিতাভর রক্তে আগুন ধরে গেল। নন্দিনীকে জাপটে ধরে অমিতাভ ব্রা খুলে পাকা মাইতে মুখ ডুবিয়ে দিলো। ক্রমাগত স্তনাগ্র চোষনের ফলে নন্দিনীর যোনি থেকে প্রচুর কামরস বেরিয়ে যোনিপথকে করে তুলল পিচ্ছিল।অমরের কাছ থেকে শেখা কায়দা অনুসারে নন্দিনী স্বামীর লিঙ্গের ছালটা ছাড়িয়ে মুন্ডি বার করে মর্দন করাতে অমিতাভর কাম বেড়ে গেলো বহুগুন। বিচি দুটোকে কচলে কচলে নরম করে স্বামীকে সুখ দিতে লাগলো সাধ্বী স্ত্রী। তবে সমস্যা একটাই, অমিতাভ মোটা হয়েছে এতো যে ওপরে উঠলে বৌয়ের দম আটকে আসে। নিজের বাড়ীতে মেয়েরা জেগে যাবে বলে অমিতাভ পুচপুচ করে গুদ মেরে বীর্যপাত করে সরে পড়ে। খালি ফ্ল্যাটে সে সব লজ্জাশরমের বালাই নেই। তার ওপর শ্বাশুড়ীর আদেশ নন্দিনীকে সাহসী করে তুলল। ধাক্কা দিয়ে অমিতাভকে চিৎ করে ফেলে নিজেও উপুড় হয়ে নাইটি খুলে হাঁটু মুড়ে পজিসন নিয়ে নিলো। প্রেমিকের শেখানো কায়দাতে সোজা স্বামীর ধোন চুষতে, বিচি টিপতে শুরু করলো — অমিতাভ একেবারে নবাবী কায়দাতে বৌয়ের চোদনবিলাস ভোগ করতে শুরু করলো। অমিতাভর মুখে একটা মাই গুঁজে দিয়ে এক ঠাপে নন্দিনী স্বামীর মাঝারি সাইজের বাড়াটাকে নিজের গুদে নিয়ে নিলো।অমিতাভ তো বৌয়ের এই রণরঙ্গিনী মুর্তি দেখে অবাক। কোন হড়বড় না করে নন্দিনী অমরের শেখানো কায়দাতে স্বামীকে মাঝারি ঠাপে চুদতে থাকলো যাতে ভগাঙ্কুর স্বামীর লিঙ্গমুন্ডিতে ঘষা খায়। সোমত্ত বৌয়ের ডবকা গতর এভাবে পাবে, অমিতাভ স্বপ্নেও ভাবেনি। সে আয়েশ করে বৌয়ের পাছা চটকাতে চটকাতে চোদনের চরমে উঠতে থাকলো। সারা ঘরময় তখন খালি চোদনের পকাপক আওয়াজ। যেই বুঝলো স্বামীর হয়ে এসেছে, নন্দিনী ঠাপাঠাপি বন্ধ করে দিল। অমিতাভ সামলে নিতেই আবার আলগা ঠাপে বরকে চুদতে শুরু করলো নন্দিনী। পাকা গুদের মধ্যে বুড়ো বাড়া যেন সেদ্ধ হচ্ছিল। অমিতাভর মনে হলো যেন বৌ গুদের দুই ঠোঁট দিয়ে তাকে দুইছে। ঠিক সময়ে অমিতাভ নন্দিনীকে নিচে ফেলে বদাবদ রাম-ঠাপ দিয়ে যুবতী বৌয়ের ডাঁশা-গুদে বিচির রস ঢেলে দিয়ে গৃহস্বামীর পবিত্র-কর্তব্য পালন করলো

বাংলা চটি গল্প – মেয়ের প্রাইভেট টিউটর

Bangla choti golpo – আমার মেয়ে দরিন এর লেখাপড়া এতদিন আমি আর অনু (আমার বৌ) দুজনে মিলেই দেখাশোনা করছিলাম। কিন্তু দরিন যখন উঁচু ক্লাসে উঠল, তখন দেখলাম ওর ভালো রেজাল্টের জন্য আরও বেশি কেয়ারিং দরকার যেটা কেবল আমাদের দেখাশোনায় হচ্ছে না। বিশেষ করে ইংরেজি, সায়েন্স আর অঙ্ক বিশয়ের জন্যে বাড়িতে একজন টিউটর রাখা অত্যন্ত জরুরী। আমি ছেলে টিউটর রাখার ব্যাপারে একটু উন্নাসিক। কারন, আমি নিজেও দীর্ঘদিন টিউশানি করেছি আর আমার বেস কিছু মেয়ে শিক্ষার্থীর সাথে অন্যরকম অভিজ্ঞতা আর সেই অভিজ্ঞতা থেকেই মিডিয়ার সাহায্য নিয়ে একজন মহিলা টিউটরের সন্ধান পাওয়া গেল। আমরা একফিন তাকে বাড়িতে আসতে বললাম।

বেস কিছু কারনে প্রথম দরশনেই ওকে আমার ভালো লেগে গেল। তার ভেতর উল্লেখযোগ্য কয়েকটা কারন হল,
১। মহিলা দারুণ মেধাবি, ওর একাডেমিক ব্যাকগ্রাউন্ড অত্যন্ত ভালো।
২। দারুণ হাসিখুশি, চটপটে আর খলামেলাভাবে কথা বলে। যে কোনও মানুষকে অতি সহজে আপন করে নেবার আলাদা বৈশিষ্ট আছে ওর মধ্যে (ভেতরে ভেতরে আমি খুব আশান্বিত হয়ে উঠলাম)
৩। দৈহিক সৌন্দর্য – গাঁয়ের রঙটা আমার খুব পছন্দের, পুউরপুরি ফর্সা নয়, একটু শ্যাম্লা। স্লিম ফিগার, বুকটা ভরাট। আন্দাজ করলাম ওর দৈহিক গঠন মোটামুটি ৩২-২৬-৩৮। উচ্চতা আনুমানিক পাঁচ ফুট দুই ইঞ্চি মতন হবে।
আমি আর অনু দুজনেই ওর সাথে কথা বললাম। তারপর স্থির হল, ওকেই আমরা দরিন এর প্রায়ভেট টিউটর রাখব।

মেয়েটি হিন্দু বিবাহিত। ওর নাম গিতা রানী, বয়স অনুমানিক পঁচিশ/ছাব্বিস। এখনও মাস্টার্স কমপ্লিট হয়নি, পড়ছে। বাবা জীবিত নেই, মা আছেন, গ্রামের বাড়িতে থাকেন। প্রায় পনেরো মাস আগে অনার্স শেষ করার পরপরই বিয়ে হয়ে গেছে। ঢাকাতে লেডিস হোস্টেলে থাকে। কারন, ওর স্বামী ক্যানাডা প্রবাসী। বিয়ের পর চার মাস একসাথে ছিল, তারপর ওর স্বামী ক্যানাডা চলে গেছে। নিয়মিত চিঠিপত্র দেয়, টাকাপয়সা পাঠায়। প্রতি দু বছর পরপর ছয় মাসের ছুটি পায়। ওদের সিদ্ধান্ত, গীতার লেখাপড়া শেষ হলে ওকে ক্যানাডা নিয়ে যাবে। তারপর দুজনে মিলে চুটিয়ে সংসার করবে। খুব বেশি হলে আর হয়ত বছর দেড়/দুই অপেক্ষা করতে হবে। সব কিছু জানার পর আমি বেস খুশিই হলাম। যেসব মেয়েদের স্বামী বিয়ের কিছুদিন পর বিদেশ চলে যায়, তাদেরকে, পটানো বেস সহজ হয়।

এর অবস্য দুটো কারন আছে, প্রথমতঃ মেয়েটা আর কুমারী থাকে না বলে ওর ভেতরের জড়তা কেটে যায় আর ‘ডোন্ট কেয়ার’ ধরনের একটা ভাব আসে। আর দ্বিতিওতঃ স্বামী যেহেতু কিছুদিন পরেই আবার বিদেস চলে যাবে, তাই নব বিবাহিত বৌকে যাওয়ার আগে যে কটা দিন পায়, প্রায় প্রতি রাতেই চদে। আর বৌয়েরও বিয়ের পর থেকে রাতে ঘুমানর আগে ভোদায় স্বামীর বাঁড়া নিয়ে নিয়ে অভ্যেস হয়ে যায়। ফলে, স্বামী চলে যাওয়ার কয়েকদিন পর থেকেই ভোদায় চুলকানি শুরু হয়ে যায়। রাতে একা বিছানায় শুয়ে স্বামীর সাথে থাকা সেই কয়টা দিনের সুখ স্মৃতি মনে করে কেবলই ছটফট করে, কিছতেই ঘুম আসতে চাই না।

কিছু মেয়ে আছে, জারা মন-মানসিকতায় গোঁড়া এবং ধার্মিক প্রকৃতির। ওরা ভাবে স্বামিই একমাত্র পুরুষ, কেবলমাত্র তার বাঁড়ায় নিজের ভোদায় ঢোকানো যাবে। ভোদা যতই চুলকাক না কেন, আঙুল ঢুকিয়ে খোঁচাখুঁচি করবে তবুও আর কাওকে চান্স দেবে না। স্বামী এদের কাছে দেবতা! তাছাড়া, ধর্মীয় অনুশাসন অনুযায়ী, অন্য পুরুষের সাথে যৌন সহবাস করলে কঠিন পাপ হবে মনে করে, মনের ভেতর একটু একটু ইচ্ছে থাকলেও ওদিকে আর এগুতে সাহস পায় না। কিন্তু, কিছু মেয়ে আছে, যার মন-মানসিকতায় উদার। দীর্ঘদিন স্বামী কাছে না থাকলে ওদের ভোদায় যখন চুলকানি হয়, সেটাকে উপেক্ষা করতে পারে না। হাতের কাছে পছন্দের কোনও শক্ত সমর্থ পুরুষ পেলেই গোপনে তাকে দিয়ে চুলকানিটা মিটিয়ে নেয়। পরে স্বামী ফিরে এলে এরা সাধু হয়ে যায়।

গীতার রুপ মাধুর্য যতটা না দৃষ্টি কাড়ে, তার থেকে ওর খোলামেলা কথাবার্তা আর মেলামেশা বেশি করে ওর দিকে মনটা টানে। বিশেষ করে ওর রুচিবোধের প্রশংসা না করলেই নয়। ঢাকা বিশ্ববিদ্যালয়ের ছাত্রি হলেও ওর ভেতর কোনও অহংকার নেই। নিজের এত ভালো রেজাল্ট ওকে একটু অহঙ্কারি করে তলেনি। কোনও উগ্র প্রসাধন করে না, হালকা পাউদার, চোখে একটু কাজলের ছোঁয়া আর কপালে ছোট একটা টিপ, ব্যাস। কোমর পর্যন্তও লম্বা চুল সব সময় ছেড়েই রাখে, কেবল গোঁড়ায় একটা ব্যান্ড। খুব বেশি দামী নয়, তবে যথেষ্ট রুচিশিল এবং সুন্দর পোশাক পরে। সালোয়ার কামিজেই নাকি ও স্বাচ্ছন্দ্য বোধ করে। শাড়িটাকে যথেষ্ট ঝামেলার মনে হয়।

দরিন কে পড়ানো শুরু কড়ার অল্প কয়েকদিনের ভেতরই ওর সাথে আমার যথেষ্ট আন্তরিক সম্পর্ক হয়ে গেল। কোথায় বলে না, স্বভাব যায় না ম’লে! আর আমি তো স্বভাবে খাদক। সুযোগ পেলেই ধুমসে চোদার খায়েস জেগে উঠল আমার ভেতরে। আমার মাথার ভেতর পোকা আছে, ঘুন পোকার মত। কোনও মেয়েকে চোদার জন্য পছন্দ হলে যতক্ষণ পর্যন্তও চুদতে না পারব, পোকাটা কামড়াতে থাকে। তবে নানা রকম ফন্দি ফিকিরের বুদ্ধি নিয়ে যথেষ্ট সাহায্যও করে আমাকে।

গিতাকে পাওয়ার ব্যাপারেও পোকাটা একদিকে যেমন কামড়াতে লাগল, সেই সাথে নানা বুদ্ধিও বাৎলাতে লাগল। গীতার আচার আচরন অদ্ভুত! আমি বিভিন্নভাবে, বিভিন্ন কায়দায়, বিভিন্ন কথাবার্তায় ওকে আমার ইচ্ছের কথা ইশারায় জানাবার চেষ্টা করেছি। কিন্তু গিতা দারুণ ধুরন্ধর! অবস্থা এমন যে, আমি ওকে টাচ করতে গিয়েও টাচ করতে পারছি না। একবার মনে হয়, এই পেয়ে গেছি! পরখনেই বুঝতে পারি, পাওয়া তো দুরের কথা, আমি তো কাছেই যেতে পারিনি! ভেতরে ভেতরে আমি ছটফট করে মরি।

গীতার স্বামী বিদেশে, ওর ভোদায় যে যথেষ্ট চুলকানি আছে সেটা বলাই বাহুল্য! এরকম একটা চুলকানিওয়ালা তরতাজা ডাঁসা ভোদা নিয়ে একটা যুবতী সুন্দরী মেয়ে চোখের সামনে দিনের পর দিন ঘুরে বেরাবে, আর আমি তাকে একটু ছুতেও পারব না, এটা আমার পক্ষে মেনে নেওয়াটা অসম্ভন …… পোকাটা আমাকে বোঝাল।

গিতা সপ্তাহে চারদিন আসে। বিকেল তিনটের সময় আসে, সাড়ে চারটে পর্যন্তও পড়ায়। পাঁচটা থেকে দরিন এর নাচের ক্লাস। মাঝে মাঝে দরিন এর পড়া শেষ হলে ওর গাড়ি এসে হর্ন দেওয়ার সাথে সাথে ও বেড়িয়ে যায়। আমি অনুরোধ করলে গিতা আরও পাঁচ দশ মিনিট পরে যায়। আমি ওকে চা বানিয়ে খাওয়াই। অনু তো আর বাড়িতে থাকে না, তাই ওর দ্বায়িত্বটা আমিই পালন করি। দুজনে চা খেতে খেতে অনেক খোলামেলা কথা বলি। গিতা উচ্ছসিত ভঙ্গিতে আমার সাথে কথা বলে, মনে হয় ও আমার কত আপন। কিন্তু জিখনই আভাসে ইঙ্গিতে আমি ওকে আমার মনের একান্ত ইচ্ছের কথা বলতে যাই, তখনই প্রসঙ্গ পালতে ফেলে। একেবারে পাঁকাল মাছের মত পিছলা!

যতই দিন যেতে থাকে, ভেতরে ভেতরে আমি ততই অধৈর্য হয়ে পড়তে থাকি। কোনও কোনও দিন দরিন চলে লাওয়ার পর, একা বাড়িতে গীতার সাথে কথা বলার সময় ইচ্ছে করে বাঘের মত ঝাঁপিয়ে পরে চুদে নেই।
কিন্তু, আমার বিবেক তাতে সায় দেয় না। রেপ বা ধর্ষণ আমি মনে প্রানে ঘৃণা করি। কারন অতে কেবল মানসিক বিকৃতি আর শারীরিক চাহিদার সম্ভগ থাকে কিন্তু কোনও তৃপ্তি ইয়হাকে না। একটা পুরুষ আর একটা মেয়ে যখন দুজনের সম্মতিতে চদাচুদি করে, তাতে দুজনেরই মানসিক প্রশান্তি আর শারীরিক সুখ থাকে। দুজনই দুজনের থেকে তাদের প্রাপ্তি পেয়ে থাকে। দুজনেরই চরম আনন্দ লাভ করে। কিন্তু রেপ করলে মেয়েটা তো মজা পায়ই না, ছেলেটাও কেবল মাল আউট করা ছাড়া চোদার আসল মজা পায় না।

পরের অংশ একটু পরেই পোস্ট করব …..

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Sexual stories distorted men is not safe for all

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Sexual stories I want to describe about the topic. Perverted sexual orientation cannot be completed in any more trouble than a partner. A victim of a perverted husband or lover of women only know what touch can be disastrous. Not only that, nowadays outrageous growing of rape, child sexual abuse, and child abuse cases. These people are upset our familiar surroundings and privacy. To protect yourself or your children and loved ones for the sake of safety, but enough distance from perverted men to recognize and protect their private a matter of urgency. Come, let’s recognize the signs.
The women who work in addiction

when from Sexual Stories distorted  men created? :

Not only now, in the midst of these men had in the past. Many women know of her husband’s sexual relationship with a girl. But under compulsion to endure in silence. Remember one thing, the sexual needs that extend undue homework at her, he must be a man perverted. Why not just do the girl, the daughter of a relative, his daughter is not safe even to men. Such this Sexual distorted men mean the nonsense things or elements.

Going to sex workers

Whether to meet the physical demands of the people for the sake of other things, whether sex workers means to create more of these ruthless man. Your body needs a clean-minded man would not go for the sex workers. Sex workers who have to travel to the husband, boyfriend or best friend to stay away from.

Graffiti porn addiction of distorted men:

In fact almost every son is addicted to porn graffiti. Although this matter is not indicative of a healthy taste, but about all women in today’s life is more or less accepted in the case of a husband or boyfriend. He thought it would be, when it goes to the level of addiction.
Graffiti excessive addiction to porn, he sought to apply the fake is the real life, etc. Some of his private collection of porno graffiti male or friends saw him in the midst of one of the most secure avoided. All kinds of women to men in the product, keep in mind that all the time. Nowadays, if you see that a lot of male porn star Sunny Leone fan. And they are expressed with pride. A porn star Fan pervert the course of informing sexual orientation. Such men are always in a fantasy and reality merge into women porn stars. By the possibility of danger to other women.

Treatment of Children of the  Sexual stories distorted  men:

It is true that many men speak and listen very messy tends to attract younger children. Son and daughter to meet the needs of both kinds of sex they have with their children. This is the way to recognize males of their behavior with children. If you see that pretending to carry the child to touch the sick is part of the reason he repeatedly kissed the hand of eating, the children stay away from the man and also stay away.

Sexual stories distorted men Love the forced sexual relationship

this thing is a lover. Despite not wish to stress his girlfriend before marriage, and even cases of physical force sexual relations with his girlfriend was rejected. Also, to meet the needs of the physical relationship to relationship, always sought to talk only about sex, lonely little chance against your opinion, part of the body touches the sick, etc., all of a perverted sexual tastes of men are indicative of approved. The total menu said that this types of men are not safe for you and your children other way not your home worker if she is female. These types of guys called as Sexual distorted men.

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3 Ways during sexual intercourse

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sexual intercourse men to take more time manhood is considered as the basic qualification. Various means of intercourse with any man learns with age. I want to say here – usually more than men under the age of 5 cannot be reconciled. However, they have very little time to re excited time period/ could be heated. The increase in the age of 5 sexual men takes more time. But with the increase in age revive to increase the without time break repeatedly slept with a woman or can be more than sexual intercourse and intercourse satisfaction is found. For reasons: regular intercourse with each other in the body and begin / evil begin, the desired hopeless, happiness tends to be well informed about the procedures etc.

[Note: Those who said “one of the best prevention, why would you believe black spots? Who are without marriage, specially the brothers vegetables to eat every day, I am too lazy – so the women’s enjoyment of lust” – ask them please do not lie. The argument is baseless. Strange is destroying our society. Come on, just a few minutes of life for torture and sisters, what big enough grit – If you know that your spouse after marriage “virgin” is to spend the rest of my life with him? Why so much for just the marriage union East? You cannot take that kind of woman – but the other man in the future will make chastity? I am sorry if anyone was hurt person.

Let the main discussion. The process sequence of  sexual intercourse was more time …

Method 1: – Press / pressing caught about intercourse:

Master and Johnson, the two men have discovered this method. In fact, the name of the method to estimate how the arm is. The way men think about when his semen, then she or her partner sex is just sex to the bottom of the scrotum at the beginning of the road that urine / semen is the vein touch down for a few seconds. (Sex with two fingers to the side of the clip would like to get stuck.). 30 to 45 seconds after the pressure in the time interval. This is the time to perform sex or sexual activities are to refrain from any type of procedure that may result of male sex for a while, lose consistency. But 45 seconds to re-introduce the full strength of the penis back again as many times as many times as you can by the combination of method. Keep in mind that the effectiveness of the procedure depends on the habit or practice. It is absurd to think that the results the first time.

Method two: – compression of sexual intercourse

Speaking about the process before I give you some basic ideas. We are fully urine while urinating from the bottom of the scrotum in the region to Anal a type of re-abdomen crunches method described here with a lot of pressure, I like that. However, the difference here is that we would apply – pressure originals description way around when not assume semen, and then stop all sexual activities are under the scrotum to the region for a few seconds Anal be forcefully. Leave now. Day again for a few seconds. Thus, when you see 21 times the semen pressure / feeling has gone to re-start your sexual performance method will prolong your sexual union. I say again, the approach depends on the effectiveness of the practice or practices. It is absurd to think that the results the first time.

Method 3: – Pause (Amazon / Pause and Play) of intercourse:
This method is used mostly widely. Usually with the help of the system are all twins. Arrival at the location, gender semen inside out, removes or even pause activity. This time you can keep oblivious. thoughts turn to feelings of happiness and courage to feel the pressure has been reduced to resume the success of the procedure depends entirely on your habits. Despite the early success of the procedure does not know the properties of this system, they have regular sexual intercourse. Keep in mind that the effectiveness of the procedure depends on the habit or practice. So do not worry about getting the results the first time.

Appendix A: All of the above methods to satisfy your partner. If these estimates or to learn the tricks of women many ideas about masculinity said. The idea is nice. Tell your wife methods. That will help you. Because he knows that you have taken more than the benefit. sexual intercourse of sexual training needed for you if you work same of it.

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ফ্যামিলী গেট টুগেদার – ৫

Bangla panu golpo – একেবারে পরিস্কার নিমন্ত্রণ, কোনও ভনিতা নেই। আমি পা দুটো যথাসম্ভব ফাঁক করে মুন্দিতা গুদের চেরাতে ঠেকিয়ে একটা চত ঠাপ মারতেই বাঁড়াটার অর্ধেকটা মত ঢুকে গেল।
মামনি অধৈর্য হয়ে বলল, পুরতা ঢোকা বাবা।

আমি জোরে এক ঠাপ দিতেই আমার ভীমাকৃতি বাঁড়া ওর গুদের অতল গহ্বরে তলিয়ে গেল। কোমর দলান শুরু হল। মামনি সোহাগ ভোরে ওর একটা চুঁচি আমার মুখে ঢুকিয়ে দিল। আমি পালা করে চুঁচি চুসছি আর টিপছি।
কেমন লাগছে তোর মামনিকে চুদতে?
খুব ভালো লাগছে মামনি।

এ্যায় বড়দি তো তোর বাঁড়ার প্রসংসায় পঞ্চমুখ। ওর নাকি দুবার রস বেড় করেছিস। কতক্ষণ করলি ওকে?
ওকে প্রায় দেড় ঘণ্টা চুদে খুব আরাম পেয়েছি।
কাকে বেশি ভালো লাগছে, ওকে না আমাকে?
তোমাকে।
মন রাখছিস? আঃ আঃ চেপে চেপে চোদ, আমার হয়ে আসছে রে। উঃ উঃ আর পারছি না, গেল গেল, ধর ধর, আমার সব রস বেড়িয়ে গেল।
মা তোমাকে কুকুর চোদা করব এবার।

পারিবারিক বেলেল্লাপনার Bangla panu golpo

মামনি চার হাত পা ছড়িয়ে উপুড় হয়ে পোঁদ উঁচু করে ধরল। আর আমি পেছন থেকে মামনির রক্তাভ গুদে আমার বাঁড়া গেঁথে দিলাম। আমার ঠাপের তালে তালে মামনির ৩৮ সাইজের চুঁচি জোড়া দুলছে। আমি হাত বাড়িয়ে মাঝে মাঝে ওগুলো টিপছি।
অনু আর ঝুমিকে করবি নাকি?

ওদের প্রতি অতটা আগ্রহ নেই, পারলে কাকিমাকে চোদার ইচ্ছে আছে। বড়দি বলেছিল তোর কচি মেয়েদের পছন্দ নয়। তোর নাকি বেশি বয়সী মহিলাদের দিকে ঝোঁক।
হ্যাঁ, ঠিকই বলেছে। অবস্য তার একটা কারন আছে। তুমি রাগ করবে না বল?
তোর গা ছুঁয়ে বলছি রাগ করব না।

বছর দুই আগে এক বন্ধুর পাল্লায় পরে সোনাগাছিতে একজন তোমার বয়সী মাগিকে চুদে ভীষণ আরান্ম পেয়েছিলাম। তারপর বার দুই গেছি, কিন্তু এইডসের ভয়ে আর যায় না। তারপরে ঝুমির বয়সী আমার এক বন্ধুর বোনকে করেছিলাম, ভালো লাগে নি তেমন।
বাঁড়া দাড়ালে কি করিস?
উপুড় হয়ে বাঁড়া ঘসে মাল ফেলে দিই।
আহারে কি কষ্ট আমার সোনাটার! তোকে আর কোথাও যেতে হবেনা। তোর জন্য তোর মা আছে। জোরে জোরে চোদ সোনা।
এ্যায় মামনি একটু খিস্তি করো না।

বাব্বা এই অভ্যাসও হয়েছে নাকি?
কালই হল। জ্যেঠিমা করছিল, ভীষণ ভালো লাগছিল।
বোলা মাত্রই মার মুখে থেকে খিস্তির ফোয়ারা ছুটল – ওরে আমার কচি ভাতার চুদে চুদে গুদটা খাস্তা বানিয়ে দে। ওরে হারামির বাচ্চা তোর মুন্ডিটা আমার জরায়ুতে ধাক্কা মারছে, খুব সুখ পাচ্ছি রে।

এমন সময় জ্যেঠিমার প্রবেশ। পরনে সায়া ওঃ ব্লাউজ, হাতে গ্লাস। কি খবর মেজ? কবার হল?
চোদন সুখে হিসহিস করতে করতে মা বলল, দু বার, একবার চুসিয়ে, আর একবার ঠাপিয়ে। আরও একবার বেড় করব। তুমি ঠিকই বলেছ বড়দি, একদম পাগল করে দিচ্ছে। চোখের সামনে এত ভালো জিনিস ছিল দেখতে পাইনি গো।
জ্যেঠিমনি ন্যাংটো হয়ে আমাদের পাশে চলে এসেছে।

বড়দি আরও একবার নেবে নাকি? কাটা কাটা ভাবে মা বলল – ওদের দেখে গরম খেয়ে গেছি, একবার রসটা বেড় করে নি। অ্যায় শুয়োরের বাচ্চা, তোর বাঁড়াটা বেড় করে তোর বড় বৌয়ের গুদে ভোরে দে।
বড় বৌ মেজ বৌয়ের পোজে আসন নিয়েছে। পকাত করে ওর রসসিক্ত গুদে রডটা ঢুকে গেল।

ওরে সতীন, তোর গুদটা আমার মুখের কাছে ধর চুসে দি। বড় বৌ মেজ বউয়ের গুদ চুসছে, মেজ নিজের মাই নিজে টিপছে আর আমি বড় বউয়ের কোমর ধরে ঠাপের পর ঠাপ দিয়ে চলেছি।
মামনি আবার রস ছাড়ল। জ্যেঠি আঃ আঃ করে রস খসাল। জ্যেঠি আমার রসটা মায়ের গুদে ফেলতে বলল। কয়েকটা ঠাপ মেরে গলগল করে রস ছেড়ে দিলাম। জ্যেঠির গুদ মা, মায়ের গুদ আমি, আমার বাঁড়া জ্যেঠি চেটে পরিস্কার করলাম।

দুপুরে স্নান করে খাওয়া দাওয়ার পর সবাই ঘুমাল। ঘুম থেকে উঠে চা খেতে খেতে অনুদি বলল, কিরে বুড়িগুলোকে নিয়ে পরেছিস? তুই তো বুড়োদের দলে ভিড়েছিস।
তোর বাবা কি চোদাটাই না চুদল রে? পাক্কা এক ঘণ্টা চুদে তবেই রস বেড় করল।
তোর কবার হল রে? ঝুমকির কি খবর রে?

আমি তিন বার আউট করেছি। ঝুমিকে ছোটকা কোনও মতে একবার করেছে। মাই গুলো টনটন করছে। তোকে আজ কিন্তু একবার চাই।
আমি তো তোকে চাই। রাত্রে তো গ্রুপ সেক্স। সবাই সবাইকে করতে পারে।
সন্ধ্যে সাতটায় জ্যেঠিমা সবার সামনে ঘোষণা করল, আজ রাত্রে সবাই নিজের পছন্দ মত পার্টনার বেছে নিতে পারে। আবার যখন খুশি বদলাতেও পারে। একজন চাইলে দুজনকে নিতে পারে। তাহলে শুরু করা যাক ড্রিঙ্ক।

দু পেগ খাওয়ার পর অনুদি ইশারা করল। ওর সঙ্গে ঘরে গেলাম। দারুণ সেজেছে ও। পরনে কালো শিফন শাড়ি। ব্লউসের বোতামের শেষ ভাগ আর শাড়ির শুরুর মধ্যে এক হাত পার্থক্য।
ঘরে ঢুকেই ঠোটে একটা চুমু খেল। আমিও প্রতিদান দিলাম। এই তাড়াতাড়ি শুরু কর। তোকে নিয়ে টানাটানি হতে পারে।
কেন রে?
কেন আবার? মা আর মেজ কাকিকে তো পাগল করে দিয়েছিস। মাই তো বলল রাতে নিস। তোর বাঁড়াটা নাকি দারুণ। দেখা তো একবার।

আমি পাজামা নামিয়ে দিলাম। ও দেখে চমকে উঠল। এ তো বাবার থেকে বড় ছেলের বাঁড়া। মা ওঃ জ্যেঠি তাই বলছিল।
ও শাড়ি ও ব্লাউজ খুলে আলনায় রেখে আমার বাঁড়াটা পরখ করতে লাগল। ওর বেল নন স্লিপ ব্রার হুক খুলে দিতেই ওর ফর্সা সুডৌল মাই বেড়িয়ে এল। একদম হাতের মাপের।
দু হাতে দুটো স্তন বারকতক চাপ দিতেই ও ফিসফিস করে বলল, প্লীজ স্যাক মাই ভ্যাজিনা।

সায়াটা খুলেই ওর গুদের দিকে এগিয়ে যেতেই ওর সুগভীর নাভির দিকে নজর পড়ল। যেন বাচ্চা মেয়ের গুদ। নাভিতে জিভ ঠেকাতেই আঃ আঃ করে সুখের জানান দিল। ওর সিক্ত যোনিতে জিভ দিতেই আমার চুলের গছা খামচে ধরল। মিনিট পাঁচেক পরে ও পিচিক পিচিক করে গুদের জল খালাস করল।
আমার আখাম্বা বাঁড়াটা ওর গুদের কাছে নিয়ে গিয়ে বললাম, আজ তোকে এমন চোদন সুখ দেব তোর চিরদিন মনে থাকবে। কামে জর্জরিত হয়ে ও বলল, কাম অন প্লীজ ফাক মি।

দেরী না করে ওর ২৪ বসন্তের গুদ আমার কাম দণ্ড প্রবেশ করালাম। মিনিট দশেকের মধ্যে ও আবার জল বেড় করল। ইচ্ছে করলে আরও কিছুক্ষণ মাল ধরে রাখতে পারতাম কিন্তু একটা মাগী নিয়ে পরে থাকতে চাইছিলাম না। কিন্তু ওর গুদে মাল না ফেললে ও ছারবে না।তাই কটা ঠাপ মেরে বললাম, এই মাগী তোর গুদ ফাঁক কর আমার মাল আসছে। ভলকে ভলকে ওর গুদে আমার তাজা বীর্য ফেললাম।

নীচে এসে দেখলাম রান্নাঘরে জ্যেঠিমা মাংস কসাচ্ছে আর পেছন থেকে বাবা ওর নাইটি তুলে ঠাপাচ্ছে। দুজনেই নেশায় একেবারে চুর।
জ্যেঠি বলল, প্লীজ ঠাকুরপো রান্না শেষ করতে দাও।
রান্না তো এমনিতেই হয়ে যাবে বৌদি, তোমাকে আর খুন্তি নারতে হবে না। তুমি শুধু কড়ার ওপর খুন্তিটা ধরে থাকো, ঠাপের তালে তালে খুন্তিটা নিজেই নড়বে।
তুমি ভীষণ অসভ্য ঠাকুরপো, নাও আমি ছাড়ছি।

একটা ঘরে জ্যেঠুর বাঁড়া গুদে ঢুকিয়ে ঝুমি ঠাপ মারছে। ঠাপের তালে তালে ওর বেলের মত দুধ দুটো ছলাক ছলাক করে নরছে। জ্যেঠু ওর একটা দুধ খামচে ধরে বলল, ঝুমি তোর কচি গুদে আমার বাঁড়া দিয়ে মনে হচ্ছে বাঁড়ার তেজ যেন আরও বেড়ে গেছে।
তোমাদের তিন ভাইয়ের মধ্যে তোমার বাঁড়ার তেজ বেশি। আমার গুদে কেমন রস কাটছে দেখেছ।

আরেকটা ঘরে মা, ছোট কাকা, রমা কাকিমা তিনজনেই উলঙ্গ। ছোট কাকা মায়ের গুদ চাটছে আর মা রমা কাকিমার মাই চটকাচ্ছে। আমাকে দেখে ছোট কাকি বলে উঠল, এই সুক অ্যায় তোর জন্যই অপেক্ষা করছি রে। একমাত্র আমিই বাকি আছি তোর বাঁড়ার স্বাদ পেটে।
মা সায় দিয়ে বলল, হ্যাঁরে খোকা ছোটকে একবার ভালো করে চুদে দে তো।
সবার চোদাচুদি দেখে বাঁড়া খাঁড়া হয়ে গেছে, গুরুজনদের আদেশ অমান্য করলাম না। রপমা কাকির উপরে উঠে ওর কাতলা মাছের মত খাবি খাওয়া গুদে আখাম্বা বাঁড়া পরপরিয়ে ঢুকিয়ে দিলাম।

রমা কাকি স্বস্তির নিঃশ্বাস ফেলে বলল, একদম গুদ ভর্তি, কচি বাঁড়া না পেলে চুদিয়ে সুখ পাওয়া যায় না।
তাহলে বুঝতে পারছিস ছোট, আমার গুদ দিয়ে কি জিনিস বেরিয়েছে। গুদ চোষাতে চোষাতে মা বলল।
সত্যি দিদি ধন্য তোমার গুদ। তলঠাপ মেরে রমা বলল।
উদ্দাম চুদছি রমা কাকিমাকে। কিছুক্ষণের মধ্যে রমা কাকি জল ছেড়ে দিল।

এমন সময় ঝুমি ঘরে ঢুকে বলল, এই দাদা আমাকে একবার চোদ না দাদা।
ওর স্বাদ অপূর্ণ রাখতে ইচ্ছে হল না। রমা কাকির গুদ থেকে বাঁড়া বেড় করে ঝুমির গুদে ঢুকিয়ে দিলাম। উত্তেজনায় ঝুমি দু হাত দিয়ে আমাকে জড়িয়ে ধরে ফিসফিস করে বলল, ভালো করে চুদে দে দাদা।
আমার ঠাপের চোটে ঝুমি চোখে সর্ষেফুল দেখছে। উঃ উঃ কি আরাম! মাগো মা, আমি মরে যাব, এর চেয়ে ভালো আমায় মেরে ফেল।

অসহ্য সুখে ওর নিঃশ্বাস বন্ধ হয়ে আসতে চাইছিল। গুদের গর্তটার গা চুইয়ে অজস্র রসকনা ঝরে পড়ছিল গুদের ভেতরে। ফিওলে অত শক্ত বাঁড়াটা খুব সহজেই গর্তটার মধ্যে ভেসে বেড়াতে পারছিল। গুদের সঙ্গে বাঁড়ার ঘসায় মিষ্টি শব্দ উঠছিল পুচ পুচ পচ পচ।
এ সুখ অভাবনীয়, অকল্পনীয়।

আর পারল না ঝুমি। চিৎকার করে উঠল, আর পারলাম না দাদা। আঃ আঃ গেল গেল।
আমি ওকে দু হাতে জাপটে ধরে বাঁড়াটা ঠেসে ধরলাম ওর নরম গুদে। ফিনকি মেরে মেরে সব রস ঢেলে দিলাম। মুখ তুলে দেখি সারা পরিবার এসে হাজির হয়েছে। সবাই মুগ্ধ হয়ে আমাকে দেখছে।

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